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अमेरिका का अगला राष्ट्रपति बनने के लिए क्या ट्रंप से 'बागी' हो गए जेडी वेंस?

भी की स्थिति में ये लग रहा कि वेंस ईरान युद्ध से खुद को दूर दिखाना चाहते हैं, जिससे 2028 के चुनाव में इसका कोई असर नहीं दिखे. वहीं ट्रंप के पास ईरान युद्ध पर तुरंत यूटर्न लेना अभी मुश्किल लग रहा है.

ईरान युद्ध पर ट्रंप और वेंस के मतभेद अब खुलकर सामने आ गए हैं. (फोटो-AFP)
  • जेडी वेंस ने चुनाव हार की मुख्य वजह ईरान युद्ध को बताया और ट्रंप समर्थकों के वोट बदलने पर जोर दिया
  • वेंस ने प्रशासन को ईरान युद्ध को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने की सलाह दी और युद्ध को चुनाव हार की वजह माना
  • ट्रंप ने पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि का युद्ध से संबंध स्वीकार किया लेकिन युद्ध शुरू करने का बचाव भी किया

जेड़ी वेंस. अमेरिका के मौजूदा उपराष्ट्रपति हैं. डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन के सदस्य हैं और अब तक माना जा रहा है कि 2028 में अपनी पार्टी से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार होंगे. अमेरिका में सब कुछ जेडी वेंस के प्लान की तरह चल रहा था. विदेश मंत्री मार्को रुबियो से जरूर उनकी प्रतिद्वंद्विता चलती रहती थी, कि कहीं रुबियो प्रेसीडेंट रेस में उनसे आगे ना निकल जाएं. मगर मिडटर्म चुनावों ने उनके सब्र का बांध तोड़ दिया है. वो ट्रंप से 'बागी' हो गए हैं. 'बागी' इसलिए कि ट्रंप ईरान चुनाव को खत्म करने के लिए तैयार नहीं और वेंस ईरान युद्ध को चुनाव में हार की मुख्य वजह बता रहे हैं.   

मंगलवार को हुए अहम मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स ने हाउस और सीनेट, दोनों पर अपना नियंत्रण बना लिया. इस चुनाव परिणाम को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी नीतियों के खिलाफ एक तरह की कड़ी प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है. जाहिर है इससे अमेरिकी सरकार अब मनचाहे या मनमाने फैसले नहीं ले पाएगी. 

जेडी वेंस ने आखिर ऐसा क्या कहा

रिजल्ट के रुझान देखने के बाद जेडी वेंस ने 'X' पर एक पोस्ट में मतदाताओं के रुझानों का जिक्र करते हुए लिखा कि डेमोक्रेट्स को ऐतिहासिक जीत इसलिए मिली, क्योंकि ट्रंप के समर्थक मतदाताओं ने पाला बदलकर उन्हें वोट दिया. वेंस ने X पर लिखा, "मुख्य समस्या यह है कि जिन बहुत से लोगों ने 2024 में ट्रंप/वेंस को वोट दिया था, उन्होंने 2026 में डेमोक्रेट्स को वोट दिया." 

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Photo Credit: X

इसके बाद, उपराष्ट्रपति ने जाने-माने पोलस्टर्स (सर्वे करने वालों) का हवाला दिया, जिनमें से एक ने डेमोक्रेट्स की भारी जीत का अनुमान लगाया था. पोलस्टर ने "उन मतदाताओं से पूछा, जिन्होंने हमारा साथ छोड़ दिया था, कि वे वापस हमारी टीम में कैसे आ सकते हैं. सबसे प्रमुख चार जवाब, जिनमें लगभग सभी प्रतिक्रियाएं शामिल थीं, ये थे: 

  • [ईरान] युद्ध खत्म करें. 
  • जीवन-यापन की लागत/महंगाई पर ध्यान दें. 
  • 'अमेरिका फर्स्ट' (अमेरिका को प्राथमिकता) की नीति अपनाएं. 
  • इजरायल के साथ हमारे संबंधों में बदलाव लाएं."

वेंस ने एक रूढ़िवादी टीवी हस्ती की सलाह का भी जिक्र किया, जिसने प्रशासन से ईरान के साथ चल रहे टकराव को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने का आग्रह किया था. उन्होंने लिखा, "उनकी राजनीतिक सलाह बिल्कुल सही निकली." यह टिप्पणी उन लोगों पर एक कटाक्ष थी, जो एक और टकराव को बढ़ावा दे रहे हैं — जिनमें कथित तौर पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी शामिल हैं. वेंस ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “अगर आप यह तर्क देना चाहते हैं कि यह सब सही था, कि अगले छह सालों के लिए सीनेट खो देना एक उचित कीमत थी, तो बेशक ऐसा करें. तर्क दें कि यह चुकाने लायक कीमत थी. आप सहमत हों या असहमत, कम से कम यह एक ईमानदार बात तो है. हम इसलिए हारे क्योंकि युद्ध हुआ था. कल रात खुद राष्ट्रपति ने भी यही बात कही."

वेंस की पोस्ट को ट्रंप के बेटे डोनाल्ड जूनियर ने रीट्वीट किया और लिखा, "इसका हर एक शब्द 100% सच है."

ट्रंप अब असमंजस में फंसे

मंगलवार देर रात ट्रंप ने माना कि युद्ध की वजह से पेट्रोल की कीमतें बढ़ीं, जिससे रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा. हालांकि, उन्होंने युद्ध शुरू करने के फैसले का बचाव भी किया, जबकि वेंस ने अपनी लंबी पोस्ट में ऐसा नहीं किया था. बुधवार को जब ट्रंप से वेंस की टिप्पणी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें चुनाव के बाद किए गए वेंस के इस आकलन से कोई दिक्कत नहीं है.

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व्हाइट हाउस के बाहर एक निर्माण स्थल का दौरा करते हुए उन्होंने पत्रकारों से कहा, "मुझे लगता है कि यह काफी हद तक सच है, क्योंकि इससे थोड़े समय के लिए पेट्रोल की कीमतें बढ़ गई थीं. लेकिन साथ ही, अगर मुझे यह फिर से करना पड़े, तो मैं फिर से यही करूंगा. क्योंकि लंबे समय के हिसाब से, यही एकमात्र समाधान है. आप ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने नहीं दे सकते. मुझे पता था कि युद्ध का असर [चुनाव नतीजों] पर पड़ेगा. मैं कुछ भी अलग नहीं करता."

इजरायल की सधी नजर

इन दोनों टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए, राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने बुधवार को कहा कि इजरायल अमेरिकी राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का बहुत सम्मान करता है. हर्ज़ोग ने 'यिसराएल बेतेनु' पार्टी के प्रतिनिधियों के साथ अपनी बैठक के दौरान कहा, "मैंने अभी उपराष्ट्रपति वेंस की टिप्पणियां सुनीं. ये ऐसी भावनाएं हैं जो हमारे महान मित्र और सहयोगी देश में मौजूद हैं. मैं राष्ट्रपति ट्रंप, उपराष्ट्रपति वेंस और डेमोक्रेटिक पार्टी का सम्मान करता हूं. इजरायल ने हमेशा दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की पूरी कोशिश की है."

क्या जंग के खिलाफ थे वेंस

पक्के तौर पर तो ये नहीं कहा जा सकता पर ऐसी खबरें थीं कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा युद्ध शुरू किए जाने से पहले वेंस ने इसका विरोध किया था. अप्रैल के बाद से इजरायल ने ईरान पर किए गए हमलों में हिस्सा नहीं लिया है. जहां ट्रंप ने इजरायल और नेतन्याहू, दोनों के समर्थन में खुलकर बात की है, वहीं वेंस ने कहीं अधिक संयमित रुख अपनाया है. पिछले महीने इजरायल में हुए राष्ट्रीय चुनावों से पहले ट्रंप ने नेतन्याहू का ज़ोरदार समर्थन किया था, लेकिन वेंस ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया.

जून में, वेंस ने ईरान के साथ युद्ध को सुलझाने की ट्रंप की कोशिशों का विरोध करने के लिए इजरायल सरकार के सदस्यों की कड़ी आलोचना की और जुलाई में, उन्होंने कहा कि इजरायल सरकार के कुछ लोगों ने बातचीत को पटरी से उतारने के लिए अमेरिकी जनमत को प्रभावित करने की कोशिश की थी.

जो रोगन के पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान वेंस ने कहा, "उनके सिस्टम में कुछ ऐसे लोग हैं, जिनके बारे में हमें पक्का पता है कि वे अमेरिकी जनमत को बदलने और उसमें हेरफेर करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि युद्ध अनिश्चित काल तक चलता रहे." पिछले महीने, उपराष्ट्रपति ने कहा कि वाशिंगटन मध्य पूर्व में अपनी नीतियों को इजरायल की नीतियों के "अधीन" नहीं होने दे सकता, और उसे अपने हितों को सबसे ऊपर रखना चाहिए.

अब क्या करेंगे ट्रंप

कुल मिलाकर अभी की स्थिति में ये लग रहा कि वेंस ईरान युद्ध से खुद को दूर दिखाना चाहते हैं, जिससे 2028 के चुनाव में इसका कोई असर नहीं दिखे. वहीं ट्रंप के पास ईरान युद्ध पर तुरंत यूटर्न लेना अभी मुश्किल लग रहा है. अब स्थिति ये है कि ट्रंप को अपने ही प्रशासन में दो तरह के मतों से निपटना होगा. एक मत ईरान युद्ध को अंजाम तक पहुंचाने का है तो दूसरा मत ईरान युद्ध से किसी भी तरह पीछा छुड़ाने का. मगर, वेंस को ये नहीं भूलना होगा कि ईरान युद्ध के साथ ही टैरिफ वॉर और एच1 बी वीजा जैसे मुद्धों ने भी इस चुनाव में अहम भूमिका निभाई है. अमेरिका में रहने वाले भारतीयों-यूरोपीयों ने ट्रंप को 2024 में इसलिए वोट दिया था कि वो उनके पक्ष में काम करेंगे, मगर जीत के बाद ट्रंप प्रशासन का रुख बदल गया.

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