इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण जंग में एक बड़ी खबर आ रही है. इजरायली मीडिया की रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हमलों में ईरान के सेना प्रमुख अमीर हातमी मारे जा चुके हैं. ईरान की सेना के कमांडर इन चीफ हातमी की मौत की हालांकि न तो ईरान सरकार और न ही इजरायली सेना ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है.
खामेनेई ने पिछले साल बनाया था सैन्य प्रमुख
अमीर हातमी को ईरान की सैन्य रणनीति के सबसे महत्वपूर्ण चेहरों में से एक माना जाता है. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई जून 2025 में सैन्य लीडरशिप में बड़ा बदलाव करते हुए अमीर हातमी को ईरानी सेना (Artesh) का कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया था. खामेनेई ने हातमी की क्षमता और अनुभव की तारीफ करते हुए उन्हें सेना में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की जिम्मेदारी सौंपी थी. हातमी खामेनेई के सैन्य सलाहकार भी रहे हैं.

ईरान के कमांडर इन चीफ अमीर हातमी
14 साल की उम्र में ही उठा लिए हथियार
1966 में ईरान के जंजन में जन्मे अमीर हातमी का सैन्य सफर बहुत कम उम्र में शुरू हो गया था. महज 14 साल की उम्र में वह एक वॉलंटियर के रूप में बासिज फोर्स में शामिल हो गए थे. 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध में उन्होंने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया.
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रक्षा मंत्री बनकर तोड़ी थी परंपरा
मेजर जनरल हातमी ने 2017 से 2021 तक राष्ट्रपति हसन रूहानी के शासनमें ईरान के रक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया. पिछले दो दशकों में यह पहला मौका था, जब नियमित सेना से किसी को रक्षा मंत्री बनाया गया था. आमतौर पर इस पद पर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के अधिकारियों का दबदबा रहा करता था.
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— NDTV India (@ndtvindia) February 28, 2026
ईरान को दी मिसाइल, ड्रोन पावर
रक्षा मंत्री रहते हुए हातमी ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन प्रोग्राम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. खुर्रमशहर और फतेह जैसी एडवांस बैलिस्टिक मिसाइलें उन्होंने उन्होंने अपनी निगरानी में तैयार कराईं. हातमी ने विपक्षी गुटों के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन मरसाद जैसे बड़े अभियानों में अहम भूमिका निभाई. इसने सेना में एक निडर योद्धा के रूप में उनकी इमेज बनाई.
अमीर हातमी को हमेशा से ईरान की मिसाइल सेंट्रिक डिफेंस पॉलिसी का कट्टर समर्थक माना जाता रहा है. वह मानते हैं कि ईरान की संप्रभुता की हिफाजत के लिए मिसाइल शक्ति को मजबूत करना जरूरी है. अगर इस जंग में उनकी मौत की खबरें सच साबित होती हैं तो यह निश्चित रूप से ईरान के लिए एक बड़ा झटका होगा.
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