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Explainer: सऊदी अरब क्यों चाहता है कि डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर और हमले न करें?

ईरान-इजरायल तनाव के बीच सऊदी अरब ने कथित तौर पर डोनाल्ड ट्रंप से नए हमलों से बचने की अपील की है. क्या है विजन 2030? जानिए तेल बाजार, होर्मुज स्ट्रेट और पूरे खाड़ी क्षेत्र पर इसका संभावित असर क्या होगा?

Explainer: सऊदी अरब क्यों चाहता है कि डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर और हमले न करें?
ट्रंप से और हमले नहीं करने के पीछे सऊदी का विजन 2030 और पूरे खाड़ी क्षेत्र की चिंता
AFP
  • सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कथित तौर पर डोनाल्ड ट्रंप से ईरान पर नए हमलों से बचने की अपील की है.
  • सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कथित तौर पर डोनाल्ड ट्रंप से ईरान पर नए हमलों से बचने की अपील की है.
  • इससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है और विजन 2030 प्रभावित हो सकता है.

ईरान-इजरायल तनाव के बीच सऊदी अरब नहीं चाहता कि अमेरिका युद्ध को और बढ़ाए. मोहम्मद बिन सलमान को आशंका है कि ईरान की जवाबी कार्रवाई से खाड़ी क्षेत्र, तेल आपूर्ति और विजन 2030 को बड़ा झटका लग सकता है. इसी वजह से रियाद सैन्य टकराव के बजाय कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहा है. ईरान और इजरायल  के बीच बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब ने अमेरिका से एक अहम अपील की है. खबरों के मुताबिक, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कहा है कि वे ईरान पर और सैन्य हमले करने से बचें. इसकी सबसे बड़ी वजह सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा नहीं, बल्कि सऊदी अरब की महत्वाकांक्षी आर्थिक योजना विजन 2030 भी है.

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने शनिवार को डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की. इस बातचीत में उन्होंने ईरान के खिलाफ संभावित नए अमेरिकी हमलों को लेकर अपनी चिंता जताई. यह बातचीत ऐसे समय हुई जब अमेरिका और इजरायल  की ओर से तेहरान पर किए गए हालिया हमलों के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है. इसी तनाव ने सऊदी अरब के विजन 2030 के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं.

ट्रंप किन ठिकानों पर हमले पर विचार कर रहे हैं?

एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ईरान की ऊर्जा सुविधाओं पर हमले की संभावना पर विचार कर रहे हैं. इसकी वजह हाल ही में ईरान द्वारा जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइल हमला और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों में आई बाधाएं बताई जा रही हैं. अगर अमेरिका ऐसे हमले करता है तो इसका असर पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है.

मोहम्मद बिन सलमान

मोहम्मद बिन सलमान
Photo Credit: AFP

क्या है विजन 2030?

सऊदी सेना के रिटायर्ड ब्रिगेडियर जनरल अब्दुल्ला बिन फराह अल-शाया ने न्यूजवीक से कहा कि विजन 2030 सिर्फ एक आर्थिक योजना नहीं है. उन्होंने कहा कि यह एक व्यापक राष्ट्रीय परियोजना है जिसका उद्देश्य सऊदी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से बाहर निकालना, निवेश बढ़ाना, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और इनोवेशन का ग्लोबल सेंटरर बनाना तथा लंबे समय तक बने रहने वाला आर्थिक विकास सुनिश्चित करना है. यानी यदि क्षेत्र में युद्ध बढ़ता है तो विदेशी निवेश, पर्यटन, व्यापार और बड़े डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स प्रभावित हो सकते हैं.

सऊदी अरब क्यों चिंतित है?

सऊदी अरब को डर है कि अगर अमेरिका ईरान पर बड़े पैमाने पर हमला करता है तो उसका जवाब पूरे खाड़ी क्षेत्र को भुगतना पड़ सकता है. तेहरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि यदि अमेरिका नए हमले करता है तो ईरान इजरायल  के साथ-साथ खाड़ी देशों में मौजूद ऊर्जा प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी निशाना बना सकता है. 

अमेरिका का करीबी सहयोगी होने के बावजूद सऊदी अरब का रुख अलग दिख रहा है. लंबे समय से मध्य पूर्व में सऊदी अरब को अमेरिका का सबसे करीबी सहयोगी माना जाता रहा है. लेकिन दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद भी रहे हैं. हालांकि, ईरान को लेकर रणनीति तय करने में सऊदी अरब अब भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और वॉशिंगटन के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है.

हूती विद्रोहियों की फाइल फोटो

हूती विद्रोहियों की फाइल फोटो
Photo Credit: AFP

हूती विद्रोहियों से क्या सबक मिला?

अमेरिका के पूर्व रक्षा अधिकारी और मध्य पूर्व एक्सपर्ट डाना स्ट्रोल ने मीडिया से कहा कि सऊदी अरब ने वर्षों तक चले युद्ध के बाद यह समझ लिया कि केवल सैन्य ताकत के दम पर यमन के हूती विद्रोहियों के खतरे को खत्म नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल के बार-बार किए गए सैन्य अभियानों के बावजूद हूती खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ.

विजन 2030 पर फिर पड़ सकता है असर

डाना स्ट्रोल के मुताबिक, यदि सऊदी अरब फिर से हूती विद्रोहियों के साथ किसी बड़े संघर्ष में उलझा तो इसका सीधा असर विजन 2030 पर पड़ सकता है.

उन्होंने कहा कि यह केवल सऊदी सेना की क्षमता का सवाल नहीं है, बल्कि हूती विद्रोहियों की रणनीति, उन्हें मिलने वाले ईरानी समर्थन और यमन में उनकी मजबूत मौजूदगी भी इस चुनौती को जटिल बनाती है. उनके मुताबिक, हर सुरक्षा समस्या का समाधान सैन्य कार्रवाई नहीं होता.

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची
Photo Credit: AFP

ईरान ने क्या चेतावनी दी?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के अधिकारियों से अलग-अलग बातचीत की.

इन वार्ताओं के दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका या इजरायल  ईरान पर हमला करते हैं, या कोई अन्य देश ऐसे हमलों का समर्थन करता है, तो ईरान उसका कड़ा जवाब देगा.

कतर निभा रहा है मध्यस्थ की भूमिका

इस पूरे संकट के बीच कतर दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है.

कतरी अधिकारियों ने ईरान, अमेरिका और ओमान के प्रतिनिधियों से बातचीत की है ताकि दुनिया भर में कच्चे तेल के सप्लाई की आपूर्ति के बेहद अहम रूट होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा सामान्य रूप से खोला जा सके.

पिछले कुछ महीनों में पूरी दुनिया ने देखा है कि किस तरह होर्मुज स्ट्रेट का बाधित होना तेल की आपूर्ति और कीमतों पर प्रतिकूल असर डाला है. ऐसे में सऊदी अरब सैन्य टकराव के बजाय कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहा है. 

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