- अमेरिका ने जॉर्डन में दो सैनिकों की मौत के बदले ईरान पर लगातार आठवीं रात हमले किए
- CENTCOM के अनुसार इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की सैन्य क्षमताओं को कम करना था
- कुवैत और बहरीन की सेनाओं ने ईरान के हवाई हमलों का जवाब देते हुए अपने एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय किए
जॉर्डन में हुए हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत का बदला लेने के लिए अमेरिका ने रविवार को ईरान पर नये हमले किए. अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि लगातार आठवीं रात किए गए ये हमले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की उन ताकतों को तुरंत सजा देने के लिए थे, जिन्होंने पिछली रात जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हमले किए थे."
ईरान में कहां हुए हमले
CENTCOM ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर किए गए इन हमलों का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल शिपिंग के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को और कम करना था. CENTCOM ने X पर कहा, "अमेरिकी हमलों की लगातार आठवीं रात के दौरान, CENTCOM की सेनाओं ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को और कम करने के लिए ईरानी सेना की तटीय निगरानी और हवाई सुरक्षा सुविधाओं, समुद्री क्षमताओं और मिसाइल व ड्रोन स्टोरेज साइटों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया."
कुवैत एयर डिफेंस सिस्टम ने दिया जवाब
इसके बाद कुवैत और बहरीन की सेनाओं ने बताया कि वे ईरान के हवाई हमलों का जवाब दे रहे हैं. जब तेहरान ने पूरे इलाके में जवाबी हमले तेज किए, तो इन दोनों खाड़ी देशों में हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजने लगे. सेना ने एक बयान में कहा, "ईरान की इस गलत आक्रामकता के बाद, कुवैत का एयर डिफेंस सिस्टम दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रहा है." वहीं, AFP के एक पत्रकार ने बताया कि कुवैत सिटी में चेतावनी वाले सायरन बज रहे थे.
ईरान की सेना का दावा
रविवार तड़के, ईरान की सेना ने कहा कि उसने ईरानी इलाके पर अमेरिकी हमलों के जवाब में कुवैत में मौजूद दो अमेरिकी ठिकानों को ड्रोन से निशाना बनाया है. सरकारी मीडिया पर जारी एक बयान के अनुसार, ईरान ने पहले कहा था कि उसने कुवैत में कैंप उदैरी पर अमेरिकी सेना के गोला-बारूद डिपो और अली अल सलेम एयर बेस पर पैट्रियट रडार सिस्टम और एयर सर्विलांस रडार के खिलाफ कामिकेज़ ड्रोन से बड़े पैमाने पर हमले किए. कुवैत और बहरीन, दोनों ही देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं. इस महीने फिर से शुरू हुई दुश्मनी के बाद से ईरान ने अपने खाड़ी पड़ोसी देशों पर कई हमले किए हैं, जिनका खामियाजा इन दोनों देशों को भुगतना पड़ा है. यह सब तब हुआ जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच युद्धविराम और समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ था.
यह भी पढ़ें-
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं