- शशि थरूर ने डोनाल्ड ट्रंप को अनपेक्षित और अविश्वसनीय वैश्विक नेता बताते हुए उनकी नेतृत्व शैली की आलोचना की.
- उन्होंने ट्रंप की ट्वीट के जरिए घरेलू और विदेश नीति के महत्वपूर्ण संदेश देने की आदत पर सवाल उठाए.
- थरूर ने ट्रंप के बदलते बयान और ट्विटर-डिप्लोमेसी को वैश्विक कूटनीति के लिए असामान्य और अस्थिर बताया.
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने NDTV Keralam Power Play समिट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यवहार और वैश्विक नेतृत्व शैली पर कड़ी टिप्पणी की. थरूर ने कहा कि ट्रंप अनपेक्षित (unpredictable) और अविश्वसनीय (unreliable) हैं, और दुनिया ने कभी ऐसा नेता नहीं देखा, वह भी इतनी शक्तिशाली देश की कमान संभालते हुए.
थरूर ने ट्रंप की ट्वीट शैली पर उठाए सवाल
थरूर ने ट्रंप की आदत पर सवाल उठाया कि वे घरेलू और विदेश नीति के महत्वपूर्ण संदेश ट्वीट के ज़रिए जारी करते हैं. वही ट्वीट जिनमें वे अन्य विश्व नेताओं पर भद्दी टिप्पणियां भी करते हैं. उन्होंने कहा कि 28 फरवरी को अमेरिका‑इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद से ट्रंप के ट्वीट और बयान और भी भ्रमित करने वाले हो गए हैं.
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ईरान जंग में ट्वीट पर सवाल
ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के बदलते बयानों पर थरूर ने कहा, 'कभी कहते हैं युद्ध जल्दी खत्म होगा, फिर कहते हैं 4-8 हफ्ते… फिर कहते हैं ‘अब कोई लक्ष्य बचा नहीं.' सच यह है कि वे अनप्रेडिक्टेबल हैं. दुनिया ने ऐसा कोई नेता नहीं देखा.'
थरूर के अनुसार, ट्रंप की 'ट्विटर‑डिप्लोमेसी' ने वैश्विक कूटनीति को असामान्य मोड़ पर ला दिया है. उन्होंने कहा कि आज ट्रंप जो बोलते हैं, कल बदल देते हैं, इसलिए दुनिया नहीं जानती कि उनके किसी बयान को कितने भरोसे से लिया जाए.
'कुछ देश ट्रंप के आगे आत्मसमर्पण कर देते हैं'
भारत की विदेश नीति पर बोलते हुए थरूर ने कहा कि भारतीय सरकार ने आत्मसम्मान के साथ व्यवहार किया है, जबकि कुछ राष्ट्र ट्रम्प के आगे 'subordinate' बनने जैसा आचरण करते हैं, जो दरअसल आत्मसमर्पण जैसा है. उन्होंने पाकिस्तान पर कटाक्ष किया कि वह लगातार ट्रंप को खुश करने की कोशिश करता है, 'हम ऐसा नहीं कर सकते, और अच्छा है कि नहीं करते.'
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थरूर ने कहा कि भारत का काम दुनिया पर नैतिक भाषण देना नहीं बल्कि अपने हितों की रक्षा करना है. विशेषकर ईरान युद्ध के दौर में तेल और गैस सुरक्षा से जुड़े हित. उन्होंने कहा कि अमेरिका के खिलाफ अनावश्यक भव्यता का कोई मतलब नहीं, क्योंकि भारत के कई बड़े हित दांव पर हैं और हमारे खाड़ी के मित्र देश चाहते हैं कि भारत उनके प्रति संवेदनशीलता दिखाए.
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत पर संवेदना व्यक्त करने जैसी शिष्टता का पालन करना चाहिए. यह अंतरराष्ट्रीय मर्यादा का हिस्सा है.
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