- नेपाल की सबसे पुरानी सक्रिय पार्टी नेपाली कांग्रेस आधिकारिक रूप से दोफाड़ हो चुकी है
- चुनाव आयोग ने गगन थापा के गुट को आधिकारिक पार्टी के रूप में मान्यता दे दी है
- विरोध में शेर बहादुर देउबा गुट ने राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट जाने की धमकी दे दी है
नेपाल की राजनीति इस वक्त भारी उथल-पुथल से गुजर रही है. नेपाल की सबसे पुरानी सक्रिय पार्टी नेपाली कांग्रेस औपचारिक रूप से दोफाड़ हो चुकी है. इसके दो दिन बाद चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाते हुए गगन थापा की अगुआई वाली समिति को आधिकारिक पार्टी के रूप में मान्यता दे दी है. इसके विरोध में शेर बहादुर देउबा गुट ने राष्ट्रव्यापी धरना प्रदर्शन की धमकी दे दी है. आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का भी ऐलान कर दिया है.
नेपाली कांग्रेस में फूट, आयोग का अहम फैसला
'काठमांडू पोस्ट' के मुताबिक, कार्यवाहक मुख्य चुनाव आयुक्त राम प्रसाद भंडारी की अध्यक्षता में हुई चुनाव आयोग की बैठक में नेपाली कांग्रेस को लेकर अहम फैसला लिया गया. विशेष आम अधिवेशन के जरिए चुनी गई गगन थापा के नेतृत्व वाली समिति के दावे को सही ठहराया गया और उसे आधिकारिक पार्टी के रूप में मान्यता दे दी गई.
देऊबा दरकिनार, थापा के गुट को क्यों मिली मान्यता?
चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एक चुनाव आयुक्त ने विशेष अधिवेशन के जरिए चुनी गई टीम को वैधता देने का विरोध किया था. ऐसे में बहुमत के आधार पर फैसला करना पड़ा. पार्टी की जानकारी अपडेट करने के लिए आयोग ने तीन मुख्य आधारों पर भरोसा किया.
- नेपाली कांग्रेस का संविधान 40 प्रतिशत आम अधिवेशन प्रतिनिधियों को विशेष आम अधिवेशन बुलाने की अनुमति देता है. आयोग ने माना कि जब केंद्रीय कार्य समिति पार्टी संविधान में अनिवार्य प्रावधान का पालन करने में आनाकानी कर रही थी, तो महासचिव थापा और विश्व प्रकाश शर्मा ने विशेष अधिवेशन बुलाया, जो वैध था.
- नेपाली कांग्रेस का संविधान स्पष्ट रूप से आम अधिवेशन प्रतिनिधियों को पार्टी का सर्वोच्च अधिकारी मानता है, जिससे उनके फैसले बाध्यकारी हो जाते हैं.
- चुनाव आयोग ने पाया कि विशेष आम अधिवेशन की मांग पर कोई लिखित में असहमति दर्ज नहीं कराई गई थी, जिससे यह पुष्टि होती है कि अधिवेशन को संविधान के अनुसार ही बुलाया गया था.
अब आगे क्या होगा?
कार्यवाहक मुख्य चुनाव आयुक्त के अनुसार, निर्वाचन आयोग अब शेर बहादुर देउबा गुट को दो विकल्प देगा. अगर वो नेपाली कांग्रेस के नए चुने गए नेतृत्व के तहत आना चाहते हैं तो ठीक है, अन्यथा उन्हें एक नई पार्टी के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने की अनुमति होगी. आयोग के इस फैसले से नेपाल की राष्ट्रीय राजनीति और खासकर नेपाली कांग्रेस में ध्रुवीकरण बढ़ने की संभावना है.
आगामी चुनाव पर कैसे मंडराया खतरा?
नेपाली कांग्रेस का शेर बहादुर देउबा गुट चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ देश भर में प्रदर्शन करने का ऐलान कर चुका है. देउबा गुट ने शनिवार सुबह सनेपा, ललितपुर में पार्टी मुख्यालय पर केंद्रीय कार्य समिति की बैठक बुलाई और चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान कर दिया. अब अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कोई दखल देता है तो आगामी मार्च में होने वाले चुनाव के बाधित होने का खतरा भी पैदा हो सकता है.
गगन थापा का क्या कहना है?
उधर गगन थापा ने एक बयान जारी करके चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने सभी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने का आग्रह करते हुए कहा कि वह पार्टी को मजबूत करने की जिम्मेदारी लेंगे. आयोग के फैसले के तुरंत बाद उन्होंने कहा कि विशेष आम अधिवेशन कोई विवाद का मामला नहीं था. चुनाव आयोग ने संविधान, मौजूदा कानूनों और पार्टी संविधान के अनुसार फैसला लिया है. हम इसके लिए आभारी हैं. थापा ने देउबा के प्रति भी सम्मान व्यक्त किया और पार्टी के सभी वर्गों से समर्थन और सहयोग मांगा. दूसरी तरफ देउबा गुट ने आयोग के फैसले पर निराशा जताई है.
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