- चेंग ली-वुन कुओमिन्तांग पार्टी की सदस्य हैं, जो ताइवान के चीन के साथ बेहतर संबंधों की समर्थक है
- दोनों नेताओं ने ताइवान जलडमरूमध्य को संघर्ष के केंद्र बनने से रोकने और शांति का प्रतीक बनाने पर जोर दिया
- चेंग ने ताइवान के सैन्य निर्माण में कमी और अमेरिकी हस्तक्षेप का विरोध करने का संकेत दिया है
दुनिया में चर्चा थी कि चीन कभी भी ताइवान पर हमला कर सकता है. मगर एक तस्वीर ने दुनिया को चौंका दिया. ताइवान में विपक्ष की नेता चेंग ली-वुन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीजिंग में मुलाकात की तो हर कोई बस चौंक गया. सबसे खास बात ये कि दोनों नेताओं ने ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध किया और ताइवान के भविष्य को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद के "शांतिपूर्ण" समाधान की इच्छा व्यक्त की. उन्होंने ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल्स में तस्वीरें खिंचवाईं और सार्वजनिक रूप से अपने विचार साझा किए, साथ ही उन्होंने एकांत में बैठक भी की.
चेंग कौन हैं
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, चेंग शी जिनपिंग से मिलने वाली ताइवान की दूसरी सबसे उच्च पदस्थ नेता हैं. उनसे पहले 2015 में सिंगापुर में ताइवान के राष्ट्रपति मा यिंग-जेउ ने शी जिनपिंग से मुलाकात की थी. इसके बाद दो साल पहले, पद से हटने के बाद फिर मा यिंग और शी जिनपिंग की चीन में मुलाकात हुई थी. चेंग और मा दोनों कुओमिन्तांग पार्टी के हैं, जो ताइवान की रूढ़िवादी राजनीतिक पार्टी है और ताइवान की स्वशासित लोकतांत्रिक सरकार द्वारा चीन के साथ अधिक जुड़ाव की वकालत करती है.
चेंग और शी जिनपिंग क्या बोले
- ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, अपने सार्वजनिक संबोधन में चेंग ने इस बात पर जोर दिया कि चीनी और ताइवानी नेताओं को "राजनीतिक टकराव और आपसी शत्रुता से ऊपर उठकर" काम करना चाहिए. अंग्रेजी अनुवाद के अनुसार, चेंग ने कहा, "हमारी दोनों पार्टियों के अथक प्रयासों से, हम आशा करते हैं कि ताइवान जलडमरूमध्य अब संघर्ष का संभावित केंद्र या बाहरी शक्तियों के लिए शतरंज का खेल नहीं बनेगा." उन्होंने आगे कहा, "इसके बजाय, यह पारिवारिक संबंधों, सभ्यता और आशा को जोड़ने वाला जलडमरूमध्य बनना चाहिए - दोनों तरफ के चीनी लोगों द्वारा संयुक्त रूप से संरक्षित शांति का प्रतीक."
- चेंग के संबोधन में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के जाने-माने विचार शामिल थे, जिसमें उन्होंने घोर गरीबी उन्मूलन में अपनी सफलता से लेकर "चीनी राष्ट्र के महान पुनरुत्थान" के लक्ष्य तक की प्रशंसा की. खुली बैठक के दौरान, शी जिनपिंग ने ताइवान और चीन के साझा इतिहास और संस्कृति पर जोर देते हुए कहा कि "ताइवानी नागरिकों सहित सभी जातीय समूहों के लोगों ने मिलकर चीन का गौरवशाली इतिहास लिखा है."
- शी जिनपिंग ने कहा, "चीन के सभी पुत्र-पुत्रियों की जड़ें और भावनाएं एक ही हैं. यह रक्त संबंधों से उपजी हैं और हमारे इतिहास में गहराई से समाई हुई हैं - इसे भुलाया नहीं जा सकता और मिटाया नहीं जा सकता." उन्होंने आगे कहा कि बीजिंग, केएमटी और ताइवानी समाज के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर ताइवान जलडमरूमध्य में "शांति के लिए काम करने" को तैयार है.
चीन में विपक्ष और सत्ता में कौन सी पार्टी
आपको बता दें कि कुओमिन्तांग (KMT) या चीनी राष्ट्रवादी पार्टी, चीन के इतिहास की एक अत्यंत महत्वपूर्ण राजनीतिक पार्टी है, जिसे 1912 में सन यात-सेन द्वारा स्थापित किया गया था. 1928 से 1949 तक मुख्य भूमि चीन में शासन करने के बाद, यह 1949 में कम्युनिस्टों से हारकर ताइवान चली गई. वर्तमान में, KMT ताइवान की प्रमुख विपक्षी पार्टी है और चीन के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों की वकालत करती है. ताइवान में वर्तमान में डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (DPP) सत्ता में है, और लाइ चिंग-ते (Lai Ching-te) ताइवान के राष्ट्रपति हैं. उन्होंने मई 2024 में साई इंग-वेन से पदभार ग्रहण किया. यह पार्टी ताइवान की संप्रभुता का समर्थन करती है और चीन की आक्रामक नीतियों का विरोध करती है.
सेना भी कम करना चाहता है विपक्ष
दोनों नेताओं ने ताइवान-चीन संबंधों में "विदेशी हस्तक्षेप" का विरोध किया - जिसका संदर्भ अमेरिकी हस्तक्षेप से था - जबकि चेंग ने संकेत दिया कि वह ताइवान के सैन्य निर्माण को धीमा करेंगी, यह जानकारी अटलांटिक काउंसिल के ग्लोबल चाइना हब के अनिवासी फेलो वेन-टी सुंग ने दी. संक्षेप में, संदेश यह था कि ताइवान को रक्षा निर्माण और अमेरिकी हथियारों की खरीद को धीमा करना चाहिए.
ताइवानी राष्ट्रपति ने बताई पूरी बात
इस बैठक से पहले फेसबुक पर लिखते हुए, डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) के ताइवानी राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने लिखा कि केएमटी विशेष रक्षा बजट की मंजूरी में देरी करते हुए “जानबूझकर अंतर-दलीय वार्ताओं से बच रही है.” लाई ने कहा कि उनकी सरकार भी शांति का समर्थन करती है, लेकिन "अवास्तविक कल्पनाओं" का नहीं. शी जिनपिंग द्वारा शांति के वादे किए जाने के बावजूद, चीन ने हाल के वर्षों में ताइवान के आसपास के जलक्षेत्र और हवाई क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति लगातार बढ़ाई है. 2022 से, चीन के सशस्त्र बलों ने ताइवान जलडमरूमध्य में छह बार कई दिनों तक चलने वाले सैन्य अभ्यास किए हैं. यह 180 किलोमीटर चौड़ा जलमार्ग ताइवान को मुख्य भूमि एशिया से अलग करता है.
एक दशक से सत्ता से दूर है विपक्षी दल
लाई ने फेसबुक पर लिखा, "इतिहास हमें बताता है कि सत्तावादी शासनों के साथ समझौता करने से केवल संप्रभुता और लोकतंत्र का बलिदान होता है; इससे न तो स्वतंत्रता मिलेगी और न ही शांति." चीन सत्तारूढ़ डीपीपी के नेतृत्व पर अलगाववादी एजेंडा चलाने का आरोप लगाता है. डीपीपी एक विशिष्ट ताइवानी पहचान की वकालत करती है और पिछले एक दशक से विश्व मंच पर ताइवान की छवि को बेहतर बनाने का प्रयास कर रही है, जिससे बीजिंग में गुस्सा है. 2016 में डीपीपी के सत्ता में आने के तुरंत बाद चीनी नेतृत्व ने ताइपे के साथ औपचारिक संपर्क तोड़ दिया, हालांकि वह केएमटी सहित विभिन्न समूहों के माध्यम से संवाद जारी रखे हुए है. यही कारण है कि ताइवान के कुछ हिस्सों, विशेष रूप से सत्तारूढ़ डीपीपी के सदस्यों के बीच, चेंग की चीन यात्रा को संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है. मतलब साफ है कि ताइवान की सरकार को चीन के साथ अपने विपक्षी दल से भी (जो खुद कभी चीन से लड़कर अलग हुई थी) आज खतरा हो गया है.
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