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संपत्ति छिपाने पर 159 सांसद-विधायक सस्पेंड क्या हुए, कानून ही बदल रहा पाकिस्तान, NA से बिल पास

पाकिस्तान की सदन नेशनल असेंबली ने नया कानून पास किया है, जो सांसदों को अपनी संपत्ति का ब्योरा जनता से छिपाने का कानूनी अधिकार देता है.

संपत्ति छिपाने पर 159 सांसद-विधायक सस्पेंड क्या हुए, कानून ही बदल रहा पाकिस्तान, NA से बिल पास
  • पाकिस्तान चुनाव आयोग ने 159 सांसद-विधायकों को निलंबित किया था क्योंकि उन्होंने संपत्ति की डिटेल्स नहीं दी थीं
  • नेशनल असेंबली ने बिल पास किया है, जिससे सांसदों को अपनी संपत्ति की जानकारी न देने का अधिकार होगा
  • चुनाव अधिनियम 2017 की धारा 138 में नया प्रावधान जोड़ा गया है जिससे नेताओं को संपत्ति बताने की जरूरत नहीं होगी
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पाकिस्तान में हाल ही में चुनाव आयोग ने 159 सांसदों और विधायकों की सदस्यता निलंबित कर दी थी. ये कदम इसलिए उठाया गया था क्योंकि इन नेताओं ने कानून के अनुसार अपनी संपत्ति की डिटेल्स जमा नहीं की थीं. अब पाकिस्तान की संसद ने इस कानून को ही बदलने का फैसला कर लिया है. पाकिस्तानी संसद के निचले सदन नेशनल असेंबली ने बुधवार को 'चुनाव संशोधन विधेयक 2026' पारित कर दिया, जो सांसदों को अपनी संपत्ति का ब्योरा जनता से छिपाने का कानूनी अधिकार देता है. 

नेशनल असेंबली से पास बिल में क्या है?

नेशनल असेंबली ने 'चुनाव अधिनियम 2017' की धारा 138 में संशोधन करते हुए एक ऐसा प्रावधान जोड़ दिया है, जिससे अब सांसदों और विधायकों की संपत्तियों को सार्वजनिक करने की जरूरत ही नहीं रहेगी. नए प्रावधान के मुताबिक, अगर कोई सांसद नेशनल असेंबली के अध्यक्ष या सीनेट के अध्यक्ष को लिखित आवेदन देता है कि उसकी डिटिल्स सार्वजनिक होने से उसके या उसके परिवार की सुरक्षा को खतरा हो सकता है, तो अध्यक्ष चुनाव आयोग को वो जानकारियां सीक्रेट रखने का निर्देश दे सकते हैं. ये छूट एक बार में एक साल के लिए ही मिलेगी.

इमरान की पार्टी ने किया विरोध 

नेशनल असेंबली में इस विधेयक को विपक्षी दलों और इमरान खान की पार्टी पीटीआई के पुरजोर विरोध के बावजूद पारित कर दिया गया. पीटीआई नेताओं का आरोप है कि यह कानून उन नेताओं को बचाने के लिए लाया गया है, जो अपनी अवैध संपत्ति को जनता से छिपाना चाहते हैं. उन्होंने इसे लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ करार दिया. वहीं सरकार का तर्क है कि सांसदों के जीवन और सुरक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए यह संतुलित दृष्टिकोण जरूरी था ताकि सार्वजनिक जवाबदेही के नाम पर उनकी प्राइवेसी का उल्लंघन न हो.

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EC ने 159 सांसद-विधायक सस्पेंड किए थे

याद दिला दें कि चुनाव आयोग ने पिछले हफ्ते बड़ा फैसला लेते हुए 159 ऐसे सांसदों और विधायकों की सदस्यता निलंबित कर दी थी, जिन्होंने अपनी वार्षिक वित्तीय रिपोर्ट जमा नहीं की थी. निलंबित होने वालों में नेशनल असेंबली के 32 सदस्य, 9 सीनेटर और देश की चारों प्रांतीय विधानसभाओं पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के 118 विधायक शामिल हैं. 

निलंबित नेताओं में मंत्री-पूर्व मुख्यमंत्री भी

निलंबित हुए नेताओं की इस लिस्ट में संघीय मंत्री डॉ. मुसादिक मलिक, सिंध के स्पीकर सैयद ओवैस कादिर शाह और पूर्व मुख्यमंत्री सैयद कायम अली शाह जैसे कद्दावर नाम शामिल हैं. पंजाब विधानसभा के 50, सिंध के 33, खैबर पख्तूनख्वा के 28 और बलूचिस्तान के 7 विधायकों की सदस्यता फिलहाल निलंबित है. अब इस नए विधेयक को ऐसे ही नेताओं के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है. 

पारदर्शिता का कानून तार-तार

नेशनल असेंबली से पारित होने के बाद इस विधेयक को सीनेट में रखा जाएगा. अगर वहां से मंजूरी के बाद राष्ट्रपति इस पर मुहर लगा देते हैं तो ये सांसदों की अवैध संपत्तियों पर पर्दा डालने का कानूनी आधार साबित हो सकता है. जानकारों का मानना है कि एक तरफ दुनिया भर में नेताओं के लिए अधिक पारदर्शिता की मांग हो रही है, वहीं पाकिस्तान का यह फैसला उसे धता बताने वाला है. 

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