अगर आप यातायात नियम तोड़कर इस उम्मीद में रहते हैं कि लोक अदालत में जाकर चालान की रकम आधी या उससे भी कम करा लेंगे, तो अब यह संभव नहीं होगा. सरकार ने ट्रैफिक चालान के नियमों को बेहद सख्त कर दिया है. नई व्यवस्था के तहत, अब ट्रैफिक पुलिस पेंडिंग चालानों को खुद कोर्ट नहीं भेजेगी और न ही आप सीधे कोर्ट जाकर भारी छूट पा सकेंगे. आइए इस नई व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानते हैं...
क्या है नई व्यवस्था?
केंद्रीय मोटर यान नियमावली 1989 (नियम 167) में हुए बदलाव के बाद, अब वाहन चालकों को हर हाल में तय समय-सीमा के भीतर खुद ही एक्शन लेना होगा.
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45 दिन का अल्टीमेटम
चालान कटने के 45 दिन के भीतर आपको जुर्माना भरना होगा या फिर 'NextGen mParivahan' पोर्टल पर डॉक्यूमेंट्स के साथ उसे गलत ठहराते हुए शिकायत करनी होगी. अगर आप 45 दिन तक कुछ नहीं करते हैं, तो मान लिया जाएगा कि आपको चालान मंजूर है.
कोर्ट जाने से पहले भरनी होगी 50% रकम
अगर आप पोर्टल पर चालान को चुनौती देते हैं, तो ट्रैफिक पुलिस को 30 दिन के भीतर उसका निस्तारण करना होगा. वहीं, अगर ट्रैफिक पुलिस आपकी शिकायत खारिज कर देती है और आप इसके खिलाफ कोर्ट (न्यायालय) जाना चाहते हैं, तो अब आपको राज्य सरकार के पोर्टल पर पहले चालान राशि का 50% जमा करना ही होगा. बिना आधी रकम चुकाए न्यायालय से कोई राहत नहीं मांगी जा सकेगी.
क्यों किया गया यह बदलाव?
दरअसल, पहले पुलिस खुद चालान कोर्ट भेज देती थी और वहां लगने वाली लोक अदालतों में लोग 50 प्रतिशत से भी कम रकम देकर चालान खत्म करवा लेते थे. अब इस प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और सख्त कर दिया गया है.
आंकड़ों पर डाले नजर
अकेले नोएडा में ही इस साल मई तक 11 लाख से अधिक चालान काटे जा चुके हैं. अब इन लाखों वाहन चालकों को नई और सख्त प्रक्रिया से गुजरना होगा. यातायात डीसीपी अभय मिश्रा ने भी स्पष्ट किया है कि अब चालान के भुगतान और उसे चुनौती देने, दोनों के लिए समय-सीमा बिल्कुल तय कर दी गई है। और न्यायालय जाने से पहले 50 प्रतिशत भुगतान भी करना होगा.
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