Israel-Iran War Impact: ईरान पर इजरायल-अमेरिका के हमले और ईरानी आयल फ़ील्ड्स पर हमले की आशंका से बढ़ती अनिश्चितता का सीधा असर पश्चिम एशिया में भारत के आर्थिक हितों पर पड़ना शुरू हो गया है. एक तरफ जहां अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चा तेल महंगा होना शुरू हो गया है, वहीं भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा बाजार ईरान में अनिश्चितता बढ़ने से एक्सपोर्टर तनाव में हैं. दरअसल इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने से बासमती चावल उद्योग पर संकट के बादल फिर गहराने लगे हैं.

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फार्च्यून राइस लिमिटेड के डायरेक्टर और ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के महासचिव, अजय भलोटिया ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि युद्ध शुरू होने से पहले पिछले दो महीनों के दौरान ईरानी आयातकों ने भारत से बहुत ज्यादा बासमती चावल की सप्लाई के लिए आर्डर दिए थे. इसकी वजह से भारत के स्थानीय बाजारों में बासमती चावल की कीमत भी करीब 10 रुपये/किलो तक बढ़ गयी थी.
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ऑल इंडिया Rice एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के मुताबिक:
- भारत से बासमती चावल के कुल एक्सपोर्ट का 25% निर्यात ईरान को होता है जबकि इराक को 20% निर्यात किया जाता है.
- इन दोनों को मिलाकर 2 मिलियन टन से ज्यादा का बासमती का एक्सपोर्ट होता है जिसका वैल्यू दो बिलियन डॉलर से ज्यादा है.
- पिछले साल भारत से कुल 1.2 बिलियन डॉलर का बासमती चावल ईरान एक्सपोर्ट हुआ था.
- युद्ध की वजह से इराक एक्सपोर्ट होने वाला बासमती चावल का एक्सपॉपर्ट भी प्रभावित होगा.
- ईरान में युद्ध की अनिश्चितता का असर पूरा मध्य एशिया चावल के निर्यात पर पड़ेगा
युद्ध से पहले ईरान में जारी राजनीतिक अनिश्चितता और अंदरूनी विरोध का वहां की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा था. इसके अलावा, पिछले महीने अमेरिका ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया. इन सभी वजह से ईरान की करेंसी रियाल की वैल्यू 50% तक गिर गई थी, जिस वजह से ईरान में आम लोगों की पर्चेज़िंग पावर पहले ही काफी घट चुकी है.
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