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ईरान के तेल पर अमेरिका की नाकेबंदी, इधर हर दिन 1 करोड़ लीटर तेल की पाकिस्तान में हो रही तस्करी

Pakistan Smuggling Iranian Oil: बलूचिस्तान में ईरान सीमा के आसपास तेल की तस्करी ने एक अनौपचारिक अर्थव्यवस्था ही खड़ी कर दी है. हर दिन पाकिस्तान में 1 करोड़ लीटर पेट्रोल-डीजल की तस्करी हो रही है.

ईरान के तेल पर अमेरिका की नाकेबंदी, इधर हर दिन 1 करोड़ लीटर तेल की पाकिस्तान में हो रही तस्करी
Pakistan Smuggling Iranian Oil: पाकिस्तान में कैसे हो रही ईरानी तेल की तस्करी
  • पाकिस्तान में हर दिन लगभग एक करोड़ लीटर ईरानी तेल तस्करी के जरिए लाया जाता है
  • बलूचिस्तान के अधिकांश पेट्रोल पंप अवैध तेल सप्लाई पर निर्भर हैं
  • तस्करी के लिए पहाड़ी रास्तों और समुद्री मार्गों का इस्तेमाल किया जाता है, पूरा सिंडिकेट काम करता है
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Pakistan Smuggling Iranian Oil: अमेरिका-ईरान जंग और होर्मुज की नाकेबंदी के कारण इस समय दुनिया तेल और गैस के संकट से जूझ रही है. खुद ईरान का पड़ोसी देश पाकिस्तान हलकान है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ खुलेआम इस बात का रोना रो रहे हैं कि जंग के कारण पाकिस्तान का तेल आयात बिल 300 मिलियन डॉलर से बढ़कर 800 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. हालांकि दूसरी तरफ एक सच्चाई यह भी है कि पाकिस्तान का बलूचिस्तान इलाका ईरान से बड़े पैमाने पर तेल की तस्करी का रास्ता बना हुआ है. हर दिन लगभग 1 करोड़ लीटर ईरानी तेल तस्करी के रास्ते पाकिस्तान में प्रवेश करता है और वहां की सरकार-सेना कुछ नहीं कर पाती या करना नहीं चाहती. 

पाकिस्तान, ईरानी तेल और तस्करी 

बलूचिस्तान में पाकिस्तान-ईरान सीमा के आसपास तेल की तस्करी ने एक अनौपचारिक अर्थव्यवस्था ही खड़ी कर दी है. इंडोनेशिया मीडिया की एक रिपोर्ट को मुताबिक इस सीमावर्ती क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले तेल का बड़ा हिस्सा आधिकारिक व्यापार के बजाय अवैध रास्तों से आता है. अनुमान है कि हर दिन तस्कर 1 करोड़ लीटर ईरानी तेल से पाकिस्तान में लाते हैं. इसका असर यह है कि बलूचिस्तान के 60 से 70 प्रतिशत पेट्रोल पंप तेल की इसी अवैध सप्लाई पर निर्भर हैं. खुद इस तस्करी नेटवर्क के कारण पाकिस्तान को हर साल लगभग 81.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर के राजस्व का नुकसान हो रहा है.

पाकिस्तान सरकार तो दावा करती है कि उसने इस अवैध व्यापार को रोकने के लिए आधिकारिक स्तर पर कई प्रयास किए गए हैं. लेकिन बलूचिस्तान की स्थानीय आबादी की ईरान से मिलने वाले सस्ते तेल-गैस पर इतनी अधिक निर्भरता है कि यहां एक ऐसी समानांतर वितरण प्रणाली ही खड़ी हो गई है है, जिसे नियंत्रित करना दोनों देशों के अधिकारियों के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है.

पहाड़, पिकअप और गुप्त रास्ते... कैसे होती है तस्करी

तेल की तस्करी के लिए गुप्त पहाड़ी रास्तों का इस्तेमाल किया जाता है, जहां पेट्रोल और डीजल के ड्रम ढोने के लिए छोटे पिकअप ट्रकों की मदद ली जाती है. यह गतिविधि मुख्य रूप से बलूचिस्तान के मकरान, रख्शान और चागाई क्षेत्रों में केंद्रित है. इन ऑपरेशनों में अक्सर स्थानीय निवासियों, कुछ सरकारी अधिकारियों और कभी-कभी हथियारबंद समूहों के बीच तालमेल देखने को मिलता है. इससे इस तस्करी नेटवर्क को और मजबूती मिलती है. 

डॉन न्यूज के अनुसार 2020 में ईरान से होने वाली तेल तस्करी का कुल मूल्य सालाना 250 अरब रुपये से अधिक था. पाकिस्तान की ट्रिब्यून ने अप्रैल 2024 में बताया कि प्रतिदिन लगभग 1 करोड़ लीटर ईरानी पेट्रोल और डीजल पाकिस्तान में तस्करी किया जा रहा है, जिससे देश को सालाना 227 अरब रुपये से ज्यादा के राजस्व का नुकसान हो रहा है.

तेल तस्करी का एक बड़ा हिस्सा समुद्री मार्ग से होता है. इसका मुख्य रास्ता ईरान के सिस्तान क्षेत्र से शुरू होता है, जहां से स्पीड बोट्स ईंधन के ड्रम लेकर दश्त नदी के रास्ते जिवानी तक पहुंचती हैं. तटीय इलाकों में इस अवैध व्यापार को व्यापक स्थानीय समर्थन हासिल है. रिपोर्टों के मुताबिक, हजारों नावें इस गतिविधि में लगी हैं और इन्हें तट पर मौजूद होटलों और गोदामों से लॉजिस्टिक समर्थन मिलता है.

पाकिस्तान के अंदर का नेटवर्क

पाकिस्तान के तट पर पहुंचने के बाद तेल को मोडिफाइड ट्रकों में भरकर ग्वादर के पास पहुंचाया जाता है. यहां से इसे नॉन-कस्टम-पेड पिकअप के जरिए बलूचिस्तान के भीतर और फिर पंजाब (पाकिस्तान वाला) व सिंध के सीमावर्ती इलाकों तक भेजा जाता है. रोजाना 2,000 से अधिक वाहन सीमा पार से तेल ला रहे हैं. ग्वादर के रास्ते करीब 3,000 नावें हर दिन लाखों लीटर तेल की सप्लाई कर रही हैं. तस्करी का तेल ग्वादर, पंजगुर, माशखेल और क्वेटा में बने भूमिगत गोदामों में जमा किया जाता है. इसके बाद बसों, टैंकरों और ट्रकों में बनी हुई सीक्रेट जगहों में तेल भरकर इसे देश के अन्य हिस्सों में पहुंचाया जाता है. तस्करी के तेल की खपत पूरे पाकिस्तान में फैली हुई है. इसका 45% तेल सिंध में, 25% पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में और बाकि का हिस्सा बलूचिस्तान में उपयोग होता है.

ईरानी डीलरों को अरबों का भुगतान

इस पूरे नेटवर्क के जरिए ईरानी डीलरों को हर साल लगभग 284 अरब रुपये का भुगतान किया जाता है. भुगतान के लिए कई अनौपचारिक और वैकल्पिक तरीकों का इस्तेमाल होता है. बड़े सौदों के लिए भुगतान किसी तीसरे देश के माध्यम से अमेरिकी डॉलर में किया जाता है. पाकिस्तान में रुपये का आदान-प्रदान होता है जबकि डीलर को पैसा तीसरे देश में मिलता है.

सोने या अन्य सामान के बदले भी तेल का लेन-देन होता है. खास बात है कि करीब 95% तस्करी पर्ची सिस्टम के तहत होती है, जिसे 2021 में स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों द्वारा शुरू किया गया था. बलूचिस्तान में पाकिस्तान–ईरान सीमा पर तेल तस्करी अब केवल अवैध कारोबार नहीं, बल्कि एक संगठित समानांतर अर्थव्यवस्था का रूप ले चुकी है. सस्ते ईंधन पर स्थानीय निर्भरता, जटिल भौगोलिक हालात और मजबूत तस्करी नेटवर्क के चलते इस पर प्रभावी नियंत्रण दोनों देशों के लिए एक बड़ी और लगातार बनी रहने वाली चुनौती है.

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