- पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने कुल 159 सांसदों और विधायकों की सदस्यता संपत्ति विवरण न जमा करने पर निलंबित कर दी
- निलंबित सदस्यों में नेशनल असेंबली के 32, सीनेट के 9 और 4 प्रांतीय असेंबली के सदस्य शामिल हैं
- निलंबन से सदन की कुल शक्ति कम हो सकती है जिससे मतदान, कोरम और सरकार की बहुमत स्थिति प्रभावित होने की संभावना
भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के चुनाव आयोग (ECP) ने सख्त कार्रवाई करते हुए कुल 159 सांसदों व विधायकों की सदस्यता निलंबित कर दी. इन सदस्यों में नेशनल असेंबली, सीनेट और चारों प्रांतीय असेंबलियों के कानून निर्माता शामिल हैं. इन सभी ने तय वक्त के भीतर अपनी संपत्ति और देनदारियों का पूरा विवरण जमा नहीं कराया था. इसलिए इनके खिलाफ ये सख्त कार्रवाई की गई.
ECP द्वारा जारी बयान के अनुसार इनकी सदस्यता तुरंत प्रभाव से निलंबित मानी जाएगी और वे अपनी जिम्मेदारियां तब तक नहीं निभा सकेंगे, जब तक वे अपने संपत्ति विवरण जमा नहीं कर देते. आयोग ने आखिरी चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि सभी सांसदों व विधायकों और उनके जीवनसाथी, आश्रित बच्चों को 2024–25 का विवरण 15 जनवरी तक जमा करना अनिवार्य है. ऐसा न करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी.
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किस-किस की सदस्यता निलंबित हुई?
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में नेशनल असेंबली 32 सदस्यों की सदस्यता निलंबित हुई है, जिनमें प्रमुख नाम सैयद अली मूसा गिलानी, खालिद मकबूल सिद्दीकी, मुहम्मद अख्तर मेंगल शामिल हैं. वहीं 9 सीनेटरों की सदस्यता निलंबित की गई है, जिनमें मुसादिक मलिक प्रमुख नाम हैं. प्रांतीय असेंबली के निलंबित सदस्य में पंजाब असेंबली के 50 सदस्य और सिंध असेंबली के 33 सदस्य है. जिनमें इनमें सईद गनी और हाफ़िज़ नईमुर रहमान भी शामिल है. जबकि खैबर पख्तूनख्वा से 28 सदस्य और बलूचिस्तान से 7 सदस्य शामिल है.
क्या नेशनल असेंबली और सीनेट की संख्या पर असर पड़ेगा?
गौर करने वाली बात ये है कि यह पाकिस्तान में अहम समय पर हुआ है. ऐसे समय में जब राजनीतिक समीकरण बेहद नाजुक हैं. इतनी बड़ी संख्या में सदस्यों के निलंबित होने से सदन की कुल शक्ति अस्थायी रूप से कम हो जाती है, जो सीधे मतदान और कोरम पर प्रभाव डालती है.
क्या सरकार की बहुमत स्थिति प्रभावित हो सकती है?
किसी भी विधेयक या महत्वपूर्ण निर्णय के लिए बहुमत की गिनती मौजूदा सक्रिय सदस्यों पर आधारित होती है. अगर निलंबित सदस्यों में बड़ी संख्या सरकार या उसकी सहयोगी पार्टियों की है, तो सरकार की मतों की बढ़त कम हो सकती है. इससे विपक्ष को अस्थायी रूप से अधिक प्रभाव मिल सकता है, खासकर उन मामलों में जहां सरकार को हर वोट की जरूरत होती है. बहुमत “क़ायम” रह सकता है, लेकिन बहुमत का अंतर जरूर कम हो सकता है. ऐसे में सरकार को हर वोट से पहले उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी.
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कोरम (Quorum) का संकट: क्या सदन की कार्यवाही रुक सकती है?
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में कोरम कुल सदस्यों के 1/4 (चौथाई) से पूरा होता है. यदि 159 सदस्य निलंबित हैं और इनमें नेशनल असेंबली के सदस्य भी शामिल हैं, तो सदन की कार्यवाही चलाने में कुछ दिक्कतें आ सकती हैं.
कोरम पूरा न होने की आशंका- कम सदस्यों की सक्रिय उपस्थिति का मतलब है कि विपक्ष या असंतुष्ट सदस्य कोरम पॉइंट आउट करके कार्यवाही रुकवा सकते हैं.
कम उपस्थिति वाली सरकार पर दबाव- सरकार को हर सत्र में पर्याप्त संख्या में सदस्यों की उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी.क्योंकि जरा सी चूक से सदन स्थगित हो जाएगा.
क्या महत्वपूर्ण विधेयकों पर असर पड़ेगा?
सदस्यता निलंबन का सबसे बड़ा प्रभाव वोटिंग पर पड़ सकता है:
- साधारण विधेयक (Ordinary Bills) के लिए साधारण बहुमत चाहिए. एजेंडा पास होना कठिन हो सकता है यदि निलंबित सदस्यों में सत्ताधारी दल के कई सदस्य शामिल हों.
- वित्तीय विधेयक या नाजुक मुद्दे, ऐसे बिलों पर सरकार को आमतौर पर बड़े समर्थन की जरूरत होती है. निलंबन के दौरान सत्ताधारी गठबंधन कमज़ोर दिख सकता है और विपक्ष कानूनों को अटकाने में सक्षम हो सकता है.
- संवैधानिक संशोधन के लिए 2/3 बहुमत चाहिए. ऐसे में 159 सदस्यों का बाहर होना बड़ी चुनौती है. इन दिनों कोई संशोधन प्रक्रिया चल रही हो तो यह सीधा अड़चन बन सकता है.
क्यों अनिवार्य है यह घोषणा?
ECP ने इसके साथ ही साफ कर दिया कि संपत्ति विवरण जमा करना चुनाव अधिनियम 2017 की धारा 137 के तहत एक कानूनी अनिवार्यता है. हर सांसद और सीनेटर को 31 दिसंबर तक अपने, अपनी पत्नी और आश्रित बच्चों की संपत्ति व देनदारियों का विवरण जमा करना होता है, यह विवरण 30 जून तक की स्थिति के आधार पर भरा जाता है. जिन सांसदों/विधायकों ने यह प्रक्रिया पूरी नहीं की, उन्हें स्वतः निलंबित कर दिया गया है.
अब आगे क्या?
ECP ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही कोई सदस्य अगर अपने विवरण जमा करता है, उसकी सदस्यता फिर से बहाल की जा सकती है. लेकिन तब तक ये सभी निलंबित सदस्य सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले पाएंगे, कोई आधिकारिक दायित्व निभाने के पात्र नहीं होंगे.
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