- लखनऊ के अलीगंज में कोचिंग सेंटर की आग में 13 छात्रों की मौत हो गई और कई घायल हुए थे.
- दिल्ली के मालवीय नगर के बी एंड बी होटल में लगी आग में 21 लोगों की जान गई, जिनमें विदेशी भी शामिल थे.
- तमिलनाडु के कुंभकोणम स्कूल अग्निकांड में 94 बच्चों की जलकर मौत हुई, हादसे की वजह अस्थायी रसोईघर की आग थी.
भारत में आगजनी की घटनाएं केवल हादसे नहीं होतीं, बल्कि कई बार ये ऐसी दर्दनाक कहानियां छोड़ जाती हैं जिन्हें सालों बाद भी भुलाया नहीं जा सकता. लापरवाही, सुरक्षा इंतजामों की कमी और अव्यवस्था की वजह से कई बार ऐसी त्रासदियां हुईं, जिन्होंने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. ताजा मामला लखनऊ के कोचिंग सेंटर का है, जहां भीषण आग में कई जिंदगियां बुझ गईं. आइए जानते हैं देश के उन बड़े अग्निकांडों के बारे में... जिन्होंने पूरे हिन्दुस्तान को हिला दिया.
लखनऊ कोचिंग अग्निकांड (2026): 13 जिंदगियां खत्म
यूपी की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक कोचिंग सेंटर में अचानक लगी आग ने खुशियों को मातम में बदल दिया. तीन मंजिला इमारत में लगी आग इतनी तेजी से फैली कि वहां पढ़ने आए छात्र संभल भी नहीं सके. इस हादसे में 13 छात्रों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हो गए. हालात ऐसे बन गए कि कुछ छात्रों को जान बचाने के लिए ऊंची मंजिलों से कूदना पड़ा. फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंचकर कई लोगों को बाहर निकाला.
दिल्ली मालवीय नगर हादसा (2026): विदेशी नागरीकों की मौत
इसी साल जून में दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक बी एंड बी होटल में लगी भीषण आग ने 21 लोगों की जान ले ली. आग इतनी भयानक थी कि लोग जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूदने को मजबूर हो गए. हादसे में मरने वालों में 9 भारतीय और 12 विदेशी नागरिक थे. इस हादसे ने एक बार फिर दिखा दिया कि बड़े शहरों में भी आग से निपटने की तैयारियां कितनी कमजोर हो सकती हैं.
उपहार सिनेमा कांड (1997): फिल्म के दौरान आई मौत
साल 1997 में दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित उपहार सिनेमा में लगी आग देश की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक मानी जाती है. सनी देओल की फिल्म ‘बॉर्डर' के शो के दौरान ट्रांसफार्मर में खराबी से आग लगी और 59 लोगों की मौत हो गई, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हुए. जांच में सामने आया कि एग्जिट गेट बंद थे, जिसके कारण लोग बाहर नहीं निकल सके और अंदर ही फंस गए.
कुंभकोणम स्कूल त्रासदी: 94 बच्चों की दर्दनाक मौत
तमिलनाडु के कुंभकोणम में 2004 में हुए स्कूल अग्निकांड ने पूरे देश को रुला दिया था. सरस्वती इंग्लिश मीडियम स्कूल में दोपहर के खाने के लिए बने अस्थायी रसोईघर से लगी आग छप्पर वाली कक्षा तक पहुंच गई, जहां 200 से अधिक बच्चे मौजूद थे. इस हादसे में 94 मासूम बच्चों की जलकर मौत हो गई, जबकि कई गंभीर रूप से घायल हो गए. यह घटना आज भी देश के सबसे भयावह हादसों में गिनी जाती है.
कोलकाता अस्पताल अग्निकांड (2011(): दम घुटने से गई जानें
9 दिसंबर 2011 को कोलकाता के एएमआरआई अस्पताल में लगी आग ने 89 लोगों की जान ले ली, जिनमें मरने वाले ज्यादातर मरीज थे. आग के बाद पूरा अस्पताल धुएं से भर गया और कई मरीज दम घुटने से मर गए. बताया जाता है कि अस्पताल ने फायर ब्रिगेड को समय पर सूचित नहीं किया. इस घटना ने अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे. बाद में इस मामले में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई भी हुई.
हर हादसा देता है चेतावनी
इन सभी घटनाओं में एक बात साफ नजर आती है कि सुरक्षा इंतजामों की कमी और लापरवाही. हर बड़े अग्निकांड के बाद नियम तो सख्त किए जाते हैं, लेकिन समय बीतते ही उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है. ऐसे में जरूरी है कि इन घटनाओं से सबक लिया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदियों को रोका जा सके और मासूम जिंदगियां यूं ही आग की भेंट न चढ़ें.
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