अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है. अमेरिकी संसद में अब तक उनकी रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा हुआ करता था, लेकिन मिडटर्म चुनावों के बाद डेमोक्रेट्स का कब्जा हो गया है. दोनों ही जगह ट्रंप ने बहुमत खो दिया है.
ट्रंप ने चुनावी हार के लिए ईरान युद्ध को जिम्मेदार माना है. उन्होंने माना कि ईरान युद्ध के कारण पेट्रोल की कीमतें बढ़ गई थीं, जिसका असर चुनाव पर पड़ा.
मिडटर्म चुनावों में हार की एक वजह भारतीय-अमेरिकियों के वोट भी रहे. कार्नेगी सर्वे के मुताबिक, 62% भारतीय-अमेरिकियों ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन किया, जबकि रिपब्लिकन उम्मीदवारों को सिर्फ 19% लोगों का ही साथ मिला.
अमेरिकी राजनीति में भारतीय-अमेरिकी
- चुनाव में भागीदारी: अमेरिकी चुनावों में भारतीय-अमेरिकियों की वोटिंग की हिस्सेदारी 70% से ज्यादा रहती है. 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में 71% तो 2024 में यह 70% थी.
- फंडिंग: किसी भी एथनिक ग्रुप की तुलना में भारतीय-अमेरिकियों की औसत घरेलू आय सबसे ज्यादा है, जो अमेरिका की राष्ट्रीय औसत आय से दोगुनी से भी ज्यादा है. चुनाव प्रचार और फंड जुटाने के लिए यह जरूरी है.
- बड़े टैक्सपेयर: कुल आबादी का सिर्फ 1.5% होने के बावजूद अनुमान है कि भारतीय-अमेरिकी अमेरिका के कुल टैक्स का लगभग 5-6% यानी 250 से 300 अरब डॉलर का भुगतान करते हैं.
- कुछ राज्यों में दबदबा: करीब आधे कैलिफोर्निया, टेक्सास, न्यू जर्सी और न्यूयॉर्क में रहते हैं, और स्विंग स्टेट्स जैसे जॉर्जिया के अटलांटा, मिशिगन, पेंसिल्वेनिया, नॉर्थ कैरोलिना में लगातार इनकी आबादी बढ़ रही है. ये कई सीटों पर निर्णायक भूमिका में रहते हैं.
- हाई एजुकेशन: 70 से 80% भारतीय-अमेरिकियों के पास ग्रैजुएशन या उससे ज्यादा की डिग्री है. टेक, मेडिकल, फाइनेंस और बिजनेस जैसे सेक्टर में इनकी मजबूत स्थिति है.
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ट्रंप के साथ कितने भारतीय-अमेरिकी?
अमेरिका की कुल आबादी में भारतीय-अमेरिकी 1.5% हैं, लेकिन इसके बावजूद वोटिंग में इनकी भागीदारी 70% से काफी ज्यादा है.
भारतीय-अमेरिकियों की फंडिंग जुटाने की क्षमता मजबूत है और चुनावी क्षेत्रों में उनका प्रभाव भी काफी ज्यादा है.
सर्वे के मुताबिक, 2024 और 2026 के चुनावों की तुलना में 40 साल से ज्यादा की उम्र के भारतीय-अमेरिकी पुरुषों और युवा पुरुषों के बीच रिपब्लिकन समर्थन में भारी गिरावट आई है.
18 से 39 साल की उम्र के 40% भारतीय-अमेरिकी 2024 में ट्रंप के साथ थे, लेकिन अब 23% ही ट्रंप के साथ दिखे. इसी तरह 40 से ज्यादा उम्र के 32% भारतीय-अमेरिकी जनवरी 2026 में रिपब्लिकन के साथ थे, जो अब घटकर 16% हो गए.

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ट्रंप से क्यों छिटके भारतीय-अमेरिकी?
- H-1B रिस्ट्रिक्शन: भारतीय-अमेरिकियों के लिए सबसे अहम मुद्दों में से एक. भारत में जन्मे लोगों का 2025 में अप्रूव्ड H-1B पिटीशन में 69.9% हिस्सा था. ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने कुछ H-1B के लिए 1 लाख डॉलर की फीस शुरू की.
- डिपोर्टेशन: स्किल्ड माइग्रेशन से आगे भी क्रैकडाउन. 104 भारतीय नागरिकों को लेकर पहली US डिपोर्टेशन फ्लाइट अमृतसर पहुंची. हथकड़ी और पैरों में बेड़ियों वाली डिपोर्टीज की तस्वीरों ने भारत में आलोचना पैदा की. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 2025 में 3,567 भारतीयों को US से डिपोर्ट किया गया और 1 जनवरी से 22 जुलाई 2026 के बीच 1,273 और.
- भारतीय IT कंपनियों की जांच: अक्टूबर 2026 में US लेबर डिपार्टमेंट ने 8 टेक्नोलॉजी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से सस्पेंड किया. ये उन विदेशी वर्कर्स को प्रभावित करता है जो एम्प्लॉयर स्पॉन्सरशिप के जरिए परमानेंट रेजिडेंसी चाहते हैं.
- US-इंडिया रिश्ते: नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच हुए कार्नेगी सर्वे में पाया गया कि 55% ने ट्रंप के द्विपक्षीय संबंधों को संभालने के तरीके को नापसंद किया, 20% ने पसंद किया और 25% की कोई राय नहीं थी.
- पाकिस्तान से संबंध: ट्रंप को भारतीय पसंद करते थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्होंने पाकिस्तान से अच्छे रिश्ते बनाए. पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असिम मुनीर से मुलाकात की. भारतीय इससे नाराज हुए.
नस्लवाद पर बढ़ती चिंता
ट्रंप ने बार-बार इमिग्रेशन को खतरे के रूप में पेश किया, अक्सर बिना डॉक्यूमेंट वाले माइग्रेंट्स और कानूनी रूप से अमेरिका में रहने वालों के बीच फर्क किए बिना.
सितंबर 2026 में डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने एक ट्रांसफॉर्मर्स कैरेक्टर का एक सिख व्यक्ति से सामना करते हुए इमेज शेयर की, कैप्शन था - 'America for Americans. Get off our roads. You don't know how to drive Mr. Singh'. इसे नस्लवादी बताकर व्यापक आलोचना हुई और बाद में हटाया गया.
अक्टूबर 2026 में हिंदू मंदिर पर हमले की कथित साजिश में 19 साल के एक युव को शिकागो के पास गिरफ्तार किया गया. उसने श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में मास शूटिंग की कथित साजिश रची थी.
इससे पहले सितंबर में एक सिख ट्रक ड्राइवर को 17 बार चाकू मारा गया. जुलाई 2026 में यूटा में एक मॉल में काम करने वाले भारतीय पर हमला हुआ.
अगस्त 2026 में जारी FBI के हेट क्राइम डेटा में सामने आया कि 2025 में सिखों के खिलाफ अपराध 24.6% और हिंदुओं के खिलाफ 12% बढ़े, जबकि मुस्लिमों के खिलाफ क्राइम में 10% की कमी आई.
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