- बिहार के फौजी शैलेश कुमार ने अमेरिका की डेथ वैली में आयोजित बेडवाटर 135 दौड़ में नया कोर्स रिकॉर्ड बनाया
- शैलेश ने करीब 217 किलोमीटर की दौड़ 29 घंटे 28 मिनट 37 सेकंड में पूरी करने वाले पहले भारतीय बने
- डेथ वैली में दौड़ना अत्यंत कठिन माना जाता है क्योंकि यहां तापमान लगभग 50 डिग्री सेल्सियस होता है
बिहार के फौजी शैलेश कुमार ने अमेरिका की डेथ वैली में इतिहास रच दिया है. शैलेश ने मौत को मात देकर वो कर दिखाया, जो आज तक कोई भारतीय नहीं कर सका था. इन्होंने दुनिया की सबसे कठिन अल्ट्रामैराथनों में शामिल बेडवाटर 135 की दौड़ जीती है.
यह कोई सामान्य दौड़ नहीं बल्कि यहां तकरीबन 50 डिग्री सेल्सियस तापमान में दौड़ने वाले धावकों के जूतों के तलवे तक पिघलने का खतरा बना रहता है. डामर की सड़कें अंगारे की तरह सुलगती हैं. यही नहीं बल्कि शुष्क और गर्म हवा के कारण धावक के शरीर का सारा पानी जल्द सूख जाता है, जिससे बेहोशी व डिहाइड्रेशन का खतरा हर पल बना रहता है.
एनडीटीवी से बातचीत में शैलेश ने बताया कि अमेरिका की डेथ वैली में उनकी यह उपलब्धि किसी एक दिन की मेहनत का परिणाम नहीं है. वर्ष 2014 में फिटनेस के लिए शुरू हुई दौड़ धीरे-धीरे उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गई. वर्ष 2018 में 101 किलोमीटर की अल्ट्रा रेस से शुरू हुआ सफर 246 किलोमीटर लंबी तक पहुंचा और अब बेडवाटर 135 की जीत के रूप में नई ऊंचाई हासिल कर चुका है.

bihar shailesh kumar badwater 135 winner first indian
2013 में भारतीय नौसेना से जुड़े
शैलेश वर्ष 2013 में भारतीय नौसेना में भर्ती हुए. वर्तमान में वह केरल के कोच्चि स्थित नेवल एयरक्राफ्ट यार्ड में कार्यरत हैं. नौसेना की अनुशासित दिनचर्या में शारीरिक प्रशिक्षण पहले से ही जीवन का हिस्सा था, लेकिन वर्ष 2014 में उन्होंने फिटनेस के लिए दौड़ना शुरू किया. शैलेश कहते हैं कि शुरुआत में उनका कोई बड़ा लक्ष्य नहीं था. पहले उन्होंने हाफ मैराथन और फिर फुल मैराथन दौड़ी. लंबी दूरी पूरी करने का अनुभव अच्छा लगा तो उन्होंने खुद को और अधिक चुनौती देना शुरू कर दिया.
बेडवाटर 135 का सपना हुआ साकार
शैलेश ने NDTV को बताया कि बेडवाटर 135 के लिए उन्होंने करीब छह महीने तक विशेष तैयारी की. इस दौरान उनकी ट्रेनिंग दूरी 3,000 किलोमीटर से अधिक रही. लंबी दूरी की प्रैक्टिस, गर्म परिस्थितियों में दौड़ना और शरीर को कई घंटों तक लगातार मेहनत करने के लिए तैयार करना उनकी तैयारी का अहम हिस्सा था.
शैलेश बताते हैं कि अल्ट्रामैराथन में एक समय ऐसा आता है, जब शरीर थकान के बावजूद आगे बढ़ने को तैयार नहीं होता. ऐसे समय में मानसिक मजबूती सबसे ज्यादा काम आती है. शैलेश ने NDTV से कहा, “अल्ट्रा रनिंग में सिर्फ शरीर की ताकत पर्याप्त नहीं होती. एक समय के बाद मानसिक मजबूती ही आपको आगे लेकर जाती है. मैंने अपनी तैयारी में इस पहलू पर भी विशेष ध्यान दिया.”

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डेथ वैली में सबसे कठिन परीक्षा
कैलिफोर्निया की डेथ वैली में आयोजित बेडवाटर 135 में प्रतिभागियों को 135 मील यानी करीब 217 किलोमीटर की दूरी 40 घंटे में तय करनी होती है. यहां का अधिकतम तापमान 50 डिग्री तक होता है, जिसमें दौड़ना मतलब मौत को चुनौती देने के समान है. शैलेश ने 29 घंटे 28 मिनट 37 सेकंड में फिनिश लाइन पार की. उनका समय नया कोर्स रिकॉर्ड बना और वह इस प्रतियोगिता को जीतने वाले पहले भारतीय बने.
इस उपलब्धि के बाद अपने गांव और परिवार को याद करते हुए शैलेश कहते हैं, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि फिटनेस के लिए शुरू की गई दौड़ मुझे यहां तक ले आएगी. मेरे लिए यह सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है. जब गांव, परिवार और देश का नाम जुड़ता है तो इसकी खुशी अलग होती है.”

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कमालपुर से कैलिफोर्निया के मंच तक
शैलेश की कहानी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्होंने दौड़ की शुरुआत किसी रिकॉर्ड के लिए नहीं की थी. एक सामान्य फिटनेस रूटीन धीरे-धीरे जुनून में बदला और फिर जीवन का लक्ष्य बन गया. बिहार के कमालपुर गांव के किसान परिवार से मिले संस्कार, भारतीय नौसेना का अनुशासन और वर्षों का कठिन अभ्यास उन्हें एक के बाद एक लंबी और मुश्किल दौड़ों तक लेकर गया. आज वही शैलेश कैलिफोर्निया में इतिहास रच चुके हैं.
आठ भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं शैलेश
शैलेश के पिता बिंदेश्वरी प्रसाद किसान हैं, जबकि उनकी मां राजकुमारी देवी गृहिणी हैं. परिवार में वह सबसे छोटे हैं. उनसे बड़ी चार बहनें संध्या, पुष्पा, बेबी और रानी हैं. उनके तीन बड़े भाई संतोष, सोनू और संजीव कुमार हैं. बहनों का विवाह हो चुका है. संतोष परिवार की जिम्मेदारियों के साथ पिता के खेती-किसानी के काम में सहयोग करते हैं. सोनू साइबर कैफे चलाते हैं, जबकि संजीव कुमार प्रोफेशनल कॉरपोरेट शेफ हैं और हैदराबाद के टाइगर लिली रेस्टोरेंट में कार्यरत हैं.
बड़े परिवार में पले-बढ़े शैलेश के लिए मेहनत, जिम्मेदारी और आपसी सहयोग बचपन से ही जीवन का हिस्सा रहा है. शैलेश ने NDTV से कहा, “मैं एक साधारण परिवार से आया हूं. मेरे माता-पिता और भाई-बहनों ने हमेशा मेरा साथ दिया. परिवार से मिली मेहनत, अनुशासन और एक-दूसरे के लिए खड़े रहने की सीख मेरे जीवन में बेहद महत्वपूर्ण रही है.”
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