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कारगिल युद्ध में कितने पाकिस्तानी सैनिक मारे गए बताओ... असीम मुनीर को फजलुर रहमान ने बताई हैसियत

मौलाना फजलुर रहमान पाकिस्तान के कद्दावर देवबंदी मौलवी और राजनेता मुफ्ती महमूद के बेटे हैं. उनके पिता मुफ्ती महमूद 1970 के दशक में खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री रह चुके हैं.

कारगिल युद्ध में कितने पाकिस्तानी सैनिक मारे गए बताओ... असीम मुनीर को फजलुर रहमान ने बताई हैसियत
फजलुर रहमान लगातार असीम मुनीर को निशाने पर ले रहे हैं.
  • हर साल 26 जुलाई को कारगिल युद्ध की याद में कारगिल दिवस मनाया जाता है, जिसमें भारत ने पाकिस्तान को हराया था
  • फजलुर रहमान ने अपने देश के फील्ड मार्शल पर शहीदों की तौहीन का आरोप लगाते हुए उनकी हिम्मत पर सवाल उठाए
  • फजलुर रहमान ने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने कारगिल में मारे गए सैनिकों के जनाजे हिंदुओं को सौंप दिए

हर साल 26 जुलाई को कारगिल दिवस मनाया जाता है. पाकिस्तान ने 1999 में भारत के कारगिल पर कब्जा करने की कोशिश की थी और उस समय भारतीय सेना ने उन्हें मार-मारकर भगाया. अब इस महत्वपूर्व दिन से ठीक पहले पाकिस्तान के वरिष्ठ नेता और सांसद फजलुर रहमान ने बड़ा दिया है. उन्होंने बगैर नाम लिए अपने देश के फील्ड मार्शल को कहा कि आप शहीदों के ओट में छिपने की कोशिश मत कीजिए. आपकी तो इतनी भी हिम्मत नहीं कि कारगिल में कितने पाकिस्तानी जवान मारे गए उनकी संख्या बता पाएं.

फजलुर रहमान के भाषण पर बजीं तालियां 

फजलुर रहमान ने कहा, 'मैं तुम्हे जानता हूं कि तुम्हारे नजर में अपने शहीद की क्या कद्र और कीमत है? क्या बता सकते हो, क्या आज तक कौम को तुमने बताया कि करगिल में आपके कितने जवान शहीद हुए और आपने वहां से कितने जनाजे वसूल किए? जरा बताओ तो सही. तुमने अपने जवानों के शवों को हिंदुओं के सुपुर्द किया और वहां से एक बयान आया कि हमने उन्हें इस्लामी तरीके से दफन कर दिया. उनकी तादाद अलग-अलग बताई जा रही है, लेकिन है सैंकड़ों में. हम अपने सैनिकों के जनाजे लाने के लिए भी तैयार नहीं थे. तुमने अपने लोगों के जनाजे हिंदुओं के हवाले किए. कर्नल शेरखान अगर हमें मिला तो वो भी हिंदुस्तान की जिद के बाद हमने उनका जनाजा वसूल किया. शहीदों के जनाजों की तौहीन तुम लोगों ने की है, आप अपने अपराध को छुपाने के लिए शहीदों की ओट में छिपने की कोशिश करते हो. हमने कोई गलत बात नहीं की.' इस बात पर सभा स्थल पर खूब तालियां बजीं.

लगातार घेरे रहे हैं असीम मुनीर को

अभी हाल ही में एक कार्यक्रम में जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने कहा, 'तुम मुझ पर अपने खून का अहसान क्यों जताते हो? तुम हमारे खून-पसीने की कमाई और टैक्स के पैसों से अपनी तनख्वाहें लेते हो और फिर हमसे कहते हो कि हम लश्कर बनाएं और उग्रवादियों से लड़ें? मैंने सरकार से कोई तनख्वाह नहीं ली है. मैं कोई लश्कर नहीं बनाऊंगा. तुम तो चले जाओगे, लेकिन मेरे देश को पीढ़ियों के लिए जाती दुश्मनी, खून-खराबे और लूटपाट के दलदल में धकेल रहे हो. अगर तुम्हें राजनीति ही करनी है, तो अपनी वर्दी उतारो और चुनाव में आओ. फिर समझ आ जाएगा कि जनता वर्दी वालों को कितने वोट देती है.'

दरअसल, असीम मुनीर अब पूरी तरह पाकिस्तान को अपनी तरह चला रहे हैं. शाहबाज शरीफ सिर्फ नाम के प्रधानमंत्री रह गए हैं. असीम मुनीर के इशारे पर ही अफगानिस्तान की सीमा से लेकर पीओके, बलूचिस्तान और गिलगिट बाल्टिस्तान में सेना आतंक मचा रही है. मुनीर जनता से अपील कर रहे हैं कि वो पाकिस्तानी सेना का आतंकवाद की लड़ाई में साथ दें. मगर अब पाकिस्तान के नेता भी उनके खिलाफ होते जा रहे हैं और उनकी सियासी महत्वकांक्षा को जनता के सामने ला रहे हैं.

मौलाना फजलुर रहमान की क्या है ताकत

मौलाना फजलुर रहमान पाकिस्तान के कद्दावर देवबंदी मौलवी और राजनेता मुफ्ती महमूद के बेटे हैं. उनके पिता मुफ्ती महमूद 1970 के दशक में खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. पिता की मौत के बाद 1980 के दशक में फजलुर रहमान ने जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI) की कमान संभाली. बाद में यह पार्टी दो धड़ों में बंट गई और मौलाना के नेतृत्व वाले धड़े को JUI-F के नाम से जाना गया. मौलाना फजलुर रहमान अब तक सात बार पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य चुने जा चुके हैं. खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के पश्तून इलाकों में उनकी पार्टी का जबरदस्त जमीनी आधार और मदरसों का एक बड़ा नेटवर्क है. मौलाना फजलुर रहमान को हमेशा से कट्टरपंथी और अफगान तालिबान का करीबी माना जाता रहा है. 

इमरान खान की सरकार गिराने में था हाथ

90 के दशक से ही उनकी पार्टी तालिबान को वैचारिक समर्थन देती आई है. तालिबान के कई शीर्ष नेताओं ने पाकिस्तान में मौलाना की पार्टी से जुड़े मदरसों से ही मजहबी तालीम हासिल की है. साल 2021 में जब अफगानिस्तान में दोबारा तालिबान की सत्ता आई, तो मौलाना ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तालिबान सरकार को मान्यता देने की खुलकर मांग की थी. साल 2022 में इमरान खान की सरकार गिराने के लिए जो 'पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट' (PDM) नाम का विपक्षी गठबंधन बना था, मौलाना फजलुर रहमान उसके सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुने गए थे. मौलाना की अगुवाई में ही इमरान खान को प्रधानमंत्री पद से हटाया गया था. इमरान खान के हटने के बाद जब शहबाज शरीफ की सरकार बनी, तो उन्होंने आसिम मुनीर को सेना प्रमुख नियुक्त किया. बाद में शहबाज सरकार से मतभेदों के चलते मौलाना ने खुद को गठबंधन से अलग कर लिया और स्वतंत्र विपक्ष की भूमिका में आ गए. 

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