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ट्रंप ने तीसरा युद्धपोत भी भेजा; क्या फिर मिडिल ईस्ट दहलाएगा अमेरिका?

USS जॉर्ज वॉशिंगटन को आम तौर पर प्रशांत महासागर में तैनात किया जाता है, लेकिन इसे मध्य पूर्व भेजा गया ताकि 'USS अब्राहम लिंकन' को राहत मिल सके. 'USS अब्राहम लिंकन' की मुश्किल तैनाती के कारण उसके क्रू को लगातार 260 दिनों से ज्यादा समय तक समुद्र में रहना पड़ा था.

ट्रंप ने तीसरा युद्धपोत भी भेजा; क्या फिर मिडिल ईस्ट दहलाएगा अमेरिका?
ये तस्वीर प्रतीकात्मक लगाई गई है.
  • अमेरिकी सेना ने मध्य पूर्व में एक तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और एम्फीबियस अटैक ग्रुप तैनात किया है
  • इस तैनाती में कुल सात हजार से अधिक नाविक और दो हजार मरीन शामिल हैं, जो नौसेना की मौजूदगी को बढ़ाएंगे
  • ईरान की सेना ने अपनी सैन्य क्षमताओं में वृद्धि की चेतावनी दी और अमेरिकी हमलों के प्रति कड़ा रुख अपनाया है

अमेरिकी सेना ने मिडिल ईस्ट में तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भेज दिया है. इस तैनाती में एक खास एम्फीबियस अटैक ग्रुप भी शामिल है. यह ईरान के खिलाफ ट्रंप की लड़ाई के तेजी से बदलते हालात को दिखाता है, खासकर तब जब अमेरिका में मध्यावधि चुनाव करीब हैं. मिडिल ईस्ट की ओर जा रहे जहाजों के इस ग्रुप में कुल मिलाकर 7,000 से ज्यादा नाविक और 2,000 मरीन शामिल हैं. इसमें USS थियोडोर रूज़वेल्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और USS मैकिन आइलैंड एम्फीबियस रेडीनेस ग्रुप (जिसमें दो एम्फीबियस लैंडिंग शिप भी हैं) शामिल हैं.

अप्रैल 2003 के बाद पहली बार ऐसा

एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, इसका मतलब यह हो सकता है कि अक्टूबर के आखिर तक इस इलाके में तीन कैरियर मौजूद हों. इस अधिकारी ने संवेदनशील मिलिट्री ऑपरेशन के बारे में बात करने के लिए अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर यह जानकारी दी. मिडिल ईस्ट में पहले से मौजूद सैनिकों को देखते हुए, इस कदम से वहां अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी बहुत बढ़ जाएगी. वहां 20,000 से ज्यादा नाविक और मरीन के साथ-साथ सैकड़ों एयरक्राफ्ट भी होंगे. इससे पहले, अप्रैल में 2003 के बाद पहली बार नौसेना के तीन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप मिडिल ईस्ट में मौजूद थे. अभी इस इलाके में USS जॉर्ज HW बुश और USS जॉर्ज वॉशिंगटन कैरियर मौजूद हैं, साथ ही USS बॉक्सर एम्फीबियस रेडीनेस ग्रुप भी वहां है.

ट्रंप हमले के मूड में

USS जॉर्ज वॉशिंगटन को आम तौर पर प्रशांत महासागर में तैनात किया जाता है, लेकिन इसे मध्य पूर्व भेजा गया ताकि 'USS अब्राहम लिंकन' को राहत मिल सके. 'USS अब्राहम लिंकन' की मुश्किल तैनाती के कारण उसके क्रू को लगातार 260 दिनों से ज्यादा समय तक समुद्र में रहना पड़ा था. हो सकता है कि 'थियोडोर रूजवेल्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप' के आने के बाद 'वॉशिंगटन' को जापान के पास के समुद्र में भेज दिया जाए. गुरुवार को छपे 'टाइम' मैगजीन के एक इंटरव्यू में, ट्रंप ने नए हमलों की संभावना जताई. उन्होंने कहा कि यह "संभव" है कि 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद वे ईरान में बमबारी बढ़ा दें. जब उनसे इस बारे में और पूछा गया, तो ट्रंप ने कहा कि वे अपनी रणनीति के बारे में और जानकारी नहीं दे सकते. ट्रंप ने कहा, "मैं आपको यह नहीं बता सकता क्योंकि देखिए, आप पूछ रहे हैं कि बमबारी कहां की जाएगी?"

ईरानी सेना ने चेताया

IRGC के डिप्टी कमांडर-इन-चीफ मेजर जनरल मुस्तफा इजादी ने शुक्रवार को छपे अपने बयानों में कहा कि, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सेनाओं, खासकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जमीन, हवा, एयर डिफेंस और नौसेना के क्षेत्रों में बड़ी तरक्की की है. सेनाएं कई तरह की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करती हैं; कुछ का इस्तेमाल पहले ही युद्ध के मैदान में किया जा चुका है, जबकि कुछ का इस्तेमाल भविष्य में किया जाएगा."

वहीं ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी, मेजर जनरल मोहसेन रेज़ाई ने शुक्रवार को X पर एक पोस्ट में कहा, "एक के बाद एक नाकामी के बावजूद, अमेरिकी इतिहास के सबसे खराब राष्ट्रपति बस बातें ही करते जा रहे हैं—और अब उनकी बातें उनकी अपनी कल्पनाओं से भी आगे निकल गई हैं. आप अपनी कल्पना में हर दिन जीत सकते हैं. लेकिन असलियत ईरान बनाता है—वहां के लोग, वहां के सैनिक और वहाँंकी मिसाइलें."

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