विज्ञापन

VIDEO: सैटेलाइट तस्वीरों ने दिखाया नेपाल की तबाही का मंजर, नदी ने बढ़ाया कई गुणा दायरा

बृहस्पतिवार तक के आंकड़ों के अनुसार, 26 अगस्त को ग्लेशियर के पहाड़ के ढहने की भयानक घटना के बाद से चीन-नेपाल सीमा के दोनों ओर 1,200 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. लगभग 5,000 लोग लापता हैं.

VIDEO: सैटेलाइट तस्वीरों ने दिखाया नेपाल की तबाही का मंजर, नदी ने बढ़ाया कई गुणा दायरा
बाढ़ के पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है नदी ने अपना दायरा बहुत अधिक बढ़ा लिया है.
  • 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ ने तिब्बत से आने वाली भोटे कोशी या त्रिशूली नदी की तलहटी में बड़े बदलाव किए हैं
  • मध्य नेपाल में त्रिशूली नदी का दायरा काफी बढ़ गया है, जिससे आसपास के मकान, दुकानें और लोग जलमग्न हो गए हैं
  • रसुवा के तीमूरे में बाढ़ से पहले नदी की चौड़ाई 78 मीटर थी जो अब 350 मीटर तक फैल गई है

सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने तिब्बत से आने वाली भोटे कोशी या त्रिशूली नदी को कितना बदल दिया. भोटे कोशी को ही मध्य नेपाल में त्रिशूली नदी कहा जाता है. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि 26 अगस्त को मध्य नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद नदी की तलहटी में बड़े बदलाव आए हैं. नदी ने अपना दायरा बहुत ज्यादा बढ़ा लिया है. यही कारण है कि इस नदी के आसपास बने सभी मकान-दुकान और लोग जलमग्न हो गए. और कई अब तक लापता हैं.

नेपाल बाढ़: नदी ने कितनी लांघी लक्ष्मण-रेखा  

  • रसुवा के तीमूरे में बाढ़ से पहले 78 मीटर की चौड़ाई में नदी बहती थी. 
  • अब रसुवा के तीमूरे में ही 350 मीटर चौड़ाई में नदी का फैलाव है.
  • स्याब्रूबेसी में बाढ़ से पहले 65 मीटर चौड़ाई में नदी बहती थी.
  • अब स्याब्रूबेसी में 300 मीटर चौड़ाई में नदी का फैलाव है.
  • नुवाकोट के चौपठोके में बाढ़ी से पहले 65 मीटर चौड़ाई में नदी बहती थी.
  • अब नुवाकोट के चौपठोके में 443 मीटर चौड़ाई में नदी का फैलाव है.
  • बिदूर के बत्तर में बाढ़ के पहले 91 मीटर चौड़ाई में नदी बहती थी.
  • अब बिदूर के बत्तर में 309 मीटर चौड़ाई में नदी का फैलाव है.

देखें वीडियो

सैटेलाइट तस्वीरों से साफ है कि जब नदियां अपनी लक्ष्मण रेखा लांघती हैं तो विनाश आता है. वहीं अगर नदियां अपने को सिकोड़ लेती हैं तो भी इंसानों से लेकर पशु-पक्षियों के लिए वो विनाश ही है. इसीलिए पहले लोग नदियों से काफी दूरी पर घर बनाते थे. मगर आजकल नदियों के आसपास लगातार निर्माण कार्य चल रहा है. लोग नदी से सटकर घर बना रहे हैं और यही नेपाल में भी हुआ है. 

1200 मारे गए, 5000 लापता

बृहस्पतिवार तक के आंकड़ों के अनुसार, 26 अगस्त को ग्लेशियर के पहाड़ के ढहने की भयानक घटना के बाद से चीन-नेपाल सीमा के दोनों ओर 1,200 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. लगभग 5,000 लोग लापता हैं. संयुक्त राष्ट्र ने आज ही चेतावनी दी कि नेपाल में बाढ़ से बचे लोगों तक पहुंचना एक बहुत बड़ी चुनौती है. सड़कें टूट जाने के कारण राहत कर्मियों को हिमालय के अलग-थलग इलाकों में रहने वाले लोगों तक पहुंचने के लिए कार्गो ड्रोन और सामान ढोने वालों (पोर्टर्स) का इस्तेमाल करने के बारे में सोचना पड़ रहा है. 

काठमांडू में पत्रकारों से बात करते हुए संयुक्त राष्ट्र की रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर लीला पीटर्स याहिया ने कहा, "यह अविश्वसनीय है. आपदा का पैमाना और तबाही का स्तर बहुत बड़ा है." वहीं अब भी लापता लोगों की तलाश जारी है. नेपाल और चीन के तिब्बत में लापता लोगों में कम से कम 34 देशों के 800 से ज्यादा विदेशी शामिल हैं, जिनमें पर्यटक और तीर्थयात्री भी हैं. काठमांडू में, कुछ लापता विदेशियों के परिवारों ने कहा कि वे किसी भी जानकारी के लिए अस्पतालों और मुर्दाघरों में खोजबीन कर रहे हैं.

यह भी पढ़ें-

'...दुनिया का अंत हो तो हो': अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने क्यों की ये खतरनाक बात

श्रीकृष्ण ने धर्म की स्थापना की... जन्माष्टमी कार्यक्रम में बांग्लादेश PM, शेख हसीना की तुलना कंस से की

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Nepal, Nepal Flood 2026, Nepal Flood And Landslide, Nepal Flood Damage, Nepal Flood Aftermath
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com