आप सभी ने सड़कें डामर (बिटुमिन) और सीमेंट की बनते देखी होंगी, लेकिन IIT BHU की टीम ने प्लास्टिक के अवयवों से तैयार सड़कों का सफल प्रयोग किया है. झांसी में NHAI की टीम के साथ मिलकर एनएच-44 पर 1 किलोमीटर के पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्लास्टिक के अवयवों से तैयार सामग्री से सड़क का निर्माण किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा है. इसे 'वेस्ट प्लास्टिक मॉडिफाइड बिटुमेन' (W-PMB 76-10) नाम दिया गया है. इसके लिए 'वेस्ट प्लास्टिक वैट प्रोसेस टेक्नोलॉजी' (गीली प्रक्रिया तकनीक) विकसित की गई है.
नई तकनीक से क्या फायदा?
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा वित्त पोषित एक शोध कार्यक्रम के तहत आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी द्वारा प्रीमियम गुणवत्ता वाले 'वेस्ट प्लास्टिक मॉडिफाइड बिटुमेन' (W-PMB 76-10) के उत्पादन के लिए 'वेस्ट प्लास्टिक वैट प्रोसेस टेक्नोलॉजी' (गीली प्रक्रिया तकनीक) विकसित की गई है.
डामर वाली सड़कों के निर्माण से बेहतर
इसके उपयोग से सड़कों में दरार पड़ने की संभावना घटेगी, साथ ही विदेशों से आयातित पॉलिमर पर भारत की निर्भरता भी कम होगी. इस तकनीक के जनक IIT BHU के प्रोफेसर अंकित गुप्ता, मनोज गुप्ता, सौरभ गुप्ता, सिद्धांत सोमानी और ART की टीम हैं. इसका सफल परीक्षण झांसी NHAI की टीम के साथ संयुक्त रूप से किया गया है.
सड़क ही नहीं, मेट्रो के लिए भी नया ऐप
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