Viral News: जिस सरकारी नौकरी के लिए लोग सपने देखते हैं. लाखों लोग तैयारी करते हैं, उसी सरकारी नौकरी को एक झटके में एक महिला ने छोड़ दिया. महिला की केंद्र सरकार में सरकारी नौकरी थी. सरकारी नौकरी छोड़ने को लेकर अब महिला ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की है, जिसमें उसने बताया कि गलत दिशा में जा रही बस से कब उतरेंगे वाली स्थित में आ गई है. उसने नौकरी छोड़ने के फैसले के बारे में अपने माता-पिता को भी नहीं बताया है. अब उसकी पोस्ट पर काफी प्रतिक्रियाएं हैं. कुछ लोग उसके फैसले को सही बता रहे हैं तो कुछ लोग उसे अपने मन की सुनने को कह रहे हैं.
मैकेनिकल इंजीनियर है महिला
बेंगलुरु की महिला प्रिया ने एक्स पर पोस्ट किया है. उसके बॉयो के अनुसार, वह एक मैकेनिकल इंजीनियर है. उसने एक्स पर लिखा कि मैंने अपनी सेंट्रल गवर्नमेंट की नौकरी से इस्तीफा दे दिया है. मुझे नहीं पता, मैंने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती तो नहीं कर दी है. उसने बताया कि अभी वह उस स्थिति में है, जैसे आप किसी बस में बैठते हैं और बीच रास्ते में पता चलता है कि बस तो गलत दिशा में जा रही है. आपको उधर तो जाना ही नहीं है.
गलत दिशा में जा रही बस का दिया उदाहरण
आप बस से उतरना चाहते हैं, पर आप टिकट के लिए पैसे दे चुके हैं. बस में बैठे लोगों को भी लगता है कि आप गलती कर रहे हैं. पर अब आधे रास्ते में हैं और आपको समझ नहीं आ रहा है, अब कहां जाएं. महिला ने एक्स पर सवाल किया कि क्या हो, अगर आपकी ज़िंदगी का सबसे मुश्किल फैसला कुछ ऐसा छोड़ना हो, जिसे पाने के लिए बाकी सब आपको किस्मत वाला मानते हों?
महिला ने बताया कि उसे सरकारी नौकरी में हर महीने सैलरी मिलती थी. एक तरह की निश्चितता थी. एक ऐसी ज़िंदगी थी जिसका पता था कि आगे क्या होगा. लेकिन मैं अगले 5 या 10 साल तक भी ऐसा ही काम करते रहने के बारे में सोच नहीं पा रही थी. अब मैं बहुत डरी हुई हूं. मुझे नहीं पता कि आगे क्या होगा. कभी-कभी मुझे लगता है कि कहीं मैं कोई बहुत बड़ी बेवकूफी तो नहीं कर रही हूं.
नौकरी छोड़ने के बारे में माता-पिता को भी नहीं बताया
महिला ने नौकरी छोड़ने के फैसले के बारे में अपने माता-पिता को भी नहीं बताया है. उनकी उम्र 60 साल से ज़्यादा है. महिला ने कहा कि उसने इसलिए अपने माता-पिता को नहीं बताया, क्योंकि उसके बारे में सोचकर उन्हें चिंता होगी और दुख पहुंचेगा. महिला ने कहा कि वहां बने रहना भी उतना ही तकलीफदेह लगता है, जितना कि उसे छोड़ देने पर हो रहा है. आप कब तक गलत दिशा में चलते रहेंगे, सिर्फ इसलिए क्योंकि आपको डर है कि आपके पास जाने के लिए कोई और जगह नहीं है?
महिला के एक्स पर कई लोगों ने कमेंट किए हैं. वसंत नाम के एक यूजर ने लिखा कि जापान में एक कहावत है, "अगर आप गलत ट्रेन में चढ़ गए हैं, तो जितनी जल्दी उतर जाएं, उतना ही अच्छा है." लेकिन ज़्यादातर लोग उतरने से डरते हैं, क्योंकि उन्हें पक्का नहीं पता होता कि उन्हें सही ट्रेन मिलेगी या नहीं. वे अपनी मंज़िल खुद नहीं चुनते, बल्कि ट्रेन उन्हें जहां भी ले जाए, वे उसी को स्वीकार कर लेते हैं.
I put in my papers to resign from a Central Government job. And I'm still not sure if I've made the biggest mistake of my life. What if the hardest decision of your life is leaving something everyone else thinks you're lucky to have? Imagine getting on a bus and realising halfway through that it's going in the wrong direction. You want to get off. But you've paid for the ticket. Everyone else is staying. They think you're making a mistake. And you have no idea where to go instead. That's exactly where I am right now. My job gave me a salary every month. Certainty. A predictable life. But I couldn't imagine doing it for another 5 or 10 years. Now I'm terrified. I don't know what comes next. Some days, I wonder if I'm being reckless. I haven't even told my parents, who are in their late 60s. Not because I'll depend on them financially, or because they depend on me. But because the thought of causing them worry and pain makes this decision even harder. Staying feels just as painful as leaving. How long do you keep going in the wrong direction just because you're afraid of having nowhere else to go?
— Priya (@PriyaCeladine) October 17, 2026
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दूसरे को अच्छा बुरा तय करने का हक नहीं है
वहीं, दूसरे यूजर ने कमेंट किया कि अगर आपको यह सही लगता है, तो यह आपके लिए मायने रखता है. किसी और को यह तय करने का हक नहीं है कि आपके लिए क्या अच्छा है या बुरा. यह सिर्फ आप ही तय कर सकते हैं. अपने निजी अनुभव से बताऊं तो, UPSC में दूसरी बार फेल होने के बाद, मैंने इसे छोड़ दिया. लोगों ने मुझे बेवकूफ कहा, यह कहते हुए कि बाकी लोग कम से कम पांच साल देते हैं और मेरे पास अभी भी कुछ मौके बचे थे.
मैं उन्हें समझा नहीं पाया, इसलिए अब मैं बस यही कहता हूं कि इसमें अब कोई मज़ा नहीं आ रहा था, और मैं आगे बढ़ गया. मैं अब ऐसा ही इंसान बन गया हूं. मेरे लिए ज़िंदगी मज़ेदार है, भले ही मैं कभी परेशान या डरा हुआ क्यों न होऊं. मुझे वह वादा याद है जो मैंने पिछले साल किया था... कुछ भी अच्छा या बुरा नहीं होता, सब कुछ बस एक अनुभव है. अगर मैं दूसरों से अपनी तुलना करना और दूसरों से अपनी अहमियत की पुष्टि (validation) मांगना बंद कर दूं, तो मैं जो चाहूं वह कर सकता हूं.
(अस्वीकरण: यह कहानी X पर वायरल हुई एक पोस्ट और उसके बाद मिली सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं पर आधारित है. एनडीटीवी ने पोस्ट में उल्लिखित व्यक्तियों द्वारा किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है.)
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