'हमने कहा था कि हम राजनीतिक अस्थिरता को खत्म करेंगे और हम ऐसा करके दिखाएंगे...' 5 जुलाई 2024 को कीर स्टार्मर ने ये बात कही थी. उन्होंने ऐसा इसलिए कहा था कि क्योंकि कंजर्वेटिव पार्टी के दौर में ब्रिटेन ने जबरदस्त राजनीतिक अस्थिरता देखी थी. वहां की जनता ने 5-5 प्रधानमंत्री बदलते देखे थे.
लेकिन जिस राजनीतिक अस्थिरता को दूर करने का वादा कीर स्टार्मर ने किया था, वह उसे पूरा नहीं कर सके. दो साल से भी कम समय में उनका कार्यकाल खत्म हो रहा है. इसकी वजहें थीं- गलतियां, पार्टी की अंदरूनी कलह और एक बहुत बड़ी भूल. एक ऐसी भूल जिसने उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से जेफ्री एपस्टीन से जोड़ दिया. वही एपस्टीन जो दुनिया के सबसे बड़े यौन अपराधियों में से एक है. स्टार्मर कभी एपस्टीन से मिले नहीं थे और उसके यौन अपराधों में भी उनकी कोई भूमिका नहीं थी.
सोमवार को इस्तीफे का ऐलान करते हुए स्टार्मर भावुक हो गए. उन्होंने कहा कि लेबर पार्टी के नेता का पद छोड़ रहे हैं. हालांकि, वह तब तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहेंगे, जब तक लेबर पार्टी का नया नेता नहीं चुन लिया जाता.
राजनीतिक रूप से नासमझ थे स्टार्मर?
मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस के प्रोफेसर रॉब फोर्ड ने AP से कहा, कीर स्टार्मर ने एक कामयाब कानूनी करियर के बाद 50 की उम्र में सियासत में कदम रखा था, इसलिए सियासी चालों को भांपने की 'समझ' की कमी थी.
स्टार्मर इंग्लैंड और वेल्स के चीफ प्रॉसिक्यूटर थे. इसके लिए उन्हें 'नाइट' की उपाधि दी गई थी. उनके विरोधी अक्सर उनके 'सर कीर स्टार्मर' वाले खिताब का इस्तेमाल उन्हें एक 'एलीट' और 'लंदन के वामपंथी वकील' के तौर पर दिखाने के लिए करते थे.
जबकि स्टार्मर को ऐसा नहीं माना जाता. वह सादगी पसंद इंसान हैं. उन्हें फुटबॉल बहुत पसंद है. 63 की उम्र में भी वह फुटबॉल खेलते हैं. उन्हें पब में बीयर पीते हुए अपनी पसंदीदा टीम 'आर्सेनल' का मैच देखने से ज्यादा कुछ पसंद नहीं है. स्टार्मर और उनकी पत्नी विक्टोरिया के दो बच्चे हैं, जिन्हें वे लाइमलाइट से दूर रखते हैं.

इस्तीफे की घोषणा के बाद पत्नी से गले मिलते कीर स्टार्मर.
Photo Credit: PTI
स्टार्मर 2015 में पहली बार सांसद बने थे. 2020 में लेबर पार्टी ने उन्हें अपना नेता चुना था. उन्हें ऐसे वक्त में नेता चुना गया था, जब लेबर पार्टी की हालत बहुत खराब थी. उनके पास राजनीतिक अनुभव था. उन्होंने लेबर पार्टी को राजनीतिक रूप से 'सेंटर' की ओर मोड़ा. उन्होंने लेबर पार्टी के नेताओं की वामपंथी नीतियों को पीछे छोड़ दिया. उन्होंने यहूदी-विरोधी भावनाओं के लिए माफी भी मांगी.
यह भी पढ़ेंः इजरायल ने खोज निकाला तबाही का 'पाताललोक', किसने जुटाए जमीन के नीचे इतने हथियार
जीत में ही छिपी थी हार की वजह!
स्टार्मर जब सांसद थे, तब उन्होंने कंजर्वेटिव पार्टी को जमकर घेरा. कंजर्वेटिव पार्टी 10 साल से सत्ता में थी लेकिन उस दौर में जबरदस्त राजनीतिक अस्थिरता रही.
4 जुलाई 2024 को लेबर पार्टी 14 साल बाद बड़े बहुमत के साथ सत्ता में आई. उनकी पार्टी ने हाउस ऑफ कॉमन्स की 650 में से 411 सीटें जीतीं. लेकिन उनकी हार की कुछ वजहें उनकी जीत में ही छिपी थीं. भारी बहुमत मिलने के बावजूद लेबर पार्टी को सिर्फ 34% वोट मिले थे. इनमें से ज्यादातर वोट इसलिए मिले थे, क्योंकि वोटर कंजर्वेटिव पार्टी से नाराज थे और उनके पास लेबर पार्टी को वोट देने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था.
शुरुआत से ही उनकी सरकार को लेकर लोगों में कोई खास उत्साह नहीं थी. स्टार्मर की कई गलतियों ने इस स्थिति को और खराब कर दिया. शुरुआत में डिजाइनर चश्मे और टेलर स्विफ्ट के कॉन्सर्ट के टिकट जैसे मुफ्त तोहफे लेने पर हंगामा हुआ. इसके बाद कई नीतियों पर उनकी सरकार ने यू-टर्न लिया. उनकी सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च कम करने की कोशिश की, जिससे लेबर पार्टी के भीतर ही नाराजगी पैदा हो गई.
एक 'भूल' जिससे चली गई स्टार्मर की कुर्सी!
स्टार्मर की कुर्सी जाने की सबसे बड़ी वजह पीटर मैंडेलसन है, जिन्हें उनकी सरकार ने अमेरिका में UK का राजदूत नियुक्त किया था.
मैंडेलसन एक ऐसे व्यक्ति थे, जो ब्रिटेन को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में मदद कर सकते थे. दुनिया के सबसे अमीर लोगों के साथ मैंडेलसन के अच्छे संबध थे. उन्होंने ही ब्रिटेन और अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौता करवाने में मदद की थी, जिससे ब्रिटेन को ट्रंप के टैरिफ से राहत मिली.
लेकिन मैंडेलसन को चुनना स्टार्मर की सबसे बड़ी 'भूल' साबित हुआ. दस्तावेजों में खुलासा हुआ कि मैंडेलसन ने 2003 में खुद को एपस्टीन का 'सबसे अच्छा दोस्त' बताया था. सितंबर 2025 में कई ऐसे दस्तावेज सामने आए, जिनसे पता चला कि एपस्टीन के साथ उनके संबंध कितने गहरे थे. स्टार्मर ने मैंडेलसन को पद से हटा दिया लेकिन खुलासे होने से उनकी कुर्सी खतरे में आ गई.

पीटर मैंडेलसन और कीर स्टार्मर.
मैंडेलसन-एपस्टीन से जुड़े खुलासे स्टार्मर पर भारी पड़ गए. लेबर पार्टी के कई सांसदों ने इस फैसले को स्टार्मर पर सही फैसला न ले पाने की क्षमता पर आरोप लगाया.
इस बात को लेकर काफी गुस्सा था कि प्रधानमंत्री ने मैंडेलसन को इतने संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल पद पर नियुक्त किया. स्टारमर ने मैंडेलसन को तब बर्खास्त किया जब सितंबर में ईमेल का पहला बैच सामने आया, जिसमें दिखाया गया था कि नाबालिग से जुड़े यौन अपराधों के लिए 2008 में दोषी ठहराए जाने के बाद भी मैंडेलसन एपस्टीन के दोस्त बने रहे.
लेकिन जनवरी 2026 में सार्वजनिक किए गए ईमेल से पता चला कि मैंडेलसन ने 2009 में, जब वे लेबर कैबिनेट के सदस्य थे, तब एपस्टीन को संवेदनशील और संभावित रूप से मार्केट को प्रभावित करने वाली सरकारी जानकारी भी दी थी. सरकारी पद का दुरुपयोग करने के आरोप में पुलिस ने मैंडेलसन को गिरफ्तार किया और उनसे पूछताछ की, लेकिन उन पर कोई चार्ज नहीं लगाया गया है.
इसके बाद यह खुलासा हुआ कि राजदूत पद के लिए सिक्योरिटी क्लियरेंस में फेल होने के बावजूद मैंडेलसन को नियुक्त किया गया था. इसके लिए स्टार्मर ने माफी भी मांगी. उन्होंने दावा किया कि उन्हें सिक्योरिटी क्लियरेंस में फेल होने की जानकारी भी नहीं थी. लेकिन उनकी बात किसी ने नहीं सुनी.
यह भी पढ़ेंः एंडी बर्नहम 17 जुलाई तक बन पाएंगे ब्रिटेन के नए PM, बस एक शर्त है
मई की हार ने ठोक दी आखिरी कील!
इस साल मई के स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी को पूरे इंग्लैंड में 1,100 से ज्यादा काउंसिल सीटें गंवानी पड़ी. जबकि रिफॉर्म यूके पार्टी ने 1,450 से ज्यादा सीटें जीती. इस हार के बाद लेबर पार्टी के अंदर स्टार्मर के खिलाफ बगावत हो गई. 80 से ज्यादा लेबर सांसदों ने स्टार्मर से पद छोड़ने की मांग की.
14 मई को स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपने इस्तीफे में स्टार्मर से कहा कि उन्हें अब उनकी लीडरशिप पर 'भरोसा नहीं रहा' और सरकार में बने रहा अब उनके लिए 'सम्मान और सिद्धांतों के खिलाफ' होगा.
इसके बाद इस्तीफों की होड़ लग गई. जून में रक्षा मंत्री जॉन हीली ने भी इस्तीफा दे दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि स्टार्मर देश को बढ़ते खतरों से सुरक्षित रखने के लिए जरूरी फंड देने में नाकाम रहे हैं.

एंडी बर्नहम
स्थानीय निकाय चुनावों में हार के बाद लेबर पार्टी ने कई कदम उठाए. इस बीच ब्रिटेन की सियासत में लेबर पार्टी के नेता एंडी बर्नहम तेजी से उभरे. उन्होंने दावा किया कि वह 'रिफॉर्म यूके' को हरा सकते हैं. मैनचेस्टर के एक लेबर सांसद ने अपनी सीट छोड़ दी, ताकि बर्नहम संसदीय चुनाव लड़ सकें. मैनचेस्टर की मेकरफील्ड सीट पर हुए उपचुनाव में 19 जून को एंडी बर्नहम ने जबरदस्त जीत हासिल की.
उनकी शानदार जीत ही ब्रिटिश राजनीति के लिए एक ऐसा 'टर्निंग पॉइंट' साबित हुई, जिसने स्टार्मर को पद छोड़ने पर मजबूर कर दिया. अब एंडी बर्नहम ही नए प्रधानमंत्री की रेस में सबसे आगे चल रहे हैं.
यह भी पढ़ेंः न हाथ मिलाया, न फोटो खिंचाया... जेडी वेंस को ईरान- कतर ने किया नजरअंदाज, VIDEO में दिखी गजब तकरार
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं