- नेपाल में आई बाढ़ में 1250 से अधिक लोगों की मौत और 4000 से अधिक लापता होने की पुष्टि
- बाढ़ से प्रभावित बच्चों के स्कूल बैग और किताबें मलबे में मिलीं, जो इस त्रासदी की गंभीरता को दर्शाती हैं
- चितवन जिले में सबसे अधिक 355 शव बरामद किए गए, जबकि कुल मिलाकर कई जिलों में भारी जनहानि हुई है
नेपाल में आई भयंकर बाढ़ में कम से कम 1,252 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 4,216 लोग लापता हैं. ये आंकड़े बेहद बड़े हैं, लेकिन इनसे नेपाल में हुई त्रासदी की पूरी गंभीरता का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता. अचानक आई बाढ़ ने जिन बच्चों को महज आंकड़ों में बदल दिया, उनकी किताबें और स्कूल बैग उस नुकसान की कहानी बयां करते हैं, जो पूरी इंसानियत ने झेला है. यह सब प्रकृति की ऐसी ताकत के कारण हुआ, जिसे कोई रोक नहीं सकता.
मलबे में मिला स्कूल बैग और कीचड़ से सनी किताबें
नेपाल बाढ़ त्रासदी की लगातार कवरेज के दौरान NDTV को एक गंदा स्कूल बैग और कीचड़ से सनी कुछ किताबें मिलीं. ये सामान उन बच्चों का था, जो पानी, कीचड़ और पत्थरों के तेज बहाव को अपनी ओर आता देख जान बचाने के लिए भागे थे. इस सैलाब ने अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को तबाह कर दिया.
किताबों पर कक्षा 7 के छात्र रोशन मिजार का नाम और रोल नंबर 31 लिखा है. वह श्री बागेश्वरी सेकेंडरी स्कूल में पढ़ता है, या फिर शायद पढ़ता था. किताब के दो पन्नों के बीच एक प्लास्टिक का रूलर फंसा हुआ मिला, जो शायद इस बात का संकेत था कि टीचर ने पिछली क्लास में कहां तक पढ़ाया था. बैग के अंदर दो पेन और लंच में खाने के लिए रखा गया टिफिन भी मिला.
रोशन के साथ क्या हुआ, यह अभी पता नहीं है. हो सकता है कि वह किसी तरह सुरक्षित स्थान पर पहुंच गया हो, या फिर वह भी उन लोगों में शामिल हो गया हो जो या तो मारे गए हैं या अभी तक लापता हैं. लेकिन एक बात तय है कि उसने भी नेपाल के लाखों लोगों की तरह इस त्रासदी का दर्द झेला है.

नेपाल में बाढ़ के बाद के हालात
देश की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने चौंकाने वाले आंकड़े जारी किए हैं. मरने वालों की संख्या 1,300 के करीब पहुंचने के बाद बचाव और राहत एजेंसियों ने जिलेवार आंकड़े जारी किए हैं. चितवन में सबसे ज्यादा 355 शव मिले हैं. इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 218, नवलपरासी वेस्ट में 208, नुवाकोट में 177 और रसुवा में 127 शव बरामद किए गए हैं. चारों ओर मची अफरातफरी के बीच अब तक केवल 95 लोगों की ही पहचान हो पाई है.
अब तक 11,993 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है, जबकि 5,135 घायलों का उपचार चल रहा है.
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लापता लोगों में करीब 900 लोग अलग-अलग हाइड्र प्रोजेक्ट में शामिल थे. इसके अलावा कम से कम 583 विदेशी नागरिक और उनके साथ मौजूद 164 नेपाली नागरिक भी अब तक लापता हैं.
नेपाल का जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है. टेलीकॉम टावरों को भी भारी नुकसान पहुंचा है, जिसके कारण संचार व्यवस्था प्रभावित हुई है और लोगों के लिए संपर्क करना मुश्किल हो गया है.
दुनिया के कई देशों ने संकट से जूझ रहे नेपाल की मदद के लिए कदम बढ़ाए हैं. अमेरिका ने राहत एवं बचाव कार्यों के लिए विशेष उपकरण और सहायता भेजी है. वहीं भारत ने भी अपने राहतकर्मियों, उपकरणों और आवश्यक सामग्री के जरिए मदद पहुंचाई है.
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने इस आपदा को जलवायु परिवर्तन से जोड़ते हुए चिंता जताई है. वहीं विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि 'बड़े देशों' की यह 'ऐतिहासिक जिम्मेदारी' है कि वे नेपाल जैसे संवेदनशील देशों की भरपाई करें, क्योंकि वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में नेपाल का योगदान बेहद कम है.
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