- लखीसराय में NEET UG 2026 रि-एग्जाम के दौरान कई परीक्षा केंद्रों पर फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है.
- इस फर्जीवाड़े में शामिल फर्जी अभ्यर्थी, उनके सहयोगी और बायोमेट्रिक कर्मी सहित कुल 30 लोग गिरफ्तार हुए हैं.
- गिरफ्तार छात्रों में देश के प्रमुख मेडिकल कॉलेजों के MBBS, नर्सिंग और अन्य पेशेवर छात्र शामिल हैं.
NEET UG 2026 के रि-एग्जाम के दौरान बिहार के लखीसराय में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है. पुलिस ने अलग-अलग सेंटर्स से फर्जी अभ्यर्थी, उनके सहयोगियों और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन कर्मियों सहित कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. जानकारी के अनुसार, 4 परीक्षा केंद्रों पर NEET परीक्षा के दौरान सूचना मिली कि मूल अभ्यर्थियों के जगह डमी या स्कॉलर कैंडिडेट्स को बैठाया जा रहा है. इसके बाद कार्रवाई करके संदिग्धों को हिरासत में लिया है. जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में NEET परीक्षा के दौरान फर्जीवाड़े में शामिल 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार लोगों में दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने वाले कथित स्कॉलर, उनके सहयोगी और बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया में शामिल कर्मचारी भी शामिल हैं. शुरुआती जांच में पता चला कि कि यह कोई साधारण मामला नहीं, बल्कि एक संगठित परीक्षा माफिया नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है.
अलग-अलग सेंटर पकड़े गए संदिग्ध
दरअसल, 21 जून को लखीसराय जिले के 4 परीक्षा केंद्रों पर नीट पुनर्परीक्षा (NEET Re-Exam 2026) आयोजित की गई थी. परीक्षा शुरू होने के कुछ समय बाद प्रशासन को सूचना मिली कि कुछ केंद्रों पर वास्तविक परीक्षार्थियों की जगह दूसरे लोग परीक्षा दे रहे हैं. सूचना मिलते ही जिला प्रशासन सक्रिय हो गया. अनुमंडल पदाधिकारी और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई और कई परीक्षा केंद्रों पर एक साथ छापेमारी की गई. जांच के दौरान केआरके कॉलेज, केंद्रीय विद्यालय और उच्च विद्यालय हसनपुर समेत विभिन्न केंद्रों से कई संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया गया.
MBBS, नर्सिंग और अन्य छात्र शामिल
पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद पूरे मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं. पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए कई लोग देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों से जुड़े हुए हैं. इनमें मेडिकल छात्र, नर्सिंग छात्र और अन्य पेशेवर पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी शामिल हैं. जांच एजेंसियों के लिए भी हैरानी का विषय बना हुआ है कि उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्र इस तरह के अवैध काम में कैसे शामिल हो गए. गिरफ्तार कथित स्कॉलरों में न्यू जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज, एएनएमसीएच (ANMCH) गया, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज सतना, एम्स रायबरेली, बीएचयू, यूसीएमएस दिल्ली और एनएमसीएच पटना जैसे संस्थानों के MBBS छात्र शामिल हैं.


पुलिस को आशंका है कि इन छात्रों को मोटी रकम का लालच देकर इस काम में शामिल किया गया होगा. अब जांच का फोकस इस बात पर है कि इन लोगों तक कौन पहुंचा और पूरे नेटवर्क को कौन संचालित कर रहा था. पुलिस जांच में सामने आया है कि असली अभ्यर्थियों की जगह डमी परीक्षार्थियों को बैठाने के लिए फर्जी आधार कार्ड और दूसरे कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए थे. केवल दस्तावेज ही नहीं बनाए गए, बल्कि बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया को भी प्रभावित करने की कोशिश की गई.
इन लोगों की हुई गिरफ्तारी
- NEET परीक्षा में बैठे फर्जी अभ्यर्थी- मंतोष कुमार (न्यू जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज), विवेक कुमार (एएनएमसीएच गया), हिमांशु कुमार (गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज सतना), सौरभ जीझा (AIIMS रायबरेली), पूनम कुमारी (BHU नर्सिंग), अमन अग्रवाल (यूसीएमएस दिल्ली), रौशन कुमार (एनएमसीएच पटना), चंचल कुमारी (गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज, ओडिशा) और जितेंद्र कुमार.
- मूल अभ्यर्थी और उसके सहयोगी- संजीत कुमार, उसके दो सहयोगी अर्पित सिंह और रंजीत कुमार को भी गिरफ्तार किया है.
- बायोमेट्रिक कर्मी और सुपरवाइजर- बादल कुमार, कृष्णा कुमार, अंकित कुमार, मुकुंद कुमार, उदय कुमार, अखिलेश कुमार, मयंक कश्यप, विशाल कुमार, राकेश कुमार, अंकित कुमार, मोहित कुमार, सुदर्शन कुमार, अमलेश कुमार, अदिति कुमारी, घनश्याम कुमार, शंकर कुमार वर्मा, आर्यन कुमार और चंदन कुमार.

बड़े फर्जीवाड़ा का मिला प्रमाण
आरोप है कि बायोमेट्रिक जांच में लगे कुछ कर्मियों की मिलीभगत से फर्जी परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिलाया गया. इसी कारण पुलिस ने बड़ी संख्या में बायोमेट्रिक ऑपरेटरों और सुपरवाइजरों को भी गिरफ्तार किया है. लखीसराय के जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार ने कहा कि प्रशासन को परीक्षा के दौरान कुछ संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी. सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई की गई. उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े के प्रमाण मिले हैं और पूरे मामले की गहन जांच कराई जा रही है.
शैलेन्द्र कुमार ने यह भी कहा कि पहली नजर में यह एक संगठित गिरोह का काम लगता है. गिरफ्तार लोगों से पूछताछ की जा रही है और कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं. उन्होंने कहा कि जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है और इस मामले में शामिल अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है. चाहे कोई कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा. यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि नीट देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा है. हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर इस परीक्षा में शामिल होते हैं. ऐसे में यदि पैसे और फर्जी दस्तावेजों के दम पर कोई दूसरा व्यक्ति परीक्षा दे देता है, तो इसका सीधा नुकसान उन छात्रों को होता है जो ईमानदारी से तैयारी करते हैं.
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