आगरा. जब लग्जरी गाड़ियों की बात आती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले BMW या मर्सिडीज का नाम आता है. लेकिन अगर कोई आपसे कहे कि एक घोड़े की कीमत इन गाड़ियों से भी ज्यादा है, तो यकीन करना थोड़ा मुश्किल होगा. उत्तर भारत के मशहूर बटेश्वर पशु मेले में इस बार कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है. मेला शुरू होने में अभी छह दिन बाकी हैं, लेकिन देशभर से व्यापारी अपने बेशकीमती घोड़ों के साथ यहां डेरा डालने लगे हैं. इस बाजार में फिलहाल दो घोड़ों ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींच रखा है. एक का नाम 'बादल' है और दूसरे का 'चेतक'. इन दोनों की कीमत तीन-तीन करोड़ रुपये बताई जा रही है .
कौन हैं ये खास घोड़े और इनके मालिक?
आगरा के एत्मादपुर में रहने वाले कमल कांत त्यागी (संचालक, भारद्वाज स्टड फार्म, अलीगढ़) इन दोनों घोड़ों को लेकर मेले में पहुंचे हैं.सफेद रंग के 'बादल' की उम्र 36 महीने और ऊंचाई 67 इंच है. यह मशहूर गुलजार लाइन नस्ल का घोड़ा है. काले रंग का 'चेतक' 30 महीने का यह घोड़ा शानदार मारवाड़ी नस्ल का है .
कमल कांत को अपने घोड़ों की नस्ल और कद-काठी पर इतना भरोसा है कि उन्होंने खुला चैलेंज दे दिया है. उनका कहना है कि अगर पूरे मेले में कोई इनसे बेहतर घोड़ा दिखा दे, तो वह उसे इनाम देंगे. यही वजह है कि बादल और चेतक की एक झलक पाने के लिए लोगों की भारी भीड़ जुट रही है.

क्या वाकई मिलेगा 3 करोड़ का खरीदार?
देखिए, तीन करोड़ रुपये की कीमत फिलहाल मालिक ने तय की है. बाजार का सीधा नियम है कि असली कीमत वही होती है, जिस पर खरीदार अपनी मुहर लगाए. अब देखना यह है कि इन घोड़ों की बोली कहां तक जाती है और क्या वाकई कोई इन्हें इस कीमत पर खरीदता है या नहीं. घोड़ों के अलावा राजस्थान और दूसरे राज्यों से ऊंट व्यापारी भी पहुंचने लगे हैं. मेले में करोड़ों का लेनदेन होता है, इसलिए पुलिस भी पूरी तरह मुस्तैद है. व्यापारियों को साफ हिदायत दी गई है कि वे किसी अनजान व्यक्ति के झांसे में न आएं और पैसों के लेनदेन व खानपान में पूरी सावधानी बरतें.
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क्यों खास है बटेश्वर?
आगरा से करीब 70 किलोमीटर दूर यमुना किनारे बसा बटेश्वर सिर्फ पशु मेले के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान के लिए भी जाना जाता है. यहां यमुना के घाट पर भगवान शिव के 101 मंदिरों की एक अद्भुत शृंखला है. कार्तिक पूर्णिमा के आसपास पूरे एक महीने तक चलने वाला यह मेला उत्तर भारत के सबसे बड़े पशु मेलों में गिना जाता है. साथ ही, यह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का पैतृक गांव भी है और पास ही भगवान नेमिनाथ से जुड़ा प्रसिद्ध जैन तीर्थ शौरीपुर भी मौजूद है.
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