भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि मिली है. दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु निगरानी संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के चीफ राफेल ग्रोसी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने भारत के कल्पक्कम रिएक्टर को पूरी तरह से सुरक्षित बताया है. जो भारत के परमाणु सफर को एक बड़ी और महत्वपूर्ण सराहना माना जा रहा है. राफेल एम ग्रोसी ने भारत की नई उपलब्धि कल्पक्कम में 'प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर' को चालू होने होने की स्थिति में आने के लिए पूरी तरह सुरक्षित बताया है. ग्रासी ने इसे भारत के सुनियोजित परमाणु कार्यक्रम का एक बेहद तार्किक और सही कदम कहा है. यह जानकारी राफेल ग्रोसी ने NDTV के साइंस एडिटर पल्लव बागला को दिए इंटरव्यू में बताया है. ग्रोसी ने भारत की परमाणु रणनीति का खुलकर आकलन किया है. जिसमें उन्होंने इंडिया के सुरक्षा रिकॉर्ड, तकनीकी फैसलों और दूरदर्शी सोच पर गहरा भरोसा जताया है.
भारत के लिए बड़ी उपलब्धि
IAEA चीफ राफेल ग्रोसी का बयान भारत के लिए अहम है. कल्पक्कम में बना परमाणु रिएक्टर देश के तीन चरणों वाले परमाणु कार्यक्रम में एक बहुत बड़ा बदलाव है. जिसमें करीब 20 सालों की मेहनत शामिल है. इसके बाद ही इसे शुरू किया गया है. जिसने भारत को आधिकारिक तौर पर अपने परमाणु रोडमैप के दूसरे चरण में पहुंचा दिया है. यह चरण इसलिए भी भारत के लिए अहम हो जाता है क्योंकि कल्पक्कम रिएक्टर की फास्ट ब्रीडर तकनीक अपनी खपत से ज्यादा ईंधन खुद पैदा करती है. ऐसा होने से अब आगे चलकर भारत के पास मौजूद थोरियम के विशाल भंडारों का इस्तेमाल करने का रास्ता साफ होगा.
भारत ने चुनौती को पार किया
फास्ट ब्रीडर को एक अहम तकनीक माना जाता है. जिसे दुनिया के ताकतवर देशों को भी तैयार करने में पसीने ला दिए थे. अमेरिका, फ्रांस और जापान जैसे देशों ने फास्ट ब्रीडर तकनीक पर जमकर पैसा खर्चा किया. लेकिन आर्थिक, तकनीकी और राजनीतिक परेशानियों की वजह से यह देश पीछे हट गए थे. लेकिन भारतीय वैज्ञानिक इस दिशा में लगातार डटे रहे. जहां वैज्ञानिकों ने लिक्विड सोडियम को कूलेंट के रूप में इस्तेमाल करने वाली इस बेहद जटिल रिएक्टर डिजाइन को सफलतापूर्वक तैयार किया. खास बात यह है कि इस तकनीक को बनाने में बहुत ज्यादा सावधानी और अनुशासन की जरूरत होती है. लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने यह कर दिखाया. अब पूरी दुनिया में रूस और भारत ही ऐसे देश हैं जो कमर्शियल लेवल पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर चला रहे हैं.
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राफेल ग्रोसी के इस बयान ने उन सभी आशंकाओं को खारिज कर दिया है जो इसे एक खतरनाक तकनीक बता रहे थे. ग्रोसी का कहना है कि तकनीकी नजरिए से देखें तो फास्ट ब्रीडर रिएक्टर पहले से काम कर रहे हैं. ये पूरी तरह सुरक्षित हैं और परमाणु बिजली बनाने का एक बहुत ही उपयोगी जरिया हैं. राफेल ग्रोसी ने भारत की तारीफ करते हुए कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों की सोच स्पष्ट है. जिसके चलते वह रिएक्टर के दूसरे चरण में पहुंच गया है. जहां भविष्य में इसके थोरियम चक्र को भी शामिल किया जाएगा.
सुरक्षा को लेकर चिंता नहीं: राफेल ग्रोसी
दरअसल, भारत की रणनीति दुनिया से अलग है. भारत के पास यूरेनियम कम है और थोरियम बहुत ज्यादा है. इसलिए भारत ने तीन चरणों वाला ऐसा प्रोग्राम बनाया जो पहले सामान्य रिएक्टरों से शुरू होता है फिर फास्ट ब्रीडर पर आता है और आखिरी में थोरियम से बिजली बनाने का लक्ष्य रखता है. इस रिएक्टर में करीब 1700 टन लिक्विड सोडियम का इस्तेमाल हो रहा है. बता दें कि सोडियम हवा और पानी के संपर्क में आते ही तेजी से आग पकड़ता है, इसलिए सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे थे. लेकिन ग्रोसी ने इससे इंकार करते हुए कहा कि परमाणु तकनीक की सुरक्षा पूरी तरह साबित हो चुकी है. भारत के पास रिएक्टरों का एक बड़ा और विविध बेड़ा है, जो हमेशा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के तहत काम करता रहा है. इसलिए हमें इस मामले में कोई चिंता नहीं है.
'भारत के संप्रभु फैसलों का सम्मान करते हैं'
ग्रोसी ने कहा कि वह भारत के संप्रभु फैसलों का सम्मान करते हैं. क्योंकि इंडिया का यह फास्ट ब्रीडर रिएक्टर अंतरराष्ट्रीय निगरानी के कड़े वैश्विक नियमों से बाहर है. उन्होंने कहा मैं जानता हूं कि यह सेफगार्ड्स के दायरे में नहीं है. यह इस उपमहाद्वीप के रणनीतिक समीकरण का एक हिस्सा है और यह एक हकीकत है. लेकिन भारत का परमाणु कार्यक्रम हमेशा दो मोर्चों पर काम करता है पहला आम लोगों के लिए बिजली बनाना और दूसरा देश की सुरक्षा और संप्रभुता को बनाए रखना. भारत के परमाणु दायित्व कानून पर बात करते हुए ग्रोसी ने कहा कि यह कानून दुनिया के सबसे जटिल कानूनों में से एक है. क्योंकि इसमें जिम्मेदारी तय होती है. क्योंकि परमाणु मामलों का असर सीमाओं के पार भी हो सकता है. लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि भारत के आंतरिक कानून हर पहलू को सुरक्षित रखेंगे और अंतरराष्ट्रीय नियमों के साथ तालमेल बिठाकर चलेंगे.
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