- ईरान में महंगाई के विरोध में शुरू हुआ प्रदर्शन इस्लामिक सरकार को हटाने की मांग में बदल चुका है
- रज़ा पहलवी, अंतिम शाह के बेटे, अमेरिका में निर्वासित हैं और ईरान में तख्तापलट के लिए बाहरी मदद मांग रहे हैं
- रज़ा पहलवी का जन्म ईरान के शाह मोहम्मद रज़ा शाह पहलवी के घर अक्टूबर 1960 में हुआ था
ईरान में जनता का विरोध प्रदर्शन दूसरे सप्ताह भी जारी है. एक तरफ अली खामेनेई की सरकार की कार्रवाई में सैकड़ों लोगों की मौत हो रही है तो दूसरी तरफ लोगों ने झुकने से इनकार कर दिया है. महंगाई के मुद्दे पर शुरू यह विद्रोह अब इस्लामिक सरकार को हटाने की जिद्द में बदल चुका है. ऐसे में अमेरिका में निर्वासित जीवन जी रहे ईरान के क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी प्रदर्शनकारियों के एक मुखर समर्थक के रूप में उभरे हैं. पहलवी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से ईरान में तख्तापलट के लिए मदद मांग रहे हैं और उन्होंने कहा है कि पहला मौका मिलते ही वह 'ईरान लौटने के लिए तैयार' हैं.
चलिए आपको ईरान के अंतिम शाह (राजा) के निर्वासित बेटे रज़ा पहलवी की कहानी बताते हैं. साथ ही समझने की कोशिश करेंगे कि क्या ईरान के लोग उनके समर्थन के लिए तैयार हैं.
मयूर तख्त था तैयार लेकिन फिर हुई इस्लामी क्रांति
रज़ा पहलवी का जन्म ईरान के शाह मोहम्मद रज़ा शाह पहलवी के घर अक्टूबर 1960 में हुआ था. जन्म से ही वो ईरान के मयूर सिंहासन को प्राप्त करने के लिए तैयार थे. 17 साल के रज़ा पहलवी अमेरिका में फाइटर पायलट की ट्रेनिंग ले ले रहे थे, जब 1979 में ईरान के अंदर हुई इस्लामी क्रांति ने उनके पिता की राजशाही को नष्ट कर दिया. उन्होंने दूर से ही देखा कि उनके पिता, जिन्हें कभी पश्चिमी देशों का समर्थन प्राप्त था, वो दूसरे देश में शरण पाने के लिए संघर्ष करते रहे और अंततः मिस्र में कैंसर से उनकी मृत्यु हो गई.

ईरान के शाह मोहम्मद रज़ा शाह पहलवी और उनका परिवार (1964)
शाह परिवार के हाथों से सत्ता जा चुकी थी. युवा क्राउन प्रिंस और उनके परिवार के हाथ में कोई शक्ति नहीं बची थी, वे अमेरिका के अंदर निर्वासन में जीने को मजबूर थे. इसके बाद के दशकों में, परिवार पर एक से अधिक बार त्रासदी आई. उनकी छोटी बहन और भाई, दोनों ने अपनी जान ले ली. रज़ा पहलवी ऐसे राजवंश के प्रतीकात्मक मुखिया बन गए, जिसके बारे में कई लोगों का मानना था कि यह इतिहास में सिमट कर रह गया है. लेकिन आज 65 साल की उम्र में, रज़ा पहलवी एक बार फिर अपने देश के भविष्य को आकार देने में भूमिका की तलाश कर रहे हैं.
क्या ईरान में रज़ा पहलवी को लोगों का समर्थन प्राप्त है?
आज भी पहलवी ईरान में राजशाही को सपोर्ट करने वाले लोगों के लिए एक शक्तिशाली प्रतीक बने हुए हैं. कई लोग राजशाही युग को तेजी से आधुनिकीकरण और पश्चिम देशों के साथ घनिष्ठ संबंधों के युग के रूप में याद करते हैं. लेकिन ऐसे भी लोग हैं जो उस वक्त को सेंसरशिप और भयानक गुप्त पुलिस की कार्रवाईयों के रूप में याद करते हैं, जिसका उपयोग असहमति को दबाने के लिए किया जाता था और मानवाधिकारों के हनन के लिए जाना जाता था.
पिछले कुछ वर्षों में ईरान के अंदर रज़ा पहलवी की लोकप्रियता में उतार-चढ़ाव आया है. 1980 में, उन्होंने खुद को शाह घोषित करते हुए काहिरा में एक प्रतीकात्मक राज्याभिषेक समारोह आयोजित किया था. हालांकि इसका व्यावहारिक प्रभाव बहुत कम था, कुछ विरोधियों का कहना है कि यह लोकतांत्रिक सुधार के उनके वर्तमान संदेश को कमजोर करता है. उन्होंने ईरान के अंदर विपक्षी गठबंधन बनाने के लिए कई प्रयास किए हैं, जिसमें 2013 में शुरू की गई नेशनल काउंसिल ऑफ ईरान फॉर फ्री इलेक्शन भी शामिल है. अधिकांश ने ईरान के अंदर आंतरिक असहमति और सीमित पहुंच से संघर्ष किया है.
ईरान के कुछ निर्वासित विपक्षी समूहों के विपरीत, पहलवी ने ईरान में लगातार हिंसा को खारिज कर दिया है. उन्होंने मोजाहिदीन-ए खालिक (एमईके) जैसे सशस्त्र गुटों से खुद को दूर कर लिया है. उन्होंने बार-बार ईरान की भविष्य की राजनीतिक व्यवस्था तय करने के लिए शांतिपूर्ण परिवर्तन और राष्ट्रीय स्तर पर जनमत संग्रह का आह्वान किया है. आज, पहलवी खुद को कुर्सी के लिए इंतजार करता राजा के रूप में नहीं, बल्कि देश को एकजुट करने के एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करते हैं. उनका कहना है कि वह ईरान को स्वतंत्र चुनाव, कानून का शासन और महिलाओं के लिए समान अधिकारों की दिशा में आगे ले जाने में मदद करना चाहते हैं- राजशाही को बहाल करने या गणतंत्र की स्थापना के बारे में अंतिम निर्णय देश (जनमत के जरिए) पर छोड़ना चाहते हैं.
रज़ा पहलवी के विरोध में जाती हैं ये 4 बातें
- आलोचकों का कहना है कि वह विदेशी समर्थन पर बहुत अधिक निर्भर हैं और सवाल करते हैं कि क्या देश के अंदर के ईरानी, दशकों की राजनीतिक उथल-पुथल के बाद थके हुए, किसी भी निर्वासित नेता पर भरोसा करने के लिए तैयार हैं.
- उनके विरोधियों का तर्क है कि विदेश में चार दशक बिताने के बाद भी उन्होंने अभी तक कोई टिकाऊ संगठन या स्वतंत्र मीडिया आउटलेट नहीं बनाया है, ताकि ईरान के लोगों की बातों को उठाया जा सके.
- 2023 में उन्होंने इजराइल की विवादास्पद यात्रा की थी, जिसके दौरान उन्होंने एक होलोकॉस्ट स्मारक कार्यक्रम में भाग लिया और प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की. इस यात्रा ने ईरान के लोगों को बांटकर रख दिया था. कुछ ईरानियों ने इसे व्यावहारिक पहुंच के रूप में देखा, जबकि अन्य लोगों ने इसे ईरान के अरब और मुस्लिम सहयोगियों को अलग-थलग करने के रूप में देखा.
- ईरान के अधिकांश लोग इतने बूढ़े नहीं हैं कि उन्हें याद हो कि क्रांति से पहले ईरान में जीवन कैसा दिखता था. पहलवी के पिता 47 साल पहले जिस ईरान से भाग गए थे, आज वह ईरान उससे बहुत अलग दिखता है.
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