- अमेरिका और इजरायल ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर अब तक का सबसे बड़ा हमला करने की योजना बना रहे हैं
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नया जोरदार हमला करने के लिए सेना को निर्देश दिए हैं
- ईरान ने खाड़ी के मुस्लिम देशों को चेतावनी दी है कि अमेरिका के साथ सहयोग करने वाले युद्ध के परिणाम भुगतेंगे
Iran US War: अमेरिका और इजरायल आज या कल रात ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला कर सकते हैं. सूत्रों का कहना है कि इन दोनों देशों के टारगेट पर ईरान का एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर (ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे) है. CBS के सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार रात तक इन हमलों के लिए अंतिम मंजूरी नहीं दी थी, मगर शुक्रवार को ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर बहुत जोरदार नए हमले की चेतावनी दी.
ट्रंप ने भी दिया हिंट
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने सेना को ईरान पर नया हमला करने का निर्देश दिया है, जिसका मकसद तेहरान को घुटने टेकने पर मजबूर करना है. ट्रंप ने कहा, "हम उन पर बहुत जोरदार हमला करेंगे... और एक समय ऐसा आएगा जब वे कहेंगे कि अब वे इसे और नहीं सह सकते. मुझे लगता है कि हम बस जीतना चाहते हैं. मेरा भरोसा उन पर से उठ रहा है, क्योंकि वे झूठ बोलते हैं और बातों को गलत तरीके से पेश करते हैं."

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पेंटागन बोला-हम तैयार
CBS की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के खिलाफ अमेरिकी-इजरायली युद्ध के दौरान ईरानी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर यह अब तक का सबसे कठोर हमला हो सकता है. साथ ही, सोमवार को शेयर बाजार खुलने से पहले हमले पूरे करने पर भी चर्चा हुई. खबरों के मुताबिक, इजरायल को इसकी जानकारी दे दी गई है और वे अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. खबर है कि इस पर सहमति नेतन्याहू के अमेरिका दौरे के दौरान बनी है. ट्रंप के बयान के कुछ ही देर बाद, व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने CBS को बताया कि अमेरिका "जीतेगा, और उनके कार्यकाल में ईरान के पास कोई परमाणु हथियार नहीं होगा." वहीं पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता शॉन पारनेल ने भी कहा कि रक्षा विभाग पूरी तरह तैयार है और कार्रवाई के लिए मुस्तैद है.
अमेरिका ने जारी किया अलर्ट
इसी बीच यूएई में अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए अभी एक घंटे पहले एक अलर्ट जारी किया है. इसमें बताया गया है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण सुरक्षा हालात पेचीदा बने हुए हैं और कभी भी स्थिति अचानक बिगड़ सकती है. जो अमेरिकी अभी मिडिल ईस्ट में हैं, उन्हें सावधानी और ज्यादा सतर्कता बरतनी चाहिए. साथ ही, उन्हें फ्लाइट रद्द होने, समय-समय पर एयरस्पेस बंद होने और यात्रा में संभावित रुकावटों के लिए तैयार रहना चाहिए. इस इलाके की कुछ एयरलाइंस ने पहले के फ्लाइट शेड्यूल को फिर से शुरू करने में देरी की है; वहीं कुछ ने कुछ रूट रद्द कर दिए हैं. इलाके में मौजूद अमेरिकियों को वहां से निकलने के बारे में सोचना चाहिए या स्थिति बिगड़ने पर निकलने के लिए तैयार रहना चाहिए. ऐसी ही अलर्ट जॉर्डन सहित अन्य मध्य पूर्व देशों में भी जारी किया गया है.
ईरान ने मुस्लिम देशों को चेताया
इसका मतलब है कि अमेरिका मानकर चल रहा है कि ईरान पर हमले के बाद तेहरान पलटवार खाड़ी के देशों पर कर सकता है. इसीलिए उसने पहले से अलर्ट जारी कर दिया है.

वहीं ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के कमांडर ने चेतावनी दी कि जो भी देश अमेरिका का साथ देगा या वॉशिंगटन के लिए ढाल बनेगा, उसे युद्ध के नतीजे भुगतने होंगे. तनसीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, उन्होंने इलाके के मुस्लिम देशों से अमेरिका के साथ सहयोग पर फिर से विचार करने को कहा. इलाके में अमेरिका की हालिया गतिविधियों पर बात करते हुए मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने शनिवार को कहा कि अमेरिका "क्षेत्रीय युद्ध में बड़े पैमाने पर जंग भड़काने के रास्ते" पर तेजी से आगे बढ़ रहा है. मेजर जनरल अब्दोल्लाही ने कहा कि ईरान अपना रुख स्पष्ट कर रहा है और उसने घोषणा की है कि मुस्लिम देशों को "दूरदर्शिता से काम लेना चाहिए, अन्यथा, जो भी देश अपराधी और हमलावर अमेरिका के लिए ढाल बनेगा, वह युद्ध की आग में जल जाएगा."
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