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डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को दिए दो टास्क, यहां जानें खाड़ी में अमेरिका ने क्या क्या तैनात किया है

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हालांकि ईरान के साथ बातचीत की बात तो कर रहे हैं, लेकिन इलाके में अमेरिका जिस तरह से नौसैनिक बेड़े तैनात कर रहा है, उसे देखते हुए यह लग रहा है कि यह ईरान पर दवाब बनाने की रणनीति है या अमेरिका उस पर किसी भी समय हमला कर सकता है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को दिए दो टास्क, यहां जानें खाड़ी में अमेरिका ने क्या क्या तैनात किया है
नई दिल्ली:

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने ईरान से कह दिया है कि युद्ध टालने के लिए उसे दो काम करने होंगे. पहला यह कि वो परमाणु हथियार न बनाए और दूसरा यह कि वह प्रदर्शनकारियों की हत्या करना बंद करे. अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान के बीच भी अमेरिकी नौसैनिक बेड़े मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहे हैं. इसलिए अभी के हालात बता रहे हैं कि अमेरिकी किसी भी समय ईरान पर हमला कर सकता है. खाड़ी में तैनात अमेरिकी नौसैनिक बेड़ों में परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विमानवाहक युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन भी शामिल है. आइए देखते हैं कि मध्य पूर्व में अमेरिका ने क्या-क्या तैनात किए हैं.

अमेरिका ने पिछले साल जून में हुए 12 दिनों के ईरान-इजराइल युद्ध के दौरान भी दुनिया भर से अपने सैन्य संसाधनों को इस क्षेत्र में तैनात किया था. अमेरिका ने ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर बमबारी भी की थी. पिछले साल के अंतिम दिनों में अमेरिका ने इसी तरह से कैरेबियन सागर में सैन्य ताकत बढ़ाई थी.उसने वेनेजुएला के जहाजों को यह कहकर निशाना बनाया था कि वो ड्रग तस्करी में शामिल हैं. इसके बाद तीन जनवरी को अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई करते हुए वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगवा कर लिया था. उन्हें अमेरिका ले जाकर उन पर मुकदमा चलाया जा रहा है.

ट्रंप ने बीते हफ्ते अपने आधिकारिक विमान एयर फोर्स वन में पत्रकारों से कहा कि सैन्य बल सावधानी के तौर पर तैनात किए गए हैं.उन्होंने कहा था,''हमारी एक बहुत बड़ी नौसेना उस दिशा में जा रही है.लेकिन हो सकता है कि उसका इस्तेमाल न करना पड़े.''

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अमेरिका ने मध्य पूर्व में क्या क्या तैनात किया है 

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया है कि यूएएस अब्राहम लिंकन को मध्य पूर्व भेजा गया है. यह जहाज कैलिफोर्निया के सैन डिएगो से रवाना हुआ था. यह अमेरिकी नौसेना के सबसे बड़े युद्धपोतों में से एक है. कमांड ने यह नहीं बताया था कि उसकी तैनाती क्यों की गई है. मंगलवार को अमेरिकी वायु सेना के सेंट्रल कमांड ने कई दिनों तक चलने वाले सैन्य अभ्यासों की घोषणा की थी. इस अभ्यास में मध्य पूर्व, एशिया और अफ्रीका के करीब 20 देश शामिल होंगे. इन देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं. माना जा रहा है कि अब तक कम से कम 10 अमेरिकी युद्धपोत मध्य पूर्व में मौजूद हैं, जिनमें विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन भी शामिल है. बीबीसी ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से खबर दी थी कि विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन इस क्षेत्र में है, लेकिन एक सप्ताह से अधिक समय से यह ट्रैकिंग साइटों पर दिखाई नहीं दिया है.

यूएसएस अब्राहम लिंकन की ताकत क्या है?

यूएसएस अब्राहम लिंकन एक चलता-फिरता हवाई अड्डा है. यह 333 मीटर लंबा जहाज है. यह परमाणु ईंधन से चलता है. इसलिए इसे सालों-साल तक ईंधन की जरूरत नहीं पड़ती है. यह बहुत तेज गति से चल सकता है और दुश्मन के हमलों से बचने में सक्षम है. इसके साथ तीन आधुनिक मिसाइल विध्वंसक जहाज भी तैनात हैं. ये जहाज जमीन पर हमला करने वाली टॉमहॉक मिसाइलें और मिसाइल रक्षा प्रणाली से लैस हैं.इसके साथ करीब सात हजार नौसैनिक और मरीन जुड़े रहते हैं.
इस पर करीब 65 लड़ाकू विमान तैनात हैं. इनमें F/A-18 सुपर हॉर्नेट जैसे आधुनिक फाइटर जेट शामिल हैं.

युद्धपोत यूएसएस डेलबर्ट डी ब्लैक 

जहाजों की ट्रैकिंग करने वालों के मुताबिक अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस डेलबर्ट डी ब्लैक भी मध्य पूर्व पहुंच गया है. यह स्वेज नहर से होते हुए खाड़ी की ओर आया है. यूएसएस डेलबर्ट डी ब्लैक अमेरिकीनौसेना का एक अत्याधुनिक गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत है. इसका आधिकारिक नाम USS Delbert D Black (DDG-119) है. यह युद्धपोत समुद्र, हवा और पनडुब्बी तीनों तरह के खतरों से निपटने में सक्षम है.इस पर एजिस कॉम्बैट सिस्टम लगा है, जो रडार की मदद से एक साथ कई लक्ष्यों को पहचानकर उन पर हमला कर सकता है. इसमें टॉमहॉक क्रूज मिसाइल, स्टैंडर्ड मिसाइल, एंटी-सबमरीन हथियार और 5-इंच की तोप मौजूद हैं. यह जहाज दो हेलीकॉप्टर भी ले जा सकता है, जो निगरानी और पनडुब्बी-रोधी अभियानों में काम आते हैं. करीब 155 मीटर लंबा यह जहाज 30 करीब 56 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है. इसमें करीब 300 नौसैनिकों का दल रहता है. इस पर ऑस्प्रे विमान भी तैनात है, जो हेलीकॉप्टर की तरह लंबवत उड़ान भर सकता है और उतर सकता है, लेकिन विमान की तरह उड़ता है. 

इनके अलावा सैन्य निगरानी और संचार से जुड़े आधुनिक विशेष विमान  P-8 Poseidon, E-11A और E-3G Sentry की गतिविधियां भी खाड़ी के इलाके में देखी गई हैं. 

P-8 Poseidon 

यह एक समुद्री गश्ती और पनडुब्बी-रोधी विमान है. इसे अमेरिकी नौसेना इस्तेमाल करती है. यह समुद्र में दुश्मन की पनडुब्बियों, जहाजों और टॉरपीडो को खोजने में माहिर है. यह लंबी दूरी तक उड़ान भरकर यह समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करता है.

E-11A

यह एक हाई-एल्टीट्यूड कम्युनिकेशन रिले एयरक्राफ्ट है.इसका मुख्य काम पहाड़ी या दूरदराज के इलाकों में सेना और लड़ाकू विमानों के बीच कम्युनिकेशन बनाए रखना है. इस खूबी की वजह से इसे फ्लाइंग मोबाइल टावर भी कहा जाता है. अफगानिस्तान जैसे इलाकों में यह अमेरिकी सेना के लिए बहुत उपयोगी रहा था. 

E-3G Sentry

यह एक उन्नत रडार- युक्त हवाई निगरानी और कमांड विमान है. इसके ऊपर लगा बड़ा गोल रडार डोम सैकड़ों किलोमीटर दूर तक दुश्मन के विमानों, मिसाइलों और ड्रोन पर नजर रख सकता है. यह हवाई युद्ध में कमांड और कंट्रोल सेंटर की तरह काम करता है.

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन कब हुए 

ईरान में दिसंबर के अंतिम हफ्ते में ईरानी रियाल के अवमूल्यन के विरोध में प्रदर्शन शुरू हुए थे.देखते ही देखते इस विरोध प्रदर्शन ने पूरे ईरान को अपने आगोश में ले लिया था.देखते ही देखते यह प्रदर्शन सरकार विरोधी प्रदर्शन में बदल गया था. सुरक्षा बलों की कार्रवाई में हजारों लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद ट्रंप ने ईरान के धार्मिक नेताओं को निशाने पर लिया. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से कहा कि मदद आने वाली है. उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने कैदियों को फांसी दी, तो अमेरिका उस पर सैन्य कार्रवाई करेगा. बाद में ट्रंप ने यह कहते हुए नरमी दिखाई कि ईरानी सरकार ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि कैदियों को फांसी नहीं दी जाएगी. हालांकि ईरान उनके इस दावे से इनकार करता रहा है. 

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