- ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी ने एक महीने का अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य कंस्ट्रक्शन मलबा हटाना है
- शहर में 1616 जगहों की पहचान की गई है, जहां से लगभग 22,730 मीट्रिक टन कचरा हटाने का लक्ष्य रखा गया है
- खाली प्लॉट के मालिकों को 15 अगस्त तक जमीन साफ करने का निर्देश दिया गया है, अन्यथा जुर्माना वसूल किया जाएगा
बेंगलुरु में सड़कों के किनारे और खाली प्लॉट पर कंस्ट्रक्शन और दूसरी तरह का मलबा फेंकना आम बात हो गई है. इस बढ़ती समस्या से निपटने के लिए, ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी ने एक महीने का 'कूड़े से आजादी' अभियान शुरू किया है. इसका मकसद कंस्ट्रक्शन और तोड़-फोड़ से निकले कचरे को हटाना और गैर-कानूनी तरीके से कचरा फेंकने वालों के खिलाफ सख्ती बरतना है.
सरकार की है इस पर खास नजर
अगस्त तक चलने वाले इस अभियान में सार्वजनिक जगहों पर पड़े कंस्ट्रक्शन और तोड़-फोड़ के मलबे, बेकार कचरे, पेड़ों की टहनियों और दूसरे कचरे को हटाने पर ध्यान दिया जाएगा. अधिकारियों ने शहर भर में ऐसी 1,616 जगहों की पहचान की है, जहां से अनुमानित 22,730 मीट्रिक टन कचरा हटाया जाना है. NDTV से बात करते हुए बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने कहा कि यह अभियान गंदगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे, दोनों को खत्म करने पर केंद्रित है. उन्होंने कहा, "समय के साथ, मलबे पर खरपतवार उगने लगते हैं, जो सेहत के लिए खतरा बन जाते हैं क्योंकि ये मच्छर, चूहे और सांपों के पनपने की जगह बन जाते हैं. लोग मलबे पर घर का कचरा भी फेंकने लगते हैं. इससे बेंगलुरु की खूबसूरती खराब होती है. अगस्त के महीने में हम इसी समस्या को हल करने की कोशिश कर रहे हैं. इसके बाद घर के कचरे को लेकर एक अलग अभियान चलाया जाएगा."
गौड़ा ने NDTV को बताया, "हमने लोगों से अपनी खाली जमीन को साफ करने का अनुरोध किया है, क्योंकि चूहे और मच्छर आस-पड़ोस के लिए परेशानी का कारण बनते हैं. अगर 15 अगस्त तक खाली जमीन साफ नहीं की गई, तो संबंधित नगर निगम कचरा हटा देंगे और इसका खर्च प्रॉपर्टी मालिकों से वसूल करेंगे."
सीएम शिवकुमार ने चेताया
अधिकारियों ने कहा कि नियम तोड़ने वालों पर पहली बार गलती करने पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि बार-बार नियम तोड़ने पर 50,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि निजी संपत्तियों की देखभाल करना नागरिकों की उतनी ही जिम्मेदारी है, जितनी सार्वजनिक सड़कों को साफ रखना सरकार की जिम्मेदारी है. उन्होंने NDTV से कहा, "बेंगलुरु की सफाई व्यवस्था का हिस्सा है और इसमें पूरे समुदाय को मिलकर काम करने की जरूरत है. सड़कों की सफाई हमारी जिम्मेदारी है, खाली पड़ी संपत्तियों की सफाई उनकी जिम्मेदारी है. अगर उन्होंने पांच साल बाद भी अपनी जमीन पर घर नहीं बनाए हैं, तो हम उनकी संपत्ति वापस लेने के लिए नोटिस जारी करेंगे."
बीजेपी सांसद का मिला साथ
इस बीच, बेंगलुरु दक्षिण से बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी नागरिकों से इस मुहिम का समर्थन करने और शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी उठाने की अपील की. उन्होंने कहा, "बेंगलुरु, आइए इस पहल का समर्थन करें और अपने शहर को साफ करें. जब भी मैं भारत के किसी दूसरे शहर में जाता हूं, तो बेंगलुरु का मलबा, कचरा और खराब सड़कें मुझे दुख पहुंचाती हैं. आइए, एक-एक करके सड़कों की सफाई करते हुए पूरे शहर को साफ बनाएं."
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