- कमजोर मानसून का खेती पर असर, 20 जुलाई तक देश में 23% कम बारिश
- खरीफ बुआई क्षेत्र में 42 लाख हेक्टेयर की गिरावट, कृषि मंत्रालय के आंकड़े चिंताजनक
- पूर्वोत्तर से दक्षिण भारत तक बारिश की कमी, खेती पर मंडराया खतरा, दलहन की बुआई में सबसे बड़ी गिरावट
Monsoon Rainfall Deficit 2026: देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार इस साल अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही है, जिसका सीधा असर कृषि क्षेत्र पर दिखाई देने लगा है. 1 जून से 20 जुलाई 2026 के बीच देशभर में सामान्य से 23 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. सबसे अधिक कमी पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में देखने को मिली, जहां वर्षा का स्तर औसत से 33 प्रतिशत नीचे रहा. मानसून की कमजोर स्थिति के कारण खरीफ फसलों की बुआई भी प्रभावित हुई है. कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 17 जुलाई तक देश में खरीफ फसलों का बुआई क्षेत्र पिछले वर्ष की तुलना में 42.28 लाख हेक्टेयर कम दर्ज किया गया है. इससे आने वाले महीनों में कृषि उत्पादन को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.
देशभर में 23 फीसदी कम हुई बारिश
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 1 जून से 20 जुलाई 2026 के बीच पूरे देश में सामान्य से 23 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है. बारिश की सबसे ज्यादा कमी पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 33 प्रतिशत दर्ज की गई. इसके अलावा दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में 26 प्रतिशत, उत्तर-पश्चिम भारत में 21 प्रतिशत और मध्य भारत में 14 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है. मानसून की यह कमी कृषि क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बन सकती है क्योंकि यह अवधि खरीफ फसलों की बुआई के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है.
खरीफ फसलों की बुआई पर पड़ा असर
कम वर्षा का असर खरीफ फसलों की बुआई पर साफ दिखाई दे रहा है. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 17 जुलाई 2026 तक देशभर में 658.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई हुई है. पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 700.47 लाख हेक्टेयर था. इस प्रकार कुल बुआई क्षेत्र में 42.28 लाख हेक्टेयर यानी लगभग 6.04 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.
दलहन और तिलहन फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित
बारिश की कमी का सबसे अधिक असर दलहन फसलों पर पड़ा है. आंकड़ों के मुताबिक दलहन फसलों की बुआई में 12.29 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15.08 प्रतिशत कम है. वहीं तिलहन फसलों का रकबा भी 8.63 लाख हेक्टेयर घटा है, जो करीब 5.54 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है.
धान की बुआई में मामूली गिरावट
राहत की बात यह है कि देश की प्रमुख खाद्यान्न फसल धान की बुआई में अपेक्षाकृत कम गिरावट दर्ज हुई है. धान का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में 1.41 लाख हेक्टेयर कम रहा है, जो मात्र 0.84 प्रतिशत की कमी है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो धान की बुआई का आंकड़ा सुधर सकता है.
अगले कुछ दिनों में उत्तर भारत को राहत के आसार
मौसम विभाग ने अपने ताजा पूर्वानुमान में कहा है कि अगले तीन से चार दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत में मानसून सक्रिय रहने की संभावना है. मंगलवार को जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है. कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा भी हो सकती है.
मध्य और दक्षिण भारत में चिंता बरकरार
हालांकि मौसम विभाग का अनुमान है कि पश्चिम-मध्य भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में अगले सात दिनों तक वर्षा गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रह सकती हैं. यही वे क्षेत्र हैं जहां पहले से ही वर्षा की कमी दर्ज की गई है. यदि आने वाले सप्ताह में बारिश की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो खरीफ फसलों की बुआई और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं.
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