- तुषार कुमार 23 वर्ष की उम्र में ब्रिटेन के एल्स्ट्री और बोरेहामवुड के सबसे युवा भारतवंशी मेयर बने हैं
- तुषार कुमार ने किंग्स कॉलेज लंदन से पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई की और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई है
- मेयर बनने से पहले वे डिप्टी मेयर और ब्रिटेन के डिपार्टमेंट फॉर वर्क एंड पेंसंस में पॉलिसी एडवाइजर रह चुके हैं
ब्रिटेन में भारतवंशी तुषार कुमार ने इतिहास रच दिया है. तुषार सिर्फ 23 साल की उम्र में ब्रिटेन के सबसे युवा भारतवंशी मेयर बन गए हैं. तुषार कुमार को आधिकारिक तौर पर एल्स्ट्री (Elstree) और बोरेहामवुड (Borehamwood) का मेयर चुना गया है. आज ये पहले कोई भारतवंशी ये उपलब्धि हासिल नहीं कर पाया है. तुषार कुमार की नियुक्ति की घोषणा 'मेयर मेकिंग सेरेमनी' के दौरान हुई.
कौन हैं तुषार कुमार?
तुषार कुमार एक भारतवंशी हैं, जिन्होंने किंग्स कॉलेज लंदन से पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई की है. इसके बाद वह राजनीति की फील्ड में कूद पड़े. मेयर बनने से पहले तुषार कुमार डिप्टी मेयर के पद पर रह चुके हैं. तुषार कुमार कॉलेज के दिनों से ही सामाजिक और राजनीतिक मुद्दे उठाते रहे हैं. उन्होंने बोरेहामवुड में लोकल मुद्दों को बड़े स्तर पर उठाया, जिससे लोगों में उनकी एक अलग पहचान बनी. मेयर बनने से पहले तुषार कुमार ब्रिटेन के डिपार्टमेंट फॉर वर्क एंड पेंसंस में पॉलिसी एडवाइजर के रूप में भी काम कर चुके हैं.
सपना हुआ सच
किसी भारतवंशी के लिए ब्रिटेन में मेयर पर पहुंचना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इतनी कम उम्र में तुषार कुमार ने ये पद हासिल कर सबको चौंका दिया है. तुषार के लिए भी मेयर बनना किसी सपने के सच होने जैसा है. उन्होंने बताया, "'किंग्स कॉलेज लंदन में पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई करना मेरे लिए कापुी गर्व की बात है. इसके बाद अपने पसंदीदा शहर का मेयर बनने तक का सफर मेरे लिए किसी सपने जैसा है. मुझे यकीन नहीं था कि मेरा सपना इतनी जल्दी पूरा हो जाएगा. "
मेयर बन अब क्या करेंगे तुषार
तुषार कुमार ने बताया कि अब वह और लोगों की मदद कर पाएंगे. मेयर बन अब उनकी प्राथमिकता समुदाय के बीच ज्यादा से ज्यादा एक्टिव रहना, स्थानीय संगठनों और चैरिटी संस्थाओं का सपोर्ट करना और युवाओं को सार्वजनिक सेवा व सामुदायिक कार्यों में भाग लेने के लिए प्रेरित करना होगी. ऐसे हम ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों की मदद कर पाएंगे. बता दें कि तुषार सिर्फ राजनीतिक में ही सक्रिय नहीं हैं, बल्कि वह ब्रिटिश भारतीय बच्चों को फ्री में हिंदी भी सिखाते हैं. इसके अलावा स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, दीवाली, होली जैसे कार्यक्रमों का आयोजन कराते रहे हैं.
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