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Ground Report: नेपाल में बाढ़ के केंद्र रसुआ पहुंचने की जिद और एक रिपोर्टर की जद्दोजहद

Nepal Ground Report: कहीं पथरीला रास्ता मिला तो कहीं तेज बहता पानी, कहीं बेहद सकरी सड़क मिली तो कहीं बारिश में गीली हुई मिट्टी पर फिसलते पहियों और घाटी में गिरने की आशंकाओं को पार करते हुए ये सब संभव हो सका.

Ground Report: नेपाल में बाढ़ के केंद्र रसुआ पहुंचने की जिद और एक रिपोर्टर की जद्दोजहद
नेपाल के रसुआ में अब कैसे हैं हालात, देखें ग्राउंड रिपोर्ट
  • नेपाल के रसुआ में भोटेकोशे नदी की बाढ़ से भारी तबाही हुई, जिससे क्षेत्र पूरी तरह प्रभावित हुआ है
  • एनडीटीवी की टीम ने कठिन और जोखिम भरे रास्तों से रसुआ पहुंचकर बाढ़ के बाद के हालात दिखाए
  • रसुआ में पानी तो ढल गया लेकिन मिट्टी का दलदल और गाद ही गाद दिखाई दे रही है

नेपाल में बाढ़ से जमकर तबाही हुई है. बाढ़ के एपिसेंटर यानी रसुआ था. यहां मौजूद भोटेकोशे नदी में आई बाढ़ की वजह से सबकुछ तबाह हो गया. पानी तो ढल गया लेकिन तबाही के निशान पीछे छोड़ गया है. एनडीटीवी दुनिया का पहला चैनल है, जो नेपाल की बाढ़ के एपिसेंटर यानी रसुआ पहुंचा. जब नेपाल का रसुआ पूरी तरह से डिस्कनेक्टेड था, तब कैसे फिसलन भरे रास्तों से एनडीटीवी के संवाददाता जमीनी सच्चाई दिखाने पहुंचे, वो कहानी शायद हम आपको समझा न सकें लेकिन कुछ तस्वीरें हैं, जिससे आप महसूस कर सकते हैं कि कितनी मुश्किल भरे सफर के बाद ये सब संभव हो सका. 

मिट्टी के दलदल में फंसे गाड़ी के पहिए

 रसुआ तक पहुंचने का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था. मिट्टी के दलदल में एनडीटीवी की गाड़ी फंस गई. मिट्टी में फंसने की वजह से गाड़ी के पहिए आगे ही नहीं बढ़ पा रहे थे. स्थानीय लोगों की मदद और क्रेन की सहायता से गाड़ी को मिट्टी के दलदल से बाहर निकाला जा सका. गाड़ी को बाहर निकालने के लिए टीम के लोगों को खुद नंगे पैर गाद में उतरना पड़ा तब जाकर आगे बढ़ा जा सका. 

बाढ़ के बाद कैसे हैं रसुआ के हालात?

रसुआ जाने के रास्ते की बात करें तो बाढ़ आने से पहले काठमांडू से छहरे, नुवाकोट, बेतरवती होते हुए रसुआ जाया जाता था. बाढ़ के बाद नुवाकोट के विदुर के बाद रास्ता कट चुका है. न सिर्फ विदुर बल्कि उसके आगे भी कई जगह हाईवे को पानी के सैलाब ने पानी की धार में मिला दिया. ऐसे में एनडीटीवी ने ठान लिया कि उसे रसुआ जाकर सबको जमीनी हकीकत दिखानी है.  

न सड़क, न रास्ते, हर तरफ मिट्टी का दलदल

तिब्बत बॉर्डर से सटे नेपाल के रसुआ जाने के लिए काठमांडू–टोखा–छहरे–गड्खार पुल–आप्रा–नर्जा–लच्याङ–सरमथली–पाटीखर्क होते हुए बोगटीटार–कालिकास्थान–धुन्चे का रास्ता लेना पड़ा. ये न हाईवे है और न इस रास्ते पर कोई ठीक ठाक सड़क ही है. पहाड़ों पर बसे छोटे-छोटे गांवों से होते हुए रसुआ तक जाना संभव हो पाया.

मुश्किल रास्तों से होकर रसुआ पहुंचा NDTV

मुकाम तक पहुंचने की जद्दोजहद और जिद ने उन कठिन रास्तों को ही बेहतर बना दिया. कहीं पथरीला रास्ता मिला तो कहीं तेज बहता पानी, कहीं बेहद सकरी सड़क मिली तो कहीं बारिश में गीली हुई मिट्टी पर फिसलते पहियों और घाटी में गिरने की आशंकाओं को पार करते हुए ये सब संभव हो सका.

रसुआ में NDTV की टीम को क्या मिला?

एडीटीवी की टीम जब रसुआ के रास्ते पहुंची तो वहां पर सड़क बिल्कुल गायब थी. भोटेकोशे नदी में आई बाढ़ के बाद पीछे छूटा तबाही का मंजर वहां साफ दिखाई दिया. आसपास के मकान और इमारतें लगभग खत्म हो चुके हैं. सड़क के बजाय हर तरफ मिट्टी का दलदल और गाद नजर आ रही है.क्रेनों की मदद से रास्तों से मलबे और मिट्टी को हटाया जा रहा है. वहां मौजूद एक क्रेन की मदद से ही एनडीटीवी की मिट्टी के दलदल में फंसी गाड़ी को बाहर निकाला जा सका. बता दें कि बाढ़ के बाद रसुआ लगभग खत्म हो चुका है. हालात को एक बार फिर से सुधारने की कोशिश जारी है.

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