सुरंग बनाकर अमेरिका करेगा हमला...चीन के एक्सपर्ट्स की ये चेतावनी भविष्य के युद्धों की डरावनी कहानी
'चाइनीज इंस्टीट्यूट ऑफ कमांड एंड कंट्रोल' ने बताया कि जमीन के नीचे युद्ध लड़ने के लिए अमेरिकी सेना की रणनीति से पता चलता है कि उसने पहले ही जमीन के नीचे के दायरे में अपनी रणनीतिक और सामरिक पहुंच को व्यवस्थित रूप से बढ़ा लिया है.
चीनी थिंक टैंक ने चेतावनी दी है कि अमेरिका जमीन के नीचे लड़ाई लड़ने की क्षमता विकसित कर रहा हो सकता है. चीन को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इस संभावित खतरे से सावधान रहना चाहिए. जैसे-जैसे जमीनी लड़ाई में ड्रोन और सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों का इस्तेमाल बढ़ रहा है, सैन्य विशेषज्ञ भविष्य की लड़ाई के एक संभावित पहलू के तौर पर जमीन के नीचे की जगह की रणनीतिक क्षमता पर विचार कर रहे हैं.
डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनी 'एंडुरिल' के संस्थापक पामर लकी ने "सबटेरीन" के कॉन्सेप्ट को बढ़ावा दिया है. सबटेरीन एक ऐसा वाहन है जो पृथ्वी की ऊपरी परत (क्रस्ट) के भीतर उसी तरह चल सकता है जैसे पनडुब्बियां पानी के नीचे चलती हैं. ओपन-सोर्स मिलिट्री टेक्नोलॉजी एनालिसिस प्लेटफॉर्म 'गुओडोंग थिंक टैंक' ने एक रिपोर्ट में कहा है कि अगर सबटेरीन का कॉन्सेप्ट हकीकत बनता है, तो यह चीन की लंबे समय से चली आ रही रक्षा रणनीति के लिए एक "अभूतपूर्व" चुनौती पेश कर सकता है. यह रणनीति मुख्य रूप से भौगोलिक गहराई और प्राकृतिक भू-भाग पर निर्भर करती है.

ऐसी क्षमताएं दुश्मन को चीन के पहाड़ी दक्षिण-पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी सीमावर्ती इलाकों से बचकर जमीन के नीचे बनी सुरंगों के जरिए सीधे देश के भीतरी इलाकों तक पहुंचने में मदद कर सकती हैं, जिससे देश को मिलने वाले भौगोलिक लाभ बहुत कम हो सकते हैं. चीन के मौजूदा अर्ली-वॉर्निंग सिस्टम सैटेलाइट, जमीन पर लगे रडार और सिग्नल सेंसर पर निर्भर हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, ये सिस्टम जमीन के बहुत नीचे हो रही सुरंग बनाने की गतिविधियों या जमीन के नीचे चलने वाले वाहनों का ठीक से पता नहीं लगा पाएंगे. इसका मतलब है कि जमीन के नीचे से अचानक होने वाले हमले की स्थिति में बचाव की तैयारी के लिए मिलने वाला समय बहुत कम हो जाएगा.
वहीं, चीन में पहले से मौजूद बड़े पैमाने पर शहरी नागरिक सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर और जमीन के नीचे बनी सुविधाएं ऐसी तकनीकों के सामने कमजोर साबित हो सकती हैं, क्योंकि दुश्मन की जमीन के नीचे काम करने वाली सेनाएं इनमें घुसपैठ कर सकती हैं या उन पर कब्जा भी कर सकती हैं. रिपोर्ट के अनुसार, परमाणु, जैविक और रासायनिक खतरों से सुरक्षा के लिए और बेहतर मानकों की भी जरूरत होगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि परमाणु ऊर्जा से चलने वाले जमीन के नीचे चलने वाले वाहन (सबटेरेन) न केवल रेडियोलॉजिकल खतरा पैदा करेंगे, बल्कि जमीन के नीचे की जगहें रासायनिक या जैविक एजेंट फैलाने के लिए भी आदर्श माहौल होती हैं.

थिंक टैंक ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय भूमिगत सुरक्षा रणनीति बनाने की मांग की है. इसमें पूरे देश में सैन्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और जमीन के नीचे का पता लगाने वाली एडवांस्ड तकनीकों में निवेश शामिल है. इसमें कहा गया है कि इस रणनीति के लिए सिविल डिफेंस सुविधाओं को अपग्रेड करने, मिलिट्री डॉकट्रिन और ट्रेनिंग में अंडरग्राउंड वॉरफेयर (जमीन के नीचे लड़ाई) को शामिल करने, और जमीन के नीचे की जगहों के मिलिट्री इस्तेमाल से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नियमों को बढ़ावा देने के लिए ज्यादा कोशिशों की जरूरत होगी.
अमेरिकी रिसर्चर्स के एक ग्रुप ने जमीन के नीचे के हिस्से को लड़ाई के अगले क्षेत्र के तौर पर औपचारिक रूप से मान्यता देने की वकालत की है और अमेरिकी सेना ने 2019 में ही जमीन के नीचे लड़ाई के लिए एक ऑपरेशनल डॉकट्रिन जारी किया था. वेस्ट पॉइंट के मॉडर्न वॉर इंस्टीट्यूट में अर्बन वॉरफेयर स्टडीज के चेयर, जॉन स्पेंसर का तर्क है कि जमीन के नीचे के हिस्से को लड़ाई के एक स्वतंत्र क्षेत्र के तौर पर मान्यता दी जानी चाहिए क्योंकि इससे खास रणनीतिक फायदे मिलते हैं.

इनमें जमीन के नीचे की ऐसी क्षमताएं शामिल हैं, जो सेनाओं को सैटेलाइट से निगरानी, इन्फ्रारेड डिटेक्शन, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक जैमिंग और सटीक हमलों से बचाती हैं. जमीन के नीचे का इलाका बचाव करने वालों के लिए फायदेमंद होता है क्योंकि इससे लक्ष्यों का रियल-टाइम पता लगाना, उनकी लोकेशन जानना और उन्हें नष्ट करना मुश्किल हो जाता है. साथ ही, इससे सेनाएं पहाड़ों, जलडमरूमध्य और सीमा पर बनी किलेबंदी जैसी पारंपरिक भौगोलिक बाधाओं से बचकर निकल सकती हैं.
हालांकि, जमीन के नीचे के माहौल में काम करने से जुड़ी कुछ खास चुनौतियां भी सामने आती हैं.
डिफेंस कंपनी नोरिन्को के तहत आने वाले राष्ट्रीय एकेडमिक संगठन, 'चाइनीज इंस्टीट्यूट ऑफ कमांड एंड कंट्रोल' ने बताया कि जमीन के नीचे युद्ध लड़ने के लिए अमेरिकी सेना की रणनीति से पता चलता है कि उसने पहले ही जमीन के नीचे के दायरे में अपनी रणनीतिक और सामरिक पहुंच को व्यवस्थित रूप से बढ़ा लिया है. संगठन ने कहा, "अमेरिकी सेना अपने बड़े पैमाने के युद्ध अभियानों में जमीन के नीचे युद्ध लड़ने की क्षमताओं को पूरी तरह से शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध है. अलग-अलग क्षेत्रों के एकीकरण और विशेष प्रशिक्षण के जरिए, उसका लक्ष्य भविष्य के हाई-एंड संघर्षों में जमीन के नीचे के बेहद जटिल युद्ध-क्षेत्र के माहौल में काम करना है. किसी भी आधुनिक सेना के लिए, जमीन के नीचे के युद्ध-क्षेत्र के बारे में गहराई से रिसर्च करना और तैयारी करना अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि जीवित रहने और जीत हासिल करने के लिए बेहद जरूरी है."
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