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अमेरिका में 14 भालुओं को सजा-ए-मौत, बचाने वालों ने ही एक साथ मार डाला

अमेरिका का मोंटाना भालुओं का इलाका है. इसे बीयर कंट्री कहा जाता है. इसके बावजूद यहां वन्यजीव अधिकारियों ने ही 14 भालुओं को मौत के घाट उतारा है, उन्हें जहर वाला इंजेक्शन लगाया है. आखिर वजह क्या है?

अमेरिका में 14 भालुओं को सजा-ए-मौत, बचाने वालों ने ही एक साथ मार डाला
अमेरिका के मोंटाना में एक साथ 14 काले भालुओं को मौत के घाट उतारा गया (AI फोटो)
  • अमेरिका में 14 काले भालुओं को पकड़ा गया और उनको जहर वाला इंजेक्शन देकर मार दिया गया
  • मोंटाना के वन्यजीव अधिकारियों ने प्राकृतिक भोजन छोड़कर इंसानों पर निर्भर काले भालुओं को मौत के घाट उतारा
  • मोंटाना में भालुओं को खाना खिलाना गैरकानूनी है क्योंकि इससे वे प्राकृतिक भोजन की आदत खो देते हैं

जिन लोगों पर जानवरों को बचाने की जिम्मेदारी थी, उन्होंने ही 14 काले भालुओं को एक साथ मौत के घाट उतार दिया. यह खबर अमेरिका के मोंटाना की है. वन्यजीव अधिकारियों ने पिछले हफ्ते मोंटाना में एक प्रॉपर्टी पर 14 काले भालुओं को ढूंढकर मार डाला. इन अधिकारियों ने एक बयान में कहा कि उन्हें इन भालुओं के साथ उनका एक बच्चा भी मिला, जिसे चिड़ियाघर में रखे जाने की संभावना के चलते दूसरी जगह भेजा गया. सवाल है कि ऐसा क्यों किया गया. आखिर इन भालुओं ने ऐसा क्या गुनाह किया गया था कि उनके रक्षकों ने ही उन्हें सजा-ए-मौत दे दी.

इन भालुओं का गुनाह क्या था?

जारी बयान के अनुसार मोंटाना के गेम वार्डन कैप्टन जोश लियोनार्ड ने कहा, "ये भालू इंसानों से नहीं डरते थे और इन्होंने प्राकृतिक भोजन पर निर्भर रहना छोड़ दिया था. यह बहुत दुखद है कि उन्हें मारना पड़ा."

बयान के अनुसार 24 और 25 सितंबर को, वाइल्डलाइफ के जांचकर्ताओं को इस जगह पर ऐसे भालू मिले जो खाने के लिए इंसानों पर बहुत ज्यादा निर्भर हो चुके थे और इंसानों की मौजूदगी के आदी हो गए थे. भालुओं के व्यवहार से इंसानों की सुरक्षा को लेकर चिंता के कारण, 14 भालुओं को पकड़ा गया और मानवीय तरीके से मार दिया गया. उनके एक बच्चे (शावक) को हेलेना में FWP की मोंटाना वाइल्ड सुविधा केंद्र ले जाया गया, ताकि उसे किसी मान्यता प्राप्त चिड़ियाघर में रखा जा सके."

इस राज्य में भालुओं को खाना खिलाना है गैरकानूनी

मोंटाना में भालुओं को खाना खिलाना गैर-कानूनी है. बयान में साफ-साफ लिखा गया है- "राज्य का कानून भालू समेत जंगली जानवरों (जिन्हें 'गेम एनिमल्स' कहा जाता है) को अलग से खाना देने पर रोक लगाता है. जब भालू शहरी और रिहायशी इलाकों से खाना खोजने या पाने के आदी हो जाते हैं, तो वे प्राकृतिक और स्वस्थ तरीके से खाना खोजने की इच्छा और क्षमता खो देते हैं. इस व्यवहार को पुनर्वास या दूसरी जगह भेजकर ठीक नहीं किया जा सकता, और इससे इंसानों की सुरक्षा को खतरा पैदा होता है क्योंकि भालू घरों के पास या अंदर खाना ढूंढते रहते हैं. उन्हें चिड़ियाघर में रखना एक बहुत सीमित विकल्प है जो हमेशा मुमकिन नहीं होता."

वन्यजीव अधिकारी कह रहे हैं कि इंसानों के बीच रहने और खाने की आदत डाल चुके भालुओं को मारना एक दुर्भाग्यपूर्ण और आखिरी उपाय है. ऐसा इसलिए करना पड़ता है क्योंकि टकराव वाली जगहों और दूसरी जगहों पर इंसानों की सुरक्षा और संपत्ति को खतरा होता है. 

बता दें कि इन भालुओं को मारने के लिए जहर का इंजेक्शन दिया जाता है ताकि वे बिना किसी दर्द के मर सकें.

यहां लगाना पड़ता है एंटी-भालू डस्टबीन

मोंटाना भालुओं का इलाका है. यहां कई इलाकों में एंटी-भालू कचरा डिब्बे लगे हैं. यानी कचरे के ऐसे डिब्बे जिसमें ये भालू मुंह डालकर या गिराकर फेंका हुआ खाना न खा सकें. ये कदम भालुओं के सही व्यवहार को बढ़ावा देने और लोगों के लिए सुरक्षित माहौल बनाने में मदद करते हैं.

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