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ईरान में नहीं गिरेगी इस्लामिक सरकार! अमेरिका को जंग में झोंककर ट्रंप को क्या मिला?

US Iran War: अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि लगभग दो हफ्तों से चल रही अमेरिका और इजरायल की लगातार बमबारी के बावजूद ईरान का नेतृत्व अभी भी काफी हद तक सुरक्षित है और जल्द उसके गिरने का खतरा नहीं है- रिपोर्ट

ईरान में नहीं गिरेगी इस्लामिक सरकार! अमेरिका को जंग में झोंककर ट्रंप को क्या मिला?
US Iran War: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान में जंग छेड़कर क्या मिला?
  • अमेरिका और इजरायल के युद्ध के बारह दिन बाद भी ईरान का नेतृत्व सुरक्षित और नियंत्रण में बना हुआ है
  • अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के अनुसार ईरान की सरकार के गिरने का कोई स्पष्ट खतरा फिलहाल नहीं दिख रहा है
  • पेंटागन रिपोर्ट के अनुसार छह दिनों में अमेरिका ने युद्ध पर ग्यारह अरब डॉलर से अधिक खर्च किया है
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US Iran War: ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के शुरू किए गए युद्ध के 12 दिन बीत चुके हैं. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन की रिपोर्ट में ही खुलासा हुआ है कि छह दिनों में 11.3 अरब डॉलर से ज्यादा रकम फूंक चुका है. भारतीय करेंसी में यह रकम 94 हजार करोड़ रुपये बैठती है. सवाल है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह जंग छेड़कर क्या पाया है. अब तो एक ऐसी रिपोर्ट भी सामने आई है जो ट्रंप सरकार की परेशानी और बढ़ा सकती है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की इस रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि लगभग दो हफ्तों से चल रही अमेरिका और इजरायल की लगातार बमबारी के बावजूद ईरान का नेतृत्व अभी भी काफी हद तक सुरक्षित है और जल्द उसके गिरने का खतरा नहीं है. 

रॉयटर्स ने यह रिपोर्ट मामले से जुड़े तीन सूत्रों के हवाले से छापी है.

रिपोर्ट में क्या लिखा है?

सूत्रों में से एक ने बताया कि खुफिया रिपोर्टों की “काफी बड़ी संख्या” में एक जैसा आकलन किया गया है कि ईरानी सरकार के गिरने का खतरा नहीं है और वह अभी भी ईरान की जनता पर नियंत्रण बनाए हुए है.  खुफिया रिपोर्ट यह भी दिखाती हैं कि 28 फरवरी के पहली लहर के हमले में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बावजूद ईरान के धार्मिक नेतृत्व में एकता बनी हुई है. 

रिपोर्ट के अनुसार इजरायल के एक सीनियर अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि बंद दरवाजों के पीछे हुई चर्चाओं में इजरायल के अधिकारी भी मानते हैं कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि यह युद्ध ईरान की धार्मिक सरकार के पतन का कारण बनेगा. सूत्रों ने यह भी कहा कि जमीन पर हालात लगातार बदल रहे हैं और ईरान के अंदर की स्थिति भी बदल सकती है.

ट्रंप के बदलते लक्ष्य और फजीहत लगातार बढ़ रही

पूरी दुनिया में तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण ट्रंप के लिए अमेरिका के अंदर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है. भले अमेरिका के राष्ट्रपति कह रहे हैं कि ईरान घुटनों पर आ गया है और 2003 के बाद अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अभियान “जल्द” खत्म हो सकता है. लेकिन सच्चाई तो यह है कि अगर ईरान के कट्टरपंथी नेता अपनी जगह पर मजबूत बने रहते हैं, तो ट्रंप के लिए युद्ध को खत्म करना मुश्किल हो सकता है. वो अपनी जनता, खासकर अपने MAGA वोट बैंक के सामने कौन सा मुंह दिखाएंगे जिनसे उन्होंने वादा किया था कि अमेरिका बिना मतलब की जंग नहीं लड़ेगा. अगर जंग लड़ना मजबूरी ही थी तो रिजल्ट क्या रहा. क्या अमेरिका के सारे खतरे खत्म हो गए हैं?

ट्रंप बार-बार गोल पोस्ट बदल रहे

ट्रंप और उनकी सरकार ने इस युद्ध के लिए बार-बार अलग-अलग कारण बताए हैं. जब अमेरिका के सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा की गई थी, तब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की जनता से कहा था कि वे “अपनी सरकार पर कब्जा कर लें.” लेकिन बाद में उनके शीर्ष सहयोगियों ने कहा कि ईरान के नेतृत्व को हटाना इस युद्ध का लक्ष्य नहीं है. अयातोल्ला अली खामेनेई के अलावा, इन हमलों में ईरान के कई सीनियर अधिकारी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कुछ सबसे ऊंचे पद के कमांडर भी मारे गए हैं. 

इसके बावजूद अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट बताती हैं कि रिवोल्यूशनरी गार्ड  और खामेनेई की मौत के बाद सत्ता संभालने वाले अंतरिम नेता अभी भी देश पर नियंत्रण बनाए हुए हैं. ट्रंप कभी कहते हैं कि ईरान पूरी तरह सैन्य रूप से कमजोर हो चुका है तो कभी कहते हैं सरेंडर करने पर ही जंग खत्म होगी.

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