- डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा के लिए मध्य पूर्व में बड़ी सैन्य तैनाती का आदेश दिया है.
- करीब 2,500 अतिरिक्त अमेरिकी मरीन और बड़े अम्फीबियस असॉल्ट शिप्स खाड़ी क्षेत्र में भेजे जा रहे हैं.
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज विश्व की लगभग बीस प्रतिशत तेल और LNG सप्लाई के लिए एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खुलवाने के लिए मध्य पूर्व में बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती का आदेश दिया है. हजारों अमेरिकी मरीन और अम्फीबियस असॉल्ट शिप (हमलावर जहाज) खाड़ी क्षेत्र की ओर भेजे जा रहे हैं.
सैन्य तैनाती में बड़ी बढ़ोतरी
अमेरिकी नौसेना ने USS Boxer सहित बड़े अम्फीबियस असॉल्ट शिप तैनात किए हैं. करीब 2,500 अतिरिक्त मरीन मध्य पूर्व भेजे जा रहे हैं. अधिकारियों ने बताया कि ये युद्धपोत मध्य पूर्व के लिए तैनात किए गए हैं, हालांकि सटीक लोकेशन गुप्त रखी गई है. यह तैनाती ट्रंप के उस मिशन का हिस्सा है जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा सुरक्षित रूप से खोलना प्राथमिक लक्ष्य है.
बता दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की लगभग 20% तेल और LNG सप्लाई का रास्ता है, जो हालिया संघर्षों के कारण लगभग बंद हो चुका है.

यह भी पढ़ें- नेतन्याहू के बाद ट्रंप ने भी दिया बड़ा सिग्नल! ईरान युद्ध खत्म होने वाला है, कहा- 'टारगेट पूरा, अब वाइंड डाउन'
नाटो सहयोगियों पर ट्रंप का सीधा हमला: ‘कायर… डरपोक!'
ट्रंप ने सोशल मीडिया और मीडिया ब्रीफिंग में अपने नाटो सहयोगियों पर दबाव डालते हुए कहा कि वे खाड़ी क्षेत्र में मदद करने से बच रहे हैं. X पर एक पोस्ट में, ट्रंप ने नाटो को कागजी शेर और कायर भी बताया. ट्रंप ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'अमेरिका के बिना, नाटो एक कागजी शेर है. वे परमाणु शक्ति संपन्न ईरान को रोकने के लिए लड़ाई में शामिल नहीं होना चाहते थे. अब वह लड़ाई सैन्य रूप से जीत ली गई है, और उनके लिए खतरा बहुत कम है.' ट्रंप ने नाटो देशों को COWARDS कहा और कहा कि हम इसे याद रखेंगे.
नाटो देशों ने अभी तक खाड़ी में सैन्य भूमिका निभाने से परहेज किया है. कई यूरोपीय देशों ने कहा है कि वे युद्ध खत्म होने से पहले कोई सैन्य कदम नहीं उठाएंगे. कुछ दिन पहले भी डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो सहयोगियों को चेतावनी दी थी कि अगर वे इस महत्वपूर्ण जलमार्ग की सुरक्षा में मदद करने से इनकार करते हैं, तो उनका भविष्य 'बहुत बुरा' होगा.
यह भी पढ़ें- होर्मुज में 'आर-पार' की जंग! अब ब्रिटिश बेस से उड़ान भरेंगे अमेरिकी फाइटर जेट्स, बड़े एयर स्ट्राइक की तैयारी
युद्ध में अब तक 2,000 से ज्यादा मौतें
ट्रंप के सैन्य अभियान और ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच अब तक 2,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें ज्यादातर ईरान और लेबनान के नागरिक शामिल हैं. खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा ढांचों पर लगातार हमले हो रहे हैं, जिससे तेल की कीमतें लगभग 50% बढ़ चुकी हैं.
क्यों बढ़ा तनाव?
पिछले तीन हफ्तों में अमेरिका और इज़रायल ने ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया, जिसके बाद ईरान ने कई मिसाइल हमले किए. क्षेत्र में लड़ाई के कारण तेल सप्लाई बाधित हुई है. वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल देखी जा रही है और भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं