नेपाल-चीन सीमा पर जो भयंकर आपदा आई वो पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चेतावनी है, और दुनियाभर में क्लाइमेट चेंज के बढ़ते संकट को देखते हुए तुर्की के अंताल्या शहर में होने वाली जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन की 'कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़' (COP 31) की बैठक में इससे निपटने के लिए सभी देशों को एकजुटता से रणनीति बनानी होगी.
भारत के दौरे पर आए ऑस्ट्रेलिया के जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा मंत्री और जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन की 'कॉन्फ्रेंस ऑफ़ पार्टीज़' (COP 31) के लिए नेगोशिएशन्स के अध्यक्ष, क्रिस बोवेन ने बुधवार को चिंतन रिसर्च फाउंडेशन (Chintan Research Foundation) और ऑस्ट्रेलिया सरकार द्वारा आयोजित Pre-COP Dialogue में ये अहम बात कही.
NDTV से एक्सक्लूसिव बातचीत में क्रिस बोवेन ने कहा कि हाल ही में नेपाल में आई आपदा दुनिया के लिए एक चेतावनी है कि जलवायु परिवर्तन अब हकीकत बन चुका है. यह अब सिर्फ एक अनुमान नहीं है. अगर हमने अभी मिलकर कदम नहीं उठाए, तो हालात और बिगड़ेंगे. हिमालयी राज्यों और अन्य क्षेत्रों के सामने आने वाली चुनौतियां अलग-अलग हैं. इस बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए हमें वैश्विक स्तर पर मिलकर काम करने की जरूरत है.
क्रिस बोवेन के मुताबिक, COP-31 की बातचीत में 3 अहम एजेंडा पॉइंट्स पर ध्यान देने की ज़रूरत है.
-विकासशील देशों को फ़ंडिंग ज़्यादा आसानी से मिलना
-ग्लोबल वार्मिंग को लगभग 1.5°C के लक्ष्य तक सीमित रखना
-2035 तक कुल ऊर्जा खपत में बिजली की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 35% करना
-जलवायु परिवर्तन के संकट से निपटने में भारत सरकार ने कई स्तर पहल शुरू की है
क्रिस बोवेन कहते हैं कि क्लाइमेट चेंज के मोर्चे पर भारत सरकार की नीतियों का रिकॉर्ड बेहतरीन रहा है. उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि मैं भारत की कोशिशों की पूरी तारीफ करता हूं. सौर ऊर्जा के लक्ष्यों को हासिल करने में भारत एक विश्व नेता के तौर पर आगे बढ़ रहा है.
अपने भारत दौरे के दौरान क्रिस बोवेन ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी से मुलाकात कर ग्लोबल स्तर पर एनर्जी संकट और भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एनर्जी पार्टनरशिप मजबूत करने के विकल्पों पर विचार किया.
भारत-ऑस्ट्रेलिया रिन्यूएबल एनर्जी पार्टनरशिप के बढ़ते महत्व पर क्रिस बोवेन ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा भरोसेमंद ऊर्जा है. यह एनर्जी पार्टनरशिप एक-दूसरे की पूरक ताकतों और इस बात पर आधारित है कि हम एक-दूसरे की कैसे मदद कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, गुजरात में सोलर एकेडमी को ही लें, जो 2,000 सोलर टेक्नीशियनों को ट्रेनिंग देगी और ग्रीन हाइड्रोजन पर जो काम हम कर रहे हैं, उसमें ऑस्ट्रेलिया के पास अच्छी रिसर्च और क्षमता है. इसलिए, यह पूरी तरह से एक-दूसरे की पूरक ताकतों पर बना रिश्ता है.
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