ब्रिटेन में गंभीर घोटालों और नीतिगत यू-टर्न के आरोपों से घिरे ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर सोमवार (22 जून 2026) को अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं. ब्रिटिश अखबार 'द ऑब्जर्वर' की रिपोर्ट के मुताबिक, स्टार्मर सोमवार को ही अपने इस्तीफे की घोषणा के साथ देश के सामने नए नेता के चुनाव की समयसीमा भी रख सकते हैं. हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े एक सरकारी सूत्र ने इस बात का खंडन करते हुए कहा है कि स्टार्मर अभी भी अपना ध्यान पूरी तरह सरकार चलाने पर लगाए हुए हैं. यानी इस्तीफा देने के बजाय वह अपने पद पर बने रहने की सोच रहे हैं.
अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, स्टार्मर इस वक्त अपने गांव गए हुए हैं और अंतिम फैसला लेने से पहले अपनी पत्नी के साथ इस स्थिति पर चर्चा कर रहे हैं.

आखिर इस्तीफा देने तक कैसे पहुंच गई बात?
कीर स्टार्मर के इस तरह अचानक बैकफुट पर आने और इस्तीफे की नौबत पहुंचने के पीछे सबसे बड़ी वजह मैंडेलसन कांड है. दरअसल, स्टार्मर ने दिसंबर 2024 में पीटर मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त किया था. लेकिन फरवरी 2026 में हुए कुछ नए खुलासों ने ब्रिटिश राजनीति में भूचाल ला दिया. पता चला कि मैंडेलसन के संबंध बदनाम अमेरिकी अपराधी जेफरी एप्स्टीन के साथ थे, जो बाल यौन शोषण के मामलों में दोषी था.
संसदीय दस्तावेजों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मैंडेलसन ने कथित तौर पर एप्स्टीन को अपना पक्का दोस्त बताया था और जब वे सरकारी मंत्री थे, तब उन्होंने कुछ संवेदनशील मार्केट इन्फॉर्मेशन भी लीक की थीं. इसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ जांच शुरू की और उन्हें लेबर पार्टी और हाउस ऑफ लॉर्ड्स छोड़नी पड़ी. इस कांड ने प्रधानमंत्री स्टार्मर की साख को सीधा नुकसान पहुंचाया क्योंकि यह उनकी सरकार की सबसे अहम राजनयिक नियुक्तियों में से एक थी.
सुरक्षा जांच में फेल होने के बावजूद कैसे बन गए राजदूत?
इस विवाद में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब अप्रैल 2026 में यह खुलासा हुआ कि सरकारी सुरक्षा एजेंसी 'यूके सिक्योरिटी वेटिंग' (UKSV) ने मैंडेलसन को सुरक्षा मंजूरी देने से साफ मना कर दिया था. जांच एजेंसी ने उनकी बैकग्राउंड रिपोर्ट देखने के बाद सिफारिश की थी कि मैंडेलसन को यह पद न दिया जाए. इसके बावजूद, विदेश मंत्रालय (FCDO) के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने सुरक्षा एजेंसी की उस चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया और मैंडेलसन को मंजूरी दे दी.

पीटर मेंडेलसन
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पार्टी में किसने छेड़ दी बगावत?
स्टार्मर के लिए मुश्किलें सिर्फ मैंडेलसन कांड तक सीमित नहीं हैं. शुक्रवार (19 जून 2026) को लेबर पार्टी के ही कद्दावर नेता एंडी बर्नहैम ने संसद का एक उपचुनाव जीत लिया. बर्नहैम अब तक ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर के तौर पर अपनी मजबूत पकड़ बना चुके थे, लेकिन अब वे सांसद बनकर सीधे संसद पहुंच गए हैं. ब्रिटिश राजनीति के जानकारों का कहना है कि बर्नहैम की यह एंट्री स्टार्मर को सीधे चुनौती देने के लिए ही हुई है.

एंडी बर्नहम
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रॉयटर्स के आंकड़ों के मुताबिक, लेबर पार्टी के 100 से ज्यादा सांसद (जो कुल संख्या का लगभग एक चौथाई हैं) सार्वजनिक रूप से स्टार्मर के इस्तीफे या नए चुनाव की मांग कर चुके हैं. एंडी बर्नहैम के करीबियों ने स्टार्मर पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है कि वे खुद ही इज्जत से पद छोड़ दें, ताकि सत्ता का शांतिपूर्ण ट्रांसफर हो सके. 'द टाइम्स' अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बर्नहैम अगर प्रधानमंत्री बनते हैं तो वे मौजूदा वित्त मंत्री रेचल रीव्स को भी उनके पद से हटा सकते हैं, क्योंकि वे मौजूदा आर्थिक नीतियों से खुश नहीं हैं.
'किंग ऑफ द नॉर्थ': कौन हैं एंडी बर्नहम, जो ब्रिटेन के बन सकते हैं प्रधानमंत्री?
दस साल में 5 प्रधानमंत्री दे चुके इस्तीफा, क्या रही वजह?
- डेविड कैमरन (2016)- ब्रेक्सिट (EU से बाहर निकलने) के जनमत संग्रह में हार
- थेरेसा मे (2019)- संसद ने उनकी Brexit डील को तीन बार खारिज कर दिया. पार्टी और संसद का भरोसा खो दिया.
- बोरिस जॉनसन (2022)- घोटाले और पार्टी विद्रोह. कोविड के दौरान नियम तोड़कर पार्टी करने पर बवाल.
- (लिज ट्रस 2022)- टैक्स कट वाली नीति से पाउंड गिरा था. आर्थिक नीतियों पर भी सवाल उठे
- ऋषि सुनक (2024)- आम चुनाव में हार

2016 से अब तक के ब्रिटिश पीएम
स्टार्मर की घटती लोकप्रियता का खामियाजा
साल 2024 में जब कीर स्टार्मर भारी बहुमत के साथ सत्ता में आए थे, तब ब्रिटिश जनता को उनसे बड़ी उम्मीदें थीं. लेकिन दो साल के भीतर ही उनकी लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है. मतदाताओं का मानना है कि स्टार्मर ने जीवन स्तर सुधारने के जो वादे किए थे, वे उन्हें पूरा करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं. सरकार की नीतियों में लगातार आए यू-टर्न और भीतर खाने चल रहे घोटालों ने जनता का भरोसा तोड़ दिया है.
अगर कीर स्टार्मर सोमवार को इस्तीफा देते हैं या उन्हें जबरन पद से हटाया जाता है, तो ब्रिटेन को पिछले 10 साल के भीतर अपना सातवां प्रधानमंत्री मिलेगा. पिछले दो सदियों के इतिहास में ब्रिटेन के भीतर यह सबसे अस्थिर राजनीतिक दौर माना जा रहा है. ब्रिटिश जनता इस बात से भी बेहद गुस्से में है कि लगातार सरकारें बदलने के बावजूद देश की बदहाल सार्वजनिक सेवाएं और अवैध प्रवासियों जैसी गंभीर समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं.
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