भारत और अमेरिका सितंबर 2026 के पहले सप्ताह में अपने संयुक्त सैन्य अभ्यास 'युद्ध अभ्यास 2026' का आयोजन करेंगे. यह इस अभ्यास का 22वां संस्करण होगा. इसमें दोनों देशों के करीब 350-350 सैनिक हिस्सा लेंगे. अभ्यास दो अलग-अलग इलाकों में होगा. पहला उत्तराखंड के औली में और दूसरा राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में.
औली का चयन क्यों है खास?
उत्तराखंड का औली समुद्र तल से करीब 2,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. यह इलाका चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगभग 95 किलोमीटर दूर है. आपको बता दें कि 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सैन्य गतिरोध के बाद से भारतीय सेना ऊंचाई वाले इलाकों में युद्ध की तैयारी पर खास ध्यान दे रही है. ऐसे में औली का चयन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
पहली बार शामिल होंगे अपाचे हेलीकॉप्टर
तीन सप्ताह तक चलने वाले इस अभ्यास में पहली बार AH-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर शामिल किए जाएंगे. इसके साथ ही लंबी दूरी तक मार करने वाले सैन्य संसाधनों का भी इस्तेमाल होगा. इससे दोनों सेनाओं को थल और वायु सेना के संयुक्त अभियान यानी "कम्बाइंड आर्म्स ऑपरेशन" का अभ्यास करने का मौका मिलेगा. सैनिक सटीक निशाना लगाने, हवाई सहायता और तेज सैन्य कार्रवाई जैसी क्षमताओं को भी परखेंगे.

पहाड़ से रेगिस्तान तक प्रशिक्षण
औली में सैनिकों को ऊंचाई वाले इलाकों में युद्ध की चुनौतियों का सामना करना होगा. यहां कम ऑक्सीजन, खराब मौसम और कठिन भूभाग में अभियान चलाने का अभ्यास किया जाएगा. साथ ही ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रसद पहुंचाने और सैनिकों के अनुकूलन की क्षमता भी जांची जाएगी. वहीं राजस्थान के महाजन में अभ्यास का फोकस अलग होगा. यहां लाइव फायरिंग, बख्तरबंद वाहनों की गतिविधियां और तोपखाने तथा विमान के बीच तालमेल का परीक्षण किया जाएगा.
पिछले साल अलास्का में हुआ था अभ्यास
युद्ध अभ्यास 2025 का आयोजन अमेरिका के अलास्का में हुआ था. उस दौरान दोनों सेनाओं ने बेहद ठंडे और बर्फीले सब-आर्कटिक माहौल में प्रशिक्षण लिया था. इस बार सैनिकों को पहाड़ी और रेगिस्तानी दोनों परिस्थितियों में अभ्यास का अनुभव मिलेगा.
2004 में हुई थी शुरुआत
युद्ध अभ्यास की शुरुआत 2004 में एक छोटे द्विपक्षीय सैन्य कार्यक्रम के रूप में हुई थी. पिछले दो दशकों में इसका दायरा लगातार बढ़ा है. शुरुआत में इसका फोकस आतंकवाद और उग्रवाद विरोधी अभियानों पर था. अब इसमें ऊंचाई वाले क्षेत्रों में युद्ध, मानवीय सहायता, आपदा राहत और संयुक्त सैन्य अभियानों जैसे विषय भी शामिल हैं.
भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग का अहम हिस्सा
युद्ध अभ्यास भारत और अमेरिका के बीच होने वाले सबसे बड़े और नियमित सैन्य अभ्यासों में से एक है. इसके अलावा दोनों देश नौसैनिक अभ्यास मालाबार अभ्यास और वायुसेना अभ्यास कोप इंडिया में भी साथ हिस्सा लेते हैं. रक्षा जानकारों का मानना है कि ऐसे सैन्य अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की तैयारी को मजबूत करने में मदद करते हैं.
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