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लंदन में हर 35 मिनट में होने लगी एक गिरफ्तारी, आखिर ब्रिटेन में ऐसा क्या हुआ

टकराव की आशंका को देखते हुए राजधानी में 4,000 से अधिक पुलिस अधिकारियों को तैनात किया गया. वे दोनों रैलियों को आमने-सामने आने से रोकने के लिए तैनात किए गए. अधिकारी ड्रोन तो पुलिस के जवान घोड़ों और कुत्तों के जरिए चप्पे-चप्पे पर नजर रख रहे हैं.

लंदन में हर 35 मिनट में होने लगी एक गिरफ्तारी, आखिर ब्रिटेन में ऐसा क्या हुआ
लंदन के दोनों विरोध प्रदर्शनों में वांटेड अपराधी पुलिस ने गिरफ्तार किए हैं.
  • ब्रिटेन में दक्षिणपंथी और फिलिस्तीन समर्थक रैलियों के कारण सामाजिक और राजनीतिक तनाव गहरा गया है
  • लंदन पुलिस ने दोनों रैलियों के दौरान टकराव रोकने के लिए चार हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए
  • पहली बार लाइव फेशियल रिकग्निशन कैमरों का उपयोग कर 170 से ज्यादा वांछित अपराधियों को गिरफ्तार किया गया
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ब्रिटेन ज्वालामुखी की तरह उबल रहा है. अलग-अलग विचार एक-दूसरे के जानी दुश्मन बन गए हैं. सरकार से लेकर आम जनता तक बंट गई है. ब्रिटेन की पार्लियामेंट से लकर सड़क तक टकराव साफ दिख रहा है. शनिवार को ऐसा ही नजारा देखने को मिला. धुर दक्षिणपंथी नेता टॉमी रॉबिन्सन ने 'यूनाइट द किंगडम' रैली निकाली तो दूसरी तरफ फिलिस्तीन के पक्ष में हजारों लोग लंदन में जमा हो गए. कुछ लोग मौजूदा सरकार का अंत देखना चाहते थे, और कुछ अन्य लोगों का मानना ​​था कि आज ब्रिटेन में उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है. उनके अधिकार कुचलने की कोशिश हो रही है. दो धुर विरोधी विरोधी प्रदर्शनों को देखकर लंदन पुलिस ने भी ऐतिहासिक इंतजाम किए. टकराव की आशंका साफ नजर आ रही थी.

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दोनों पक्ष चाहते क्या हैं?

नकबा दिवस के उपलक्ष्य में निकाली गई फिलिस्तीन समर्थक रैली केंसिंग्टन से शुरू होकर पिकाडिली होते हुए वाटरलू प्लेस की ओर बढ़ी. नकबा दिवस उन फिलिस्तीनियों के विस्थापन को संदर्भित करता है जो 1948-49 में इजरायल के निर्माण के दौरान हुए युद्ध में अपने घरों से भाग गए थे या उन्हें बेदखल कर दिया गया था. इकट्ठे हुए लोगों के बीच "अति दक्षिणपंथियों को कुचल दो" और "फिलिस्तीनी बंधकों को रिहा करो" जैसे नारे लिखे झंडे और बैनर देखे जा सकते थे, जिनमें से कई लोगों ने केफियेह पहन रखी थी, जिसे फिलिस्तीनियों के साथ एकजुटता का प्रतीक माना जाता है. इन लोगों का कहना था कि इनके साथ लंदन में भेदभाव हो रहा है.

वहीं 'यूनाइट द किंगडम' रैली में शामिल प्रदर्शनकारी किंग्सवे में एकत्र हुए, फिर व्हाइटहॉल और पार्लियामेंट स्क्वायर में एक रैली के लिए रवाना हुए. कई लोगों को यूनियन ध्वज लहराते देखा गया, और "हम स्टारमर को बाहर चाहते हैं" के नारे सुनाई दिए. प्रदर्शनकारियों को "मेक इंग्लैंड ग्रेट अगेन (मेगा)" लिखी लाल टोपी पहने देखा जा सकता था, जबकि अन्य लोग यूनियन फ्लैग ओढ़े हुए थे. कुछ प्रदर्शनकारी यूनियन जैक और इजरायल के झंडे लहरा रहे थे, जबकि साउथ केंसिंग्टन इलाके में कई लोग यूनियन जैक और फिलिस्तीन के झंडों के साथ दिखाई दिए. इन लोगों का कहना था कि ब्रिटेन में बाहरी लोगों को ज्यादा बसा दिया गया है. वो इनका हक मार रहे हैं.

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पहली बार फेशियल रिकग्निशन कैमरों का इस्तेमाल

टकराव की आशंका को देखते हुए राजधानी में 4,000 से अधिक पुलिस अधिकारियों को तैनात किया गया. वे दोनों रैलियों को आमने-सामने आने से रोकने के लिए तैनात किए गए. अधिकारी ड्रोन तो पुलिस के जवान घोड़ों और कुत्तों के जरिए चप्पे-चप्पे पर नजर रख रहे हैं. बख्तरबंद वाहन भी तैयार रखे गए. प्रदर्शनों से पहले, मेट्रोपॉलिटन पुलिस के उप सहायक आयुक्त जेम्स हरमन ने कहा कि इस पुलिसिंग अभियान पर पुलिस बल को 4.5 मिलियन पाउंड का खर्च आएगा. मेट पुलिस ने कहा कि जोखिमों को देखते हुए उन्हें "उच्चतम स्तर की नियंत्रण व्यवस्था" लागू करनी पड़ी, जिसमें विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिसिंग अभियान के तहत पहली बार लाइव फेशियल रिकग्निशन कैमरों का उपयोग भी शामिल है. मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने इसे पिछले कई वर्षों में सबसे महत्वपूर्ण पुलिस अभियानों में से एक बताया है. 

प्रदर्शनों में 170 से ज्यादा वांछित अपराधी मिल गए

मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अनुसार, क्रॉयडन में चलाए गए लाइव फेशियल रिकग्निशन पायलट प्रोजेक्ट के दौरान 170 से ज्यादा वांछित अपराधियों को गिरफ्तार किया गया. इस पायलट प्रोजेक्ट में पहली बार स्थायी कैमरे लगाए गए थे. अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 तक चले छह महीने के इस ट्रायल के दौरान इलाके में अपराध दर में 10.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा से जुड़े अपराधों में सबसे ज्यादा 21 प्रतिशत की कमी आई. गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अपहरण, रेप और गंभीर यौन अपराधों के आरोपी भी शामिल थे. पुलिस का कहना है कि लाइव फेशियल रिकग्निशन तकनीक खतरनाक अपराधियों को पकड़ने में बेहद प्रभावी साबित हुई है. आमतौर पर इस तकनीक के लिए विशेष वैन और उपकरणों की जरूरत होती है, लेकिन इस पायलट में कैमरों को स्ट्रीट लाइट और दूसरे सार्वजनिक ढांचों पर लगाया गया. पुलिस ने 24 अलग-अलग ऑपरेशनों में इन स्थायी कैमरों का इस्तेमाल किया और कुल 173 गिरफ्तारियां कीं. औसतन हर 35 मिनट में एक गिरफ्तारी हुई.

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