- खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने PTI मार्च की अगुवाई की
- सरकार ने प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद में प्रवेश से रोकने के लिए सुरक्षा कड़ी कर दी है
- PTI समर्थक खैबर पख्तूनख्वा के विभिन्न इलाकों से होकर इस्लामाबाद की ओर बढ़ रहे हैं
पाकिस्तान में अब राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच चुका है. शरीफ सरकार और विपक्ष की बातचीत फेल हो चुकी है. इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेता इस्लामाबाद की ओर कूच कर गए हैं. दावा कर रहे हैं कि शरीफ सरकार कोई भी बात मानने को तैयारी नहीं है. वहीं सरकार ने कहा है कि इमरान के नेताओं को इस्लामाबाद घुसने नहीं दिया जाएगा.
खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री कर रहे लीड
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी ने रविवार को खैबर पख्तूनख्वा से इस्लामाबाद की ओर अपना 'लॉन्ग मार्च' शुरू किया. खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी लक्की मरवत के गांधी चौक से रवाना हुए. पार्टी ने बताया कि खैबर पख्तूनख्वा के अध्यक्ष जुनैद अकबर खान भी अफरीदी के साथ थे. पार्टी के मुताबिक, अफरीदी गांधी चौक से मार्च की अगुवाई कर रहे हैं, जहां वह मार्च में शामिल लोगों से मिलेंगे और अपनी अगली मंजिल की ओर बढ़ेंगे. लक्की मरवत के गांधी चौक पर PTI के लॉन्ग मार्च में शामिल लोगों को संबोधित करते हुए अफरीदी ने कहा कि उनकी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ सरकार पश्तून लोगों के हितों के खिलाफ कोई भी नीति स्वीकार नहीं करेगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रांत में सिर्फ इमरान खान की "सोच और नीतियों" का पालन किया जाएगा. उन्होंने समर्थन के लिए पश्तूनों का शुक्रिया अदा किया और कहा कि PTI की बातचीत करने वाली कमेटी राजनीतिक तनाव कम करने में मदद के लिए पिछले दिन इस्लामाबाद गई थी. मगर बंद दरवाजों के पीछे फैसले लेने वाली सोच लोगों पर एक और फैसला थोपने की तैयारी कर रही थी. PTI ऐसे किसी भी कदम का विरोध करेगी.
असली आजादी की लड़ाई बताया
अफरीदी ने कहा कि पार्टी ने खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन और इमरजेंसी, दोनों को ही खारिज कर दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि वही "सोच" जो 79 सालों से देश पर थोपी गई थी, अब लोगों पर मिलिट्री ऑपरेशन की एक और पॉलिसी थोपने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि प्रांतीय सरकार ने संघीय सरकार को प्रांत में शांति बहाल करने के लिए एक "स्पष्ट पॉलिसी" दी है और अगर उस पॉलिसी को लागू किया जाए तो 100 दिनों के भीतर शांति लौट सकती है, लेकिन शांति की इच्छा होनी चाहिए. उनका मकसद शांति नहीं है; वे PTI को खत्म करना चाहते हैं, लेकिन उनके पिता भी ऐसा नहीं कर सकते. उन्होंने अनुमान लगाया कि करक में "लोगों का सैलाब" उमड़ेगा और दावा किया कि स्वाबी तक पहुंचते-पहुंचते लाखों लोग इस मार्च में शामिल हो जाएंगे. उन्होंने कहा कि "असली आजादी" का आंदोलन देश के कोने-कोने तक फैल जाएगा.
क्या मांगें थीं इमरान की पार्टी की
खान की पार्टी और सरकार के बीच बातचीत पार्टी की मुख्य मांगों पर केंद्रित थी, जिसमें जेल में बंद पार्टी संस्थापक से तुरंत मुलाकात और उन्हें ऐसे अस्पताल में स्थानांतरित करना शामिल था, जहां उनके निजी डॉक्टर उनकी जांच और इलाज कर सकें. बातचीत का पहला दौर शुक्रवार को हुआ, जिसमें दोनों पक्षों ने अपना-अपना पक्ष रखा और बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई, लेकिन किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके. पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने खान को अस्पताल स्थानांतरित करने की मांग की, जबकि सरकार चाहती थी कि पार्टी 4 अक्टूबर का अपना विरोध प्रदर्शन रद्द कर दे. सरकार के वार्ताकारों और खान की पार्टी के नेताओं के बीच बातचीत का दूसरा दौर शनिवार शाम 5 बजे से कुछ देर पहले शुरू हुआ और कई घंटों तक चला, लेकिन रविवार तड़के बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया.
शरीफ सरकार का क्या कहना है
पाकिस्तान के गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने रविवार को कहा कि बातचीत मुख्य रूप से इसलिए विफल रही क्योंकि खैबर पख्तूनख्वा सरकार केंद्र को यह भरोसा नहीं दिला सकी कि वह प्रांत में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करेगी. उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ की सरकार है. इस प्रांत में लंबे समय से उग्रवादी हिंसा हो रही है, खासकर पाकिस्तानी तालिबान की तरफ से, जिसके उग्रवादी अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा के आर-पार सक्रिय हैं और हमले करते रहते हैं. सूत्रों के मुताबिक, खान से मिलने की इजाजत को लेकर बातचीत का दूसरा दौर भी बेनतीजा रहा; सरकार का कहना था कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पहले विरोध प्रदर्शन रद्द करने का ऐलान करे. इमरान खान से मुलाकात का फैसला बाद में किया जाएगा.
कब तक पहुंचेंगे इस्लामाबाद
अफरीदी ने 'X' पर एक संदेश में कहा कि टैंक, डेरा इस्माइल खान, दक्षिण वजीरिस्तान, उत्तर वजीरिस्तान, बन्नू और लक्की मरवत से पार्टी समर्थक रविवार को दोपहर 1 बजे लक्की मरवत के गांधी चौक से शुरू होने वाले लॉन्ग मार्च में शामिल होंगे. यह कारवां रात बिताने के लिए करक के पास रुकेगा, जहां से अगले दिन दोपहर 12:30 बजे रवाना होंगे और कोहाट के पास रात बिताएंगे. 6 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे, कोहाट, हंगू, कुर्रम और ओरकज़ई से प्रदर्शनकारी काफिले में शामिल होंगे, जो पेशावर की ओर बढ़ेगा और मट्टानी के पास रात बिताएगा. अफरीदी ने कहा कि कारवां 7 अक्टूबर की दोपहर पेशावर के बुध बैर से रवाना होगा. उन्होंने कहा कि चारसड्डा इंटरचेंज के पास रात बिताने से पहले, पेशावर के बाकी निर्वाचन क्षेत्रों के लोग कोहाट रोड ब्रिज और मोटरवे टोल प्लाजा पर काफिले में शामिल होंगे. चारसड्डा और मोहमंद के लोगों के शामिल होने के बाद, प्रदर्शनकारी 8 अक्टूबर को दोपहर 12:30 बजे चारसड्डा इंटरचेंज से रवाना होंगे. अफरीदी ने कहा कि उस दिन पूरे केपी (KP) से लोग खैराबाद में इकट्ठा होंगे, लेकिन उन्होंने इस्लामाबाद तक की यात्रा के अंतिम चरण की घोषणा नहीं की.
इस बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. इससे पहले संघीय सरकार ने प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद में प्रवेश करने से रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया था और राजधानी की ओर जाने वाली सड़कों पर शिपिंग कंटेनर रखे थे.
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