- पांचों राज्य जहां चुनाव हो रहे हैं, वहां कांग्रेस के पास केरल में सबसे अच्छा मौका है
- असम में भी कांग्रेस जोर-शोर से मैदान में उतरी है, गौरव गोगोई को प्रदेश की कमान सौंपी गई है
- तमिलनाडु में कांग्रेस, डीएमके की जूनियर पार्टनर है और इस बार 3 सीटें ज्यादा 28 पर चुनाव लड़ रही है
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद अब वक्त आ गया है, लेखा-जोखा करने के लिए कि विपक्ष के लिए इस चुनाव के क्या मायने हैं? सबसे पहले बात करते हैं कांग्रेस की. लोकसभा चुनाव में 99 सीटें जीतने के बाद से कांग्रेस का मनोबल बढ़ा हुआ था, लेकिन उसके बाद पार्टी हरियाणा विधानसभा का चुनाव जीतते जीतते हार जाती और फिर दिल्ली भी जहां उसे एक भी सीट नहीं मिली. जबकि झारखंड में जेएमएम के साथ कांग्रेस सरकार का हिस्सा है और जम्मू कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस के साथ भी गठबंधन में है मगर सरकार में शामिल नहीं है.
केरल में कांग्रेस के पास अच्छा मौका
पांचों राज्य जहां चुनाव हो रहे हैं, वहां कांग्रेस के पास केरल में सबसे अच्छा मौका है. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां बहुत अच्छा प्रदर्शन किया. कांग्रेस गठबंधन वाली यूडीएफ ने केरल में 20 में से 19 सीटें जीती, फिर हाल में ही हुए स्थानीय निकाय के चुनाव में भी कांग्रेस ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया. कांग्रेस को लगता है कि वह केरल में इस बार वाममोर्चा को तीसरी बार सरकार नहीं बनाने देगी.

असम में बीजेपी को गढ़ को भेदना मुश्किल
असम चुनाव में भी कांग्रेस जोर-शोर से मैदान में उतरी है, गौरव गोगोई को प्रदेश की कमान सौंपी गई है. कांग्रेस ने इस बार एआईयूडीएफ के बदरुद्दीन अजमल के साथ कोई गठबंधन ना करने का फैसला लिया है. कांग्रेस ने चुनाव की तारीख की घोषणा से पहले ही 60 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिया है और सांसद गौरव गोगोई भी विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं. मगर असम में बीजेपी और हेमंत बिस्वा सरमा के गढ़ को भेदना कांग्रेस के लिए मुश्किल लग रहा है.
तमिलनाडु का कद बढ़ा
तमिलनाडु में कांग्रेस, डीएमके की जूनियर पार्टनर है और इस बार पिछले विधानसभा से 3 सीटें ज्यादा 28 पर चुनाव लड़ रही है. तमिलनाडु में कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेता टीवीके के नेता और एक्टर विजय के साथ चुनाव लड़ने की बात कर रहे थे. मगर कांग्रेस आलाकमान ने इससे मना कर दिया खासकर मल्लिकार्जुन खरगे डीएमके के पक्ष में मजबूती से खड़े रहे और 28 सीटें ले कर कांग्रेस संतुष्ट हो गई साथ में उसे दो राज्यसभा सीट देने का वायदा डीएमके ने किया है.
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बंगाल में कांग्रेस 'एकला चलो रे'
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है, वहां पार्टी के पास एक भी विधायक नहीं है. इसलिए कांग्रेस, बंगाल में अकेले चुनाव लड़ रही है. विपक्षी दलों में दूसरा बड़ा दल तृणमूल कांग्रेस है और ममता बनर्जी चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के लिए चुनाव लड़ रहीं है. ममता का बंगाल में बीजेपी से सीधा मुकाबला है. 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी 18 सीटों पर जीती थी, जो 2024 में घट कर 12 रह गई. 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने 294 में से 215 सीटें जीतीं थी और बीजेपी के पास आई थी 77 सीटें. बंगाल में एसआईआर के बाद जो परिस्थिति बनी है, उससे निपटने के लिए ममता बनर्जी ने खजाना खोल दिया है. महिला और अल्पसंख्यक वोटों के जरिए चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के लिए तैयारी कर रही हैं.
विपक्ष का तीसरा दल है, डीएमके जिसकी तमिलनाडु में सरकार है, वो भी वहां वापसी करना चाहेगी. डीएमके ने इस बार एक बड़ा गठबंधन बनाया है जिसमें कांग्रेस, वामदलों वीसीके, एमडीएमके, एआईयूएमएल, एमएमके और कमल हासन की एमएनएम भी हैं. तमिलनाडु में 2019 के बाद डीएमके कोई चुनाव नहीं हारी है और जयललिता के गुजरने के बाद एआईएडीएमके कोई भी चुनाव नहीं जीती है. एआईएडीएमके के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पन्नीर सेलवम के डीएमके में शामिल होने से भी स्टालिन के हौसले बुलंद हैं.
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पुडुचेरी में फिलहाल एनडीए की सरकार है, मगर डीएमके अपने इस गठबंधन के साथ पुडुचेरी में भी उलटफेर करने की कोशिश करेगी. यानि पांच राज्यों में से पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल में विपक्षी दल सत्ता में वापसी करने की पुरजोर कोशिश करेगी, जबकि असम में बीजेपी फिर से वापसी की तैयारी में है.
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