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ईरान और इजरायल युद्ध से भारतीय बासमती चावल और चाय निर्यात पर संकट के बादल

Israel-Iran War Impact: ईरान-इजरायल युद्ध ने भारत के बासमती चावल और चाय निर्यात पर संकट पैदा कर दिया है. ईरान को होने वाला 25% निर्यात दांव पर है, जिससे भारतीय एक्सपोर्टर्स की चिंताएं बढ़ गई हैं.

ईरान और इजरायल युद्ध से भारतीय बासमती चावल और चाय निर्यात पर संकट के बादल

Israel-Iran War Impact: ईरान पर इजरायल-अमेरिका के हमले और ईरानी आयल फ़ील्ड्स पर हमले की आशंका से बढ़ती अनिश्चितता का सीधा असर पश्चिम एशिया में भारत के आर्थिक हितों पर पड़ना शुरू हो गया है. एक तरफ जहां अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चा तेल महंगा होना शुरू हो गया है, वहीं भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा बाजार ईरान में अनिश्चितता बढ़ने से एक्सपोर्टर तनाव में हैं. दरअसल इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने से बासमती चावल उद्योग पर संकट के बादल फिर गहराने लगे हैं.

india basmati rice tea export

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फार्च्यून राइस लिमिटेड के डायरेक्टर और ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के महासचिव, अजय भलोटिया ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि युद्ध शुरू होने से पहले पिछले दो महीनों के दौरान ईरानी आयातकों ने भारत से बहुत ज्यादा बासमती चावल की सप्लाई के लिए आर्डर दिए थे. इसकी वजह से भारत के स्थानीय बाजारों में बासमती चावल की कीमत भी करीब 10 रुपये/किलो तक बढ़ गयी थी.  

ऑल इंडिया Rice एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के मुताबिक:

  • भारत से बासमती चावल के कुल एक्सपोर्ट का 25% निर्यात ईरान को होता है जबकि इराक को 20% निर्यात किया जाता है.
  • इन दोनों को मिलाकर 2 मिलियन टन से ज्यादा का बासमती का एक्सपोर्ट होता है जिसका वैल्यू दो बिलियन डॉलर से ज्यादा है.
  • पिछले साल भारत से कुल 1.2 बिलियन डॉलर का बासमती चावल ईरान एक्सपोर्ट हुआ था.
  • युद्ध की वजह से इराक एक्सपोर्ट होने वाला बासमती चावल का एक्सपॉपर्ट भी प्रभावित होगा.
  • ईरान में युद्ध की अनिश्चितता का असर पूरा मध्य एशिया चावल के निर्यात पर पड़ेगा
बासमती चावल एक्सपोर्टर अजय भलोटिया ने एनडीटीवी से कहा, "युद्ध शुरू होने पर भारत से एक्सपोर्ट होने वाला बासमती चावल का निर्यात लगभग ठप्प हो गया है. भारत से ईरान एक्सपोर्ट किये गए बासमती चावल का एक बाद खेप अभी ट्रांजिट में है. मौजूदा माहौल में ईरानी आयातक इस बासमती चावल की डिलीवरी ले पाएंगे या नहीं इसको लेकर काफी अनिश्चितता है. साथ ही भारत से ईरान चाय का एक्सपोर्ट भी प्रभावित होने की आशंका है. साल 2024-25 के दौरान भारत से करीब 700 करोड़ का चाय ईरान एक्सपोर्ट किया गया था.

युद्ध से पहले ईरान में जारी राजनीतिक अनिश्चितता और अंदरूनी विरोध का वहां की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा था. इसके अलावा, पिछले महीने अमेरिका ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया. इन सभी वजह से ईरान की करेंसी रियाल की वैल्यू 50% तक गिर गई थी, जिस वजह से ईरान में आम लोगों की पर्चेज़िंग पावर पहले ही काफी घट चुकी है.

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