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होर्मुज स्ट्रेट खोलकर तेल से बड़ा मुनाफा कमाने का मौका: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

विंडवर्ड के अनुसार, दो अप्रैल तक अरब की खाड़ी में लगभग 656 जहाज मौजूद थे, जिनमें 55 प्रतिशत मालवाहक जहाज और 45 प्रतिशत टैंकर थे. यातायात असंतुलित बना हुआ है.

होर्मुज स्ट्रेट खोलकर तेल से बड़ा मुनाफा कमाने का मौका: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
ईरान युद्ध में डोनाल्ड ट्रंप रोज नये-नये दावे कर रहे हैं.
  • जहाजों की आवाजाही में धीरे-धीरे सुधार दिख रहा है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है
  • मार्च मध्य में ईरान द्वारा लागू नेविगेशन कॉरिडोर के कारण जहाजों को मार्ग बदलना पड़ा और निगरानी में आना पड़ा
  • अरब की खाड़ी में बड़ी संख्या में जहाज मौजूद हैं, जिनमें मालवाहक और टैंकर शामिल हैं, लेकिन यातायात असंतुलित है

खाड़ी क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है. इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को संकेत दिया कि तेल से लाभ कमाने के लिए होर्मुज स्‍ट्रेट को फिर से खोला जा सकता है और इसे भारी मुनाफा कमाने का अवसर बताया, क्‍योंक‍ि समुद्री यातायात में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं. ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “थोड़ा और समय मिलने पर हम आसानी से होर्मुज स्‍ट्रेट खोल सकते हैं, तेल ले सकते हैं और बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं. यह दुनिया के लिए ‘गशर' साबित होगा.”

धीरे-धीरे सुधार का संकेत

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब नए आंकड़े इस रणनीतिक जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही में सतर्क वापसी का संकेत दे रहे हैं, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है. मैरीटाइम इंटेलिजेंस फर्म विंडवर्ड के अनुसार, एक अप्रैल को 16 जहाज इस स्‍ट्रेट से गुजरे, जो गंभीर व्यवधान के बाद लगातार तीसरा दिन था जब आवाजाही दर्ज की गई. एक अलग आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को 16 मालवाहक जहाज यहां से गुजरे, जो एक दिन पहले 11 थे. यह धीरे-धीरे सुधार का संकेत है, हालांकि यह अभी भी संघर्ष से पहले के स्तर से काफी कम है.

यह व्यवधान मार्च के मध्य में शुरू हुआ था, जब ईरान ने अनिवार्य नेविगेशन कॉरिडोर लागू किया, जिसकी निगरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) कर रहा था. इसके चलते जहाजों को अपने मार्ग बदलने पड़े और ईरानी निगरानी में संचालन करना पड़ा. हाल के जहाजों की आवाजाही से संकेत मिलता है कि कुछ ऑपरेटर इन प्रतिबंधों को परखने लगे हैं.

विंडवर्ड के अनुसार, दो अप्रैल तक अरब की खाड़ी में लगभग 656 जहाज मौजूद थे, जिनमें 55 प्रतिशत मालवाहक जहाज और 45 प्रतिशत टैंकर थे. यातायात असंतुलित बना हुआ है, जहां केवल एक जहाज अंदर आया जबकि आठ बाहर गए. इनमें कंटेनर कार्गो और तेल टैंकरों का दबदबा रहा. ओमान के नियंत्रण वाले तीन जहाज ईरान नियंत्रित कॉरिडोर को दरकिनार करते हुए अंतरराष्ट्रीय मार्गों से जलसंधि से बाहर निकले. इनमें से एक एलएनजी टैंकर सोहार मस्कट के पास पहुंचा, जो संघर्ष बढ़ने के बाद स्‍ट्रेट से गुजरने वाला पहला एलएनजी जहाज बना.

किस देश के जहाज ज्यादा निकले

फ्रांसीसी लॉजिस्टिक्स कंपनी सीएमए सीजीएम से जुड़ा एक कंटेनर जहाज भी इस स्‍ट्रेट से गुजरा, जो प्रतिबंध कड़े होने के बाद पश्चिमी देशों से जुड़े जहाजों में से एक शुरुआती उदाहरण है. विंडवर्ड रिपोर्ट इस इलाके में तथाकथित फ्लैग-ऑफ-कन्वीनियंस रजिस्ट्री के दबदबे को दिखाती है. पनामा 142 जहाजों के साथ सबसे आगे है, उसके बाद लाइबेरिया (95), मार्शल आइलैंड्स (93), और ईरान (37) हैं, जो कमर्शियल और ज़्यादा रिस्क वाले शिपिंग प्रोफ़ाइल का मिक्स दिखाता है. जहाजों के स्वामित्व पैटर्न अभी भी स्पष्ट नहीं हैं. रिपोर्ट के अनुसार, स्‍ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के वास्तविक मालिक चीन, भारत, तुर्की और ईरान से जुड़े हैं, जबकि लगभग 25 प्रतिशत जहाजों का स्वामित्व अज्ञात है, जो निगरानी और नियंत्रण को जटिल बनाता है.

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