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रूस, सऊदी अरब वाला ओपेक प्लस तेल प्रोडक्शन बढ़ाएगा, इससे कितना घटेगा संकट

होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी से इराक, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात प्रभावित हो रहे हैं. संयुक्त अरब अमीरात का उत्पादन अब ओपेक कोटा में शामिल नहीं होगा.

रूस, सऊदी अरब वाला ओपेक प्लस तेल प्रोडक्शन बढ़ाएगा, इससे कितना घटेगा संकट
दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल-गैस का संकट देखा जा रहा है.
  • सऊदी अरब, रूस और पांच अन्य ओपेक+ देशों ने जून के लिए तेल उत्पादन प्रतिदिन 188,000 बैरल बढ़ाने का निर्णय लिया
  • होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी के कारण खाड़ी क्षेत्र के अप्रयुक्त तेल भंडार निर्यात के लिए बाधित हो रहे हैं
  • रूस इस स्थिति से सबसे अधिक लाभान्वित हुआ है, लेकिन यूक्रेन युद्ध के कारण उत्पादन कोटा बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है
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सऊदी अरब, रूस और पांच अन्य ओपेक+ देशों ने रविवार को अपने तेल उत्पादन कोटा में वृद्धि की है. यह अपेक्षित कदम संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अचानक ओपेक से अलग होने के बाद ओपेक+ कार्टेल में निरंतरता प्रदर्शित करने के उद्देश्य से उठाया गया है. ओपेक+ की तरफ से जारी एक बयान के अनुसार, मध्य पूर्व युद्ध के कारण उत्पन्न मूल्य दबाव के बीच, सात प्रमुख उत्पादक देश जून माह के लिए अपने कुल उत्पादन कोटा में प्रतिदिन 188,000 बैरल की वृद्धि करेंगे. यह वृद्धि "तेल बाजार स्थिरता का समर्थन करने की उनकी सामूहिक प्रतिबद्धता" का हिस्सा है.

दुनिया को कितना फायदा?

अल्जीरिया, इराक, कजाकिस्तान, कुवैत, ओमान, रूस और सऊदी अरब की ऑनलाइन बैठक के बाद जारी इस बयान में संयुक्त अरब अमीरात का कोई उल्लेख नहीं किया गया, जिसने शुक्रवार को ओपेक+ छोड़ दिया. रायस्टैड एनर्जी के विश्लेषक जॉर्ज लियोन ने एएफपी को बताया कि यूएई के ओपेक+ छोड़ने पर चुप्पी तनावपूर्ण संबंधों का संकेत है. तेल बाजार के विश्लेषकों ने व्यापक रूप से 188,000 बैरल की वृद्धि की उम्मीद की थी, जो मार्च और अप्रैल दोनों में ओपेक+ द्वारा घोषित 206,000 बैरल की दैनिक वृद्धि के समान है, जब यूएई को आवंटित हिस्सा घटा दिया गया था. लियोन ने कहा, “यूएई को छोड़कर, उत्पादन के उसी पुराने रास्ते पर चलते हुए, यह समूह ऐसा दिखावा कर रहा है जैसे कुछ हुआ ही नहीं है, जानबूझकर आंतरिक दरारों को कम करके दिखा रहा है और स्थिरता का प्रदर्शन कर रहा है.” 

तो फिर क्यों की घोषणा

एक्सपर्ट्स का कहना है कि कागजी तौर पर कोटा बढ़ाने से वास्तविक उत्पादन पर शायद ही कोई खास असर पड़ेगा, जो पहले से ही निर्धारित सीमा से कम है. ओपेक+ के अप्रयुक्त भंडार मुख्य रूप से खाड़ी क्षेत्र में स्थित हैं, और वहां निर्यात होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी के कारण रुका हुआ है, जिसे ईरान ने 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों के जवाब में लगाया था. रिस्टैड एनर्जी के विश्लेषक लियोन ने रविवार को एएफपी को बताया कि यह समूह “दोहरा संदेश” देना चाहता है कि यूएई के बाहर निकलने से ओपेक+ के कामकाज में कोई बाधा नहीं आएगी और युद्ध के कारण तेल व्यापार में भारी व्यवधान के बावजूद यह समूह अभी भी वैश्विक तेल बाजारों पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है.

रूस को फायदा पर...

होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी से इराक, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात प्रभावित हो रहे हैं. संयुक्त अरब अमीरात का उत्पादन अब ओपेक कोटा में शामिल नहीं होगा. ईरान भी ओपेक+ का सदस्य है, लेकिन कोटा के अधीन नहीं है. समूह का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक रूस इस स्थिति से सबसे अधिक लाभान्वित हुआ है. लेकिन ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के बावजूद, यूक्रेन में चल रहे युद्ध और यूक्रेनी ड्रोन द्वारा तेल उद्योग सुविधाओं पर हमले के कारण, रूस अपने मौजूदा कोटा स्तर पर उत्पादन करने के लिए संघर्ष करता दिख रहा है. ओपेक+ के लिए यह जोखिम भी है कि इराक और कजाकिस्तान जैसे अन्य देश भी समूह छोड़ सकते हैं, जिन पर बार-बार अपने कोटे से अधिक उत्पादन करने के आरोप लगे हैं.

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