- अमेरिका और रूस की खुफिया एजेंसियों ने शीत युद्ध के बाद भी एक-दूसरे की जमीन पर हत्या की कोशिश नहीं की थी
- आरोपितों में FSB के अधिकारी और विदेशी नागरिक शामिल हैं, जो अमेरिकी राजधानी में असंतुष्ट को मारना चाहते थे
- FBI को एन्क्रिप्टेड मैसेज मिले थे, जिसमें हत्या के लिए $40,000 का भुगतान करने की योजना बताई गई थी
अमेरिका और रूस की जंग तो कभी नहीं हुई पर दोनों की खुफिया एजेंसियों की जंग बहुत पुरानी है. दूसरे विश्वयुद्ध के बाद दोनों सुपर पावर दुनिया में अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए अपनी खुफिया एजेंसियों के जरिए सरकारें बना और गिरा रहे थे. इसे ही शीत युद्ध नाम दिया गया. 90 के दशक में ये खत्म हुआ. मगर अब जो रिपोर्ट आई है, वो चौंकाने वाली है.
मॉस्को रूल्स क्या है
द गार्जियन की रिपोर्ट है कि रूस की खुफिया एजेंसियों ने अमेरिका में अपने दुश्मनों को मारने की कोशिश की. ऐसा सोवियत काल में भी नहीं हुआ था. यहां तक की शीत युद्ध के दौरान भी कभी सोवियत संघ की खुफिया एजेंसियों ने इसकी कोशिश नहीं की थी. क्रेमलिन के खिलाफ आवाज उठाने वालों के लिए अमेरिका की जमीन को पारंपरिक रूप से सुरक्षित माना जाता रहा है, चाहे वह सोवियत संघ का दौर हो या व्लादिमीर पुतिन के रूसी फ़ेडरेशन का. क्रेमलिन के एजेंट लंदन के वाटरलू ब्रिज से गुजरने वाले लोगों पर जहर लगी छतरी से हमला करके बच निकल सकते हैं—जैसा कि 1978 में बुल्गारिया के आलोचक जॉर्जी मार्कोव के साथ हुआ था, लेकिन ब्रुकलिन ब्रिज या अमेरिका के किसी भी इलाके में इस तरह की हत्याओं का जोखिम उठाना बिल्कुल अलग बात है.

अगर इसे तथाकथित 'मॉस्को रूल्स' (पश्चिमी और रूसी जासूसों के लिए मशहूर काम करने के नियम) का हिस्सा नहीं भी माना जाए, तो भी निश्चित रूप से एक अनौपचारिक समझौता या 'जेंटलमैन एग्रीमेंट' जरूर था कि कोई भी पक्ष दूसरे की जमीन पर हत्या नहीं करेगा. मगर इस हफ्ते इस सोच में बदलाव आ गया. पिछले साल लंदन में एक मुकदमे के दौरान, रूसी सरकार के आलोचक पत्रकार रोमन डोब्रोखोतोव का नाम उन लोगों में लिया गया था, जिन्हें एक रूसी जासूस गिरोह ने निशाना बनाया था; ऐसा लगता था कि इस गिरोह का मकसद हत्या करना था. ब्रिटेन में डोब्रोखोतोव के खिलाफ साजिश के बारे में रूस के लिए काम करने वाले एक व्यक्ति ने मैसेज में लिखा था, "शायद उसे सड़क पर जिंदा जला दें, या उत्तर कोरियाई लोगों की तरह VX जैसा बहुत तेज असर वाला एसिड या रिसिन उस पर छिड़क दें." अब 43 साल के डोब्रोखोतोव अमेरिका में हैं. उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि आज से अमेरिका में नियम बदल गए हैं. हमें वहां अपने व्यवहार में बदलाव करना होगा. अब कोई भी जगह सुरक्षित नहीं है."

रूसी सरकार के आलोचक पत्रकार रोमन डोब्रोखोतोव की तस्वीर.
अब ऐसा क्या हो गया
ऐसा कहने के पीछे वॉशिंगटन कॉन्फ्रेंस पर छाए रहने वाली सबसे बड़ी वजह मंगलवार को हुई एक घोषणा थी, जिसमें अमेरिकी न्याय विभाग ने रूस की खुफिया एजेंसियों के लिए काम करने वाले कथित पांच लोगों के ख़िलाफ़ 'इन एब्सेंटिया' (उनकी अनुपस्थिति में) आरोप-पत्र सार्वजनिक किए. इन पर आरोप था कि उन्होंने अमेरिका सहित दुनिया भर में हमले और हत्याएं करने की साजिश रची थी.
कैसे पता चला
FBI को एन्क्रिप्टेड मैसेज मिले थे – जो स्पैनिश भाषा में लिखे थे और जासूसी कोड में भद्दे तरीके से छिपाए गए थे – इनमें एक कथित गैंग मेंबर के शब्दों में "बेहद गंभीर काम" का ऑर्डर दिया गया था: वॉशिंगटन में एक व्यक्ति की निगरानी करने और फिर उसे मारने के लिए $40,000 (£30,000) का ऑफर, जिसे रूसी सरकार "गायब" करना चाहती थी. आरोप-पत्र के अनुसार, इस "कंस्ट्रक्शन" (एजेंटों द्वारा हत्या के लिए इस्तेमाल किया गया शब्द) को अंजाम देने के लिए मैक्सिको से हत्यारों को बुलाने की बात चल रही थी, लेकिन उनमें "देरी" हो गई और इसलिए एक स्थानीय हत्यारे की तलाश की गई. अधिकारियों ने कथित पीड़ित की पहचान का खुलासा नहीं किया, लेकिन संभावित टारगेट के तौर पर व्लादिमीर कारा-मुर्ज़ा का नाम चर्चा में था, जिन्हें साइबेरिया की जेल से रिहा किया गया था और 2024 में रूसी खुफिया एजेंटों की अदला-बदली के तहत वे अमेरिका चले गए थे. जब 'द गार्जियन' ने उनसे संपर्क किया तो उन्होंने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
अब कोई देश नहीं बचा
अमेरिकी जमीन पर रची गई इस साज़िश की असाधारण प्रकृति का ज़िक्र खुद उस आरोप-पत्र में अनजाने में ही आ गया, जिसमें रूसी इंटेलिजेंस एजेंसियों द्वारा की गई हत्याओं की एक सूची दी गई थी. इनमें 2004 में मॉस्को में मारे गए अमेरिकी पत्रकार और इतिहासकार पॉल क्लेबनिकोव शामिल थे. दो साल बाद, FSB के पूर्व अधिकारी अलेक्जेंडर लिट्विनेंको की लंदन में हत्या कर दी गई; दो रूसी एजेंटों ने उनकी चाय में रेडियोधर्मी पदार्थ मिला दिया था. 2018 में, रूस के पूर्व मिलिट्री इंटेलिजेंस अधिकारी सर्गेई स्क्रिपाल और उनकी बेटी यूके के सैलिसबरी में मिलिट्री-ग्रेड नर्व एजेंट से जहर दिए जाने के बावजूद बच गए; लेकिन संपर्क में आने के कारण डॉन स्टर्जेस नाम की एक स्थानीय महिला की मौत हो गई. 2019 में, जर्मनी की एक अदालत ने पाया कि दूसरे चेचन युद्ध के पूर्व कमांडर ज़ेलिमखान खांगोशविली की बर्लिन में रूसी सरकार के आदेश पर हत्या की गई थी. और 2024 में, रूस के विपक्षी नेता एलेक्सी नवलनी की हिरासत में मौत हो गई; इससे पहले देश से बाहर रहने के दौरान उन्हें नोविचोक नर्व एजेंट से जहर दिया गया था.

सारी सीमाएं टूट गईं
आरोप-पत्र में आगे कहा गया है, “हाल ही में, यूरोप के कई देशों ने रूस पर तोड़-फोड़ की गतिविधियों और बिना कानूनी प्रक्रिया के लोगों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है. उदाहरण के लिए, सितंबर 2026 के आसपास, जर्मनी में हुई एक जांच में कथित तौर पर GRU की मिलिट्री इंटेलिजेंस सर्विस का संबंध जर्मनी के लीपज़िग/हल्ले एयरपोर्ट पर हुए ड्रोन हमले से जोड़ा गया था." लेकिन कागजात में अमेरिकी जमीन पर ऐसी किसी गतिविधि का जिक्र नहीं था, और इसके पीछे ऐतिहासिक कारण थे.
अमेरिकी इंटेलिजेंस के पूर्व प्रमुख क्रिस कोस्टा (जो आज वॉशिंगटन डीसी में इंटरनेशनल स्पाई म्यूज़ियम के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं) ने कहा, "मैं इसे कोल्ड वॉर के दौरान बने नियमों का एक अनकहा सेट कहूंगा. अमेरिका और सोवियत संघ ने एक-दूसरे के खिलाफ आक्रामक जासूसी की, लेकिन कुछ सीमाएं तय थीं, खासकर एक-दूसरे के इंटेलिजेंस अफसरों और उनके परिवारों को शारीरिक रूप से निशाना बनाने को लेकर... अगर ये आरोप साबित हो जाते हैं, तो अमेरिकी जमीन पर निगरानी और हत्या की साजिश पारंपरिक जासूसी से बिल्कुल अलग और गंभीर मामला होगा."
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