- आवारा कुत्ते ने बच्चे का सिर नोचा
- डेढ़ साल की बच्ची की मौत के बाद फिर हुआ हमला, 4 साल का बच्चा गंभीर
- रायचूर में बढ़ा स्ट्रे डॉग का खतरा, ग्रामीणों में आक्रोश
Stray Dog Attack: कर्नाटक के रायचूर जिले में आवारा कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है. डेढ़ साल की बच्ची की दर्दनाक मौत के कुछ ही दिनों बाद अब एक चार वर्षीय बच्चे पर जानलेवा हमला हुआ है. मलियाबाद इलाके में आवारा कुत्ते के हमले में गंभीर रूप से घायल मासूम अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है. हमले में बच्चे के सिर की खाल तक उधड़ गई. लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने स्थानीय लोगों और अभिभावकों में भय का माहौल पैदा कर दिया है. ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन आवारा कुत्तों की समस्या पर प्रभावी कार्रवाई करने में असफल रहा है.
घर के पास खेल रहे बच्चे पर टूट पड़ा कुत्ता
रायचूर शहर के बाहरी इलाके मलियाबाद में चार वर्षीय गोपाल अपने घर के पास खेल रहा था. इसी दौरान एक आवारा कुत्ते ने अचानक उस पर हमला कर दिया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुत्ता बच्चे को घसीटते हुए ले गया और उसके सिर पर लगातार काटता रहा. हमले में बच्चे के सिर की खाल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई.

गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती
भीषण हमले के बावजूद गोपाल किसी तरह कुत्ते के चंगुल से निकलने में सफल रहा और सुरक्षित स्थान तक पहुंच गया. परिजन उसे तत्काल रायचूर के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसका इलाज जारी है. चिकित्सकों के अनुसार बच्चे की स्थिति गंभीर बनी हुई है और उसकी लगातार निगरानी की जा रही है.

Stray Dog Attack: हॉस्पिटल में गंभीर हालत में एडमिट गोपाल
कुछ दिन पहले डेढ़ साल की बच्ची की हुई थी मौत
रायचूर जिले में यह दूसरी बड़ी घटना है जिसने लोगों को झकझोर कर रख दिया है. हाल ही में सिंधनूर तालुक के के. हंचिनाला कैंप में डेढ़ साल की अनम नामक बच्ची की आवारा कुत्तों के हमले में मौत हो गई थी. बताया गया कि बच्ची सुबह घर से बाहर निकली थी, तभी छह से सात कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया. परिजनों के अनुसार कुत्तों ने बच्ची को घसीटते हुए उसके चेहरे, हाथ, पैर और पेट पर गंभीर चोटें पहुंचाईं. आसपास के लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई.
ग्रामीणों में बढ़ा आक्रोश
लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में आवारा कुत्तों के हमले पहले भी हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन ने कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कुत्तों को पकड़ने या उनकी संख्या नियंत्रित करने के लिए प्रभावी अभियान नहीं चलाया गया.
बच्चों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
घटनाओं के बाद अभिभावकों में डर का माहौल है. कई परिवार अब अपने बच्चों को अकेले घर से बाहर भेजने से बच रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान नहीं होगा, तब तक बच्चों की सुरक्षा को लेकर खतरा बना रहेगा.
तत्काल कार्रवाई की मांग
रायचूर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों ने जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों से तत्काल इस मामले में एक्शन लेने की मांग की है. ग्रामीण चाहते हैं कि आक्रामक और खतरनाक आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके. लगातार हो रहे हमलों ने आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और सार्वजनिक सुरक्षा के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है.
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