- अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक मस्जिद पर हुए हमले में तीन लोगों की मौत हो गई, जिसमें दो किशोर हमलावर शामिल थे
- सुरक्षा गार्ड ने हमलावरों का सामना करते हुए बच्चों और समुदाय की जान बचाने के लिए अपनी जान न्यौछावर कर दी
- पुलिस के अनुसार सुरक्षा गार्ड की बहादुरी ने हमले को और अधिक घातक बनने से रोका और कई जानें बचीं
US mosque attack: सुबह का वक्त था. अमेरिका के कैलिफोर्निया की मस्जिद (इस्लामिस सेंटर) में बच्चे अपनी क्लास के लिए पहुंच रहे थे. मस्जिद के अंदर बने स्कूल में किंडरगार्टन से तीसरी कक्षा तक के बच्चे पढ़ते हैं. हर दिन की तरह उस दिन भी वहां का सुरक्षा गार्ड बच्चों और उनके परिवारों का मुस्कुराकर स्वागत कर रहा था. किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर बाद वही शख्स अपनी जान देकर दर्जनों लोगों की जिंदगी बचाने वाला है. कैलिफोर्निया के सैन डिएगो में इस्लामिक सेंटर पर हुए हमले में तीन लोगों की मौत हो गई. पुलिस के अनुसार, दो किशोर हमलावरों ने मस्जिद को निशाना बनाया. लेकिन वहां मौजूद सुरक्षा गार्ड ने हमलावरों का सामना किया और अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों को बचाने की कोशिश की. 17 और 18 साल के दोनों हमलावरों ने खुद को गोली मारकर जान दे दी.
CNN की रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षा गार्ड के दोस्त सैम हमीदेह ने बताया कि वह सिर्फ एक सिक्योरिटी गार्ड नहीं था, बल्कि पूरे कम्युनिटी का प्यारा इंसान था. उसके आठ बच्चे थे और वह अपने परिवार और समुदाय से बेहद प्यार करता था. रिपोर्ट के अनुसार सैम हमीदेह ने कहा, “वह सिर्फ कोई सिक्योरिटी गार्ड नहीं था. जब भी आप उससे मिलते थे, वह आपके चेहरे पर मुस्कान ले आता था. वह हमेशा पॉजिटिव ऊर्जा से भरा रहता था, भगवान पर गहरा विश्वास रखता था और हर किसी के साथ दयालुता से पेश आता था.”
अपनी जान देकर बचाई बच्चों की जान
सैम ने कहा कि उनका दोस्त जानता था कि वह बच्चों की रक्षा करते हुए अपनी जान दे रहा है. उन्होंने कहा, “अगर उसने वह गोली अपने ऊपर नहीं ली होती, तो हमलावर आसानी से सीढ़ियां चढ़कर ऊपर पहुंच जाते.” एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस प्रमुख स्कॉट वाल ने भी कहा कि सुरक्षा गार्ड के कदम बेहद बहादुरी भरे थे और उसने कई लोगों की जान बचाई.
पुलिस प्रमुख स्कॉट वाल के अनुसार, जब इस्लामिक सेंटर में गोलीबारी शुरू हुई तो सुरक्षा गार्ड ने हमलावरों का सामना किया और उन्हें आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की. पुलिस का कहना है कि उसकी बहादुरी भरी कार्रवाई ने हमले को और ज्यादा घातक बनने से रोक दिया. वाल ने बताया कि अगर सुरक्षा गार्ड हमलावरों के सामने नहीं खड़ा होता, तो वे आसानी से मस्जिद और उसके पास बने स्कूल तक पहुंच सकते थे. पुलिस के मुताबिक, उसने अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की सुरक्षा के लिए लड़ाई लड़ी और इसी दौरान वह मारा गया.
मस्जिद के इमाम ताहा हस्साने ने कहा कि इस दुखद घटना के बावजूद मस्जिद के सभी बच्चे, शिक्षक और कर्मचारी सुरक्षित हैं. सैम हमीदेह अपने दोस्त को याद करते हुए भावुक हो गए. उन्होंने कहा, “ऐसे इंसान के बारे में सोचकर दिल टूट जाता है, जो दूसरे लोगों के बच्चों को बचाने के लिए अपनी जान दे दे, ताकि वे अपने बच्चों को गले लगा सकें. लेकिन उसके अपने बच्चों को अब उसे दफनाना पड़ेगा.”
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं