बिहार के जमुई में जो कुछ हुआ, उसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. घूमने गए छात्र-छात्रा को कुछ लोगों ने घेर लिया, छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न हुआ, जबकि छात्र को पीटा गया. ये सबकुछ लगभग 20 मिनट तक चला.
छात्र और छात्रा दोनों दोस्त थे और घूमने आए थे. पहाड़ी घूमने के बाद जब दोनों लौट रहे थे, तभी भीड़ ने उन्हें रोक लिया और छेड़छाड़ की. मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. तीनों ही नाबालिग हैं.
स्थानीय लोगों ने बताया कि पहाड़ के पास इस तरह की यह पहली घटना नहीं है. अगर कोई लड़का-लड़की यहां आते हैं तो कुछ लोग उन्हें परेशान करते रहे हैं. लेकिन लोग शिकायत नहीं करते, इसलिए ऐसे लोगों को शह मिलती रहती है.
पहले से प्लानिंग करके बैठे थे आरोपी
स्थानीय लोगों ने बताया कि आरोपियों ने छात्र-छात्रा को परेशान करने के बारे में पहले ही पूरी प्लानिंग कर ली थी.
उन्होंने बताया कि जब छात्र-छात्रा पहाड़ पर गए थे, तभी आरोपियों ने दोनों को परेशान करने की प्लानिंग कर ली. आरोपी पहले से ही वहां इकट्ठा थे. जैसे ही दोनों नीचे उतरे, आरोपियों ने उन्हें घेर लिया. उनसे पूछताछ करने लगे. लड़की रोती रही और कहती रही कि अब नहीं आएंगे, जानें दें लेकिन आरोपियों ने एक न सुनी.
इस घटना के वायरल वीडियो में साफ-साफ दिख रहा है कि आरोपी छात्रा के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं. एक आरोपी छात्रा को उठाकर भागने की कोशिश करता रहा. ये सब करीब 20 मिनट तक चला. इस दौरान आसपास से कई लोग गुजरे लेकिन किसी ने दोनों की मदद नहीं की.
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बदसलूकी का पैटर्न वही
आए दिन मॉरल पुलिसिंग के नाम पर भीड़ साथ घूमने वाले लड़का-लड़की को घेर लेते हैं, उन्हें प्रताड़ित करते हैं, लड़के के साथ मारपीट करते हैं तो लड़की से छेड़छाड़ करते हैं.
साथ घूमने वाले लड़का-लड़की के साथ बदसलूकी करने वालों का पैटर्न एक जैसा ही है. भीड़ ये नहीं देखती कि साथ घूमने वाले कौन हैं? दोनों में क्या रिश्ता है? दोनों वहां क्यों घूम रहे हैं? भीड़ बस आती है और आते ही लड़के के साथ मारपीट और लड़की से छेड़छाड़ करने लगती है.
साथ घूमने वाले लड़का-लड़की को घेरकर भीड़ नाम पूछती है, उनसे आईडी कार्ड मांगती है और माता-पिता को फोन लगाने का दबाव बनाती है. कई बार माफी मांगने तक के लिए मजबूर किया जाता है.
लेकिन ये सब क्यों?
हमारा संविधान और कानून हमें कहीं भी और किसी के साथ भी जाने या घूमने की इजाजत देता है. संविधान का अनुच्छेद 19 किसी भी नागरिक को देश के किसी भी सार्वजनिक जगह पर बिना किसी रोक-टोक के आने-जाने और घूमने का अधिकार देता है.
सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में यह भी साफ किया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता और सम्मान से जीने का अधिकार हर इंसान का बुनियादी अधिकार है. फिर चाहे उसकी उम्र या लिंग कुछ भी हो.
अगर दो लोग साथ में घूम रहे हैं तो किसी के पास उन्हें रोकने, पूछताछ करने या फिर प्रताड़ित करने का अधिकार नहीं है. यहां तक कि कई मामलों में पुलिस के पास भी नहीं.
रात के समय एक कपल को परेशान करने वाले CISF कॉन्स्टेबल की बर्खास्तगी को सही ठहराते हुए 19 दिसंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पुलिस अधिकारियों के पास 'मॉरल पुलिसिंग' करने या निजी फायदे की मांग करने का कोई अधिकार या जिम्मेदारी नहीं है.
इतना ही नहीं, अदालतें तो यह तक साफ कर चुकी हैं कि अगर किसी जगह पर बैठकर दो लोग किस भी कर रहे हैं तो वह अश्लीलता नहीं मानी जाती. एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर दो लोग किस कर रहे हैं और उससे किसी को परेशानी नहीं है तो यह अश्लीलता नहीं मानी जाएगी. कोर्ट ने कहा था कि इसे अश्लीलता के दायरे में लाने के लिए यह भी साबित करना होगा कि इससे दूसरों को परेशानी हुई थी.
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और पुलिस वालों का क्या है सोचना?
अब जब मॉरल पुलिसिंग पर इतनी बात हो रही है तो पुलिस वालों का रवैया भी जानना जरूरी है. जमुई के मामले में दो दोस्त थे, कपल नहीं, लेकिन कपल को देखकर पुलिस वालों को भी गुस्सा आ जाता है.
हर 10 में से 1 पुलिस वाला मानता है कि पब्लिक प्लेस पर कपल अगर कुछ हरकत करता है तो उन्हें थाने लाकर सबक सिखाना जरूरी है.
'स्टेटस ऑफ पुलिसिंग इन इंडिया रिपोर्ट 2025' बताती है कि 59% पुलिस वालों का मानना है कि अगर पब्लिक प्लेस में कपल प्यार जता रहे हैं तो उन्हें वॉर्निंग देकर जाने देना चाहिए. जबकि, 10% मानते हैं कि ऐसे लोगों पर सरेआम जोर-जोर से चिल्लाना चाहिए ताकि उन्हें सबक मिले. वहीं, 10% पुलिस वालों का मानना है कि ऐसे कपल को हिरासत में ले लेना चाहिए और सबक सिखाना चाहिए.
कुछ पुलिस वालों की सोच तो और भी ज्यादा कट्टर है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, 4% पुलिस वालों का मानना है कि ऐसे कपल को लाठी-डंडे से मारना चाहिए या जोरदार थप्पड़ लगाना चाहिए. वहीं, 2% पुलिस वाले ये मानते हैं कि ऐसे कपल को तुरंत गिरफ्तार कर लेना चाहिए.
कुल मिलाकर, इस मामले में दो दोस्त थे, जो पहाड़ी घूमने आए और वापस लौट रहे थे लेकिन मॉरल पुलिसिंग के नाम पर उन्हें न सिर्फ प्रताड़ित किया गया, बल्कि छात्रा के साथ छेड़छाड़ भी की. संविधान और कानून सबको सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है. अगर नाबालिग हैं तो जुवेनाइल एक्ट और पॉक्सो एक्ट संरक्षण देता है.
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