- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर कई बार अपने बयानों में विरोधाभास और उलटफेर किए हैं
- ट्रंप ने ईरान पर हमले के बाद मिसाइल पावर को खत्म करने और फिर जनता से सरकार के खिलाफ उतरने की अपील कर डाली
- ट्रंप ने अयातुल्लाह पर खुद को मारने का आरोप लगाया था और युद्ध की अवधि को लेकर विरोधाभासी बयान दिए
राजनीति में नेता अपने बयान इतनी तेजी से बदलते हैं कि सुनने वाला भी कंफ्यूज हो जाता है कि नेताजी आखिर कहना क्या चाहते हैं. पहले तो उन्होंने कुछ और कहा था और अब अचानक उनके सुर कैसे बदल गए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी उन नेताओं में शामिल हैं, जो बार-बार बयान देकर गुलाटी मार लेते हैं. कभी उनके बयान कंफ्यूजन भरे होते हैं तो कभी उलट-पुलट और विवादों से भरे. फिर बाद में वह अपने ही बयान से पलट जाते हैं. लोग यही सोचते रह जाते हैं कि 'ट्रंप साहब आखिर आप कहना क्या चाहते हैं?' ईरान जंग जब से शुरू हुई है ट्रंप इस तरह के न जाने कितने बयान दे चुके हैं और उन बयानों से कुछ ही समय में पलट भी चुके हैं.
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- बात सबसे पहले ईरान के खिलाफ चल रहे अमेरिका के ऑपरेशन फ्यूरी की कर लेते हैं. इसको लेकर ट्रंप के बयान में ही काफी विरोधाभास देखा गया. पहले तो उन्होंने इसे लोकतंत्र की जीत बताया और बाद में इसको अपनी सुरक्षा से जोड़ दिया.
- ट्रंप ने 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हमले के बाद कहा कि उनकी मिसाइल पावर को हम मिट्टी में मिला देंगे और फिर थोड़ी दी देर बाद उन्होंने ईरान की जनता से सरकार के खिलाफ उतरने की अपील कर डाली.
- ट्रंप ने 24 फरवरी 2026 को कहा था कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम अमेरिका के लिए खतरा बना हुआ था, जिसकी वजह से उनको जंग में उतरना पड़ा.
- ट्रंप ने 1 मार्च 2026 को कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई उनको मरवाना चाहते थे इसीलिए उन्होंने उनके पहले ही खत्म कर दिया. इसके लिए उन्होंने 2024 की कथित हत्या की कोशिशों का हवाला दिया था. लगता है ट्रंप खुद कंफ्यूज हैं कि बात राष्ट्रीय सुरक्षा की थी या पर्सनल.
- ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप ने 2 मार्च 2026 को कहा था कि यह चार हफ्ते या उससे कम का प्रोसेस है. वहीं दूसरी तरफ देर रात को उनका बयान आया कि अनिश्चित काल तक हम लड़ने को तैयार हैं. अमेरिका के पास हथियारों का असीमित भंडार है.
- ट्रंप ने 3 मार्च को कहा कि ईरान के खिलाफ जंग हमेशा के लिए जारी रह सकती है.
- ट्रंप ने अपने ही विदेश मंत्री मार्को रुबियो के उस बयान को गलत ठहरा दिया, जिसमें उन्होंने संकेतों में कहा था कि इजरायल की वजह से अमेरिका को ईरान युद्ध में कूदना पड़ा. ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि युद्ध में जाने का फैसला इजराइल का नहीं, उनका था क्योंकि उन्हें लगा था कि अगर हमने हमला नहीं किया तो ईरान पहले हमला कर देगा.
- अमेरिका ने 4 मार्च को ईरान के खिलाफ जंग के लिए पहले अपनी सेना की पीठ थपथपाई और बाद में वह कहने लगे कि नेतन्याहू की वजह से ईरान को तबाह किया गया.
- ट्रंप ने कहा था कि ईरान 'मिशन कंप्लीट' हो गया. लेकिन रक्षा मंत्री हेगसेथ ने पत्रकारों से कहा कि जंग अभी तेज हो रही है. आज (10 मार्च) का दिन ईरान के लिए सबसे "घातक" साबित होगा.
- युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया था. खबरें आई थीं कि उसने इस समुद्री रास्ते में बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं, ताकि कोई जहाज समुद्र पार न कर सके. हालांकि ट्रंप ने 11 मार्च 2026 को ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा कि अगर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में कोई माइंस लगाई हैं तो हमें उसकी कोई जानकारी नहीं है, लेकिन हम उन्हें हटा देंगे.
- ट्रंप ने 13 मार्च को एक इंटरव्यू में कहा था कि आने वाले दिनों में अमेरिकी सेना ईरान पर भारी हमला कर उसे पूरी तरह बर्बाद कर देगी. फिर उन्होंने ये भी स्वीकार किया कि ईरान में मौजूदा शासन को उखाड़ फेंकना इतना आसान नहीं होगा.
- 21 मार्च 2026 को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल' पर लिखा कि ईरान के 'आतंकी शासन' को लेकर अमेरिका अपने व्यापक सैन्य प्रयासों को समाप्त करने पर विचार कर रहा है और वह अपने उद्देश्यों को हासिल करने के बेहद करीब है. मतलब यह है कि ट्रंप बार-बार अपने बयान बदल रहे हैं. कभी वह युद्ध जारी रखने की बात करते हैं तो कभी इसे खत्म करने की. पूरी दुनिया कंफ्यूज है कि डोनाल्ड ट्रंप आखिर चाहते क्या हैं.
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