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जिनपिंग के बाद अब क्या पुतिन भी अमेरिका जाएंगे? G-20 का ट्रंप ने भेजा है निमंत्रण, जानिए रूस का जवाब

यूक्रेन के सहयोगी पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा कि मियामी समिट में पुतिन को बुलाने से मॉस्को को यूक्रेन पर हमले जारी रखने के लिए बढ़ावा मिल सकता है. जाहिर है यूरोप के नेता इससे खुश नहीं हैं.

जिनपिंग के बाद अब क्या पुतिन भी अमेरिका जाएंगे? G-20 का ट्रंप ने भेजा है निमंत्रण, जानिए रूस का जवाब
रूस ने कहा है कि अभी पुतिन के मियामी जाने का कार्यक्रम तय नहीं हुआ है.
  • अमेरिका ने रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिशों के तहत पुतिन को G20 बैठक में आमंत्रित किया है
  • रूस ने पुतिन के G20 समिट में भाग लेने के अमेरिकी निमंत्रण की सराहना की, लेकिन अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है
  • यूरोप के नेता पुतिन के निमंत्रण की आलोचना कर रहे हैं और यूक्रेन मुद्दे को G20 में उठाने की योजना बना रहे हैं

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने घोषणा की है कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिशों के बीच, वॉशिंगटन ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अमेरिका के मियामी में होने वाली दिसंबर की G20 बैठक के लिए आमंत्रित किया है. बुधवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ बैठक के बाद, रुबियो ने कहा कि अमेरिका यूक्रेन के मुद्दे पर मॉस्को के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है. अब इस पर रूस का बयान भी आ गया है.

रूस ने निमंत्रण पर क्या कहा 

रूस ने निमंत्रण पर कहा कि मियामी में होने वाले G20 समिट में शामिल होने के लिए पुतिन को मिले अमेरिकी निमंत्रण की रूस सराहना करता है. हम वास्तव में इस निमंत्रण की सराहना करते हैं और इसे महत्व देते हैं. मगर, इस बारे में बात करना अभी जल्दबाजी होगी कि क्या रूसी नेता G20 समिट में जाएंगे और अपने अमेरिकी समकक्ष डोनाल्ड ट्रंप से मिलेंगे. अभी इस बारे में बात करना जल्दबाजी होगी. अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है. रूस किसी भी स्थिति में G20 कार्यक्रमों में भाग लेगा, जबकि पुतिन के निमंत्रण पर फैसला बाद में लिया जाएगा. इस पर विचार किया जाएगा और फिर उचित निर्णय लिया जाएगा. किसी भी स्थिति में, रूस G20 और उसके दायरे में होने वाले सभी मंचों के कामकाज में भाग लेना जारी रखने का इरादा रखता है.

ट्रंप और पुतिन की आखिरी आमने-सामने की मुलाकात अगस्त 2025 में अलास्का के एंकरेज में हुई थी, लेकिन वे यूक्रेन के मुद्दे पर किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए थे. 2022 में यूक्रेन पर हमला करने के बाद से पुतिन अमेरिका की मुख्य भूमि नहीं गए हैं. 2021 में, रूसी नेता ने G20 समिट में वर्चुअली हिस्सा लिया और वीडियो फ़ीड के जरिए बात की, लेकिन 2023 में जब भारत में समिट हुई, तो पुतिन ने अपनी जगह लावरोव को भेजा.

कहीं गिरफ्तारी का तो डर नहीं

मार्च 2023 में, ICC ने यूक्रेनी बच्चों को गैर-कानूनी तरीके से रूस भेजने के कथित युद्ध अपराध के लिए पुतिन की गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था. रोम स्टैच्यू (वह अंतरराष्ट्रीय संधि जिसके तहत ICC बनी थी) के नियमों के अनुसार, जिन देशों ने इस संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, उनके लिए यह जरूरी है कि अगर गिरफ्तारी वारंट वाला कोई व्यक्ति उनके इलाके में आता है, तो वे उस वारंट पर अमल करें. हालांकि, अमेरिका रोम स्टैच्यू का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है और इसलिए वह इसे नहीं मानेगा. इसके अलावा, खबर है कि ट्रंप प्रशासन ICC के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है; ICC ने गाजा में युद्ध अपराधों के शक में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की गिरफ्तारी का वारंट भी जारी किया है. अमेरिका पहले भी ICC अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा चुका है.

असली वजह तो ये

मगर बात दरअसल ये है नहीं. वैसे तो फिर 2023 में पुतिन भारत भी आते. कारण कि भारत जैसे दोस्त के यहां तो गिरफ्तारी क्या कोई पुतिन को छूने की हिम्मत नहीं कर सकता था, मगर फिर भी पुतिन नहीं आए. मगर ब्रिक्स की बैठक में आए. ये इस बात को साबित करता है कि ICC के चलते पुतिन डरने वाले नहीं हैं, बल्कि वो नहीं चाहते कि यूक्रेन युद्ध के दौरान उनका सामना पश्चिमी देशों के नेताओं के साथ हो और माहौल अनावश्यक रूप से तनावपूर्ण बने. ट्रंप के निमंत्रण देने के बाद से ये बात सच भी साबित हुई है. यूरोपीय संघ की विदेश मामलों की उच्च प्रतिनिधि काजा कल्लास ने इस निमंत्रण की आलोचना की और कहा कि वह G20 के अन्य सदस्यों के साथ यूक्रेन मुद्दे को उठाएंगी. गुरुवार को पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा कि मियामी समिट में पुतिन को बुलाने से मॉस्को को यूक्रेन पर हमले जारी रखने के लिए बढ़ावा मिल सकता है. जाहिर है यूरोप के नेता इससे खुश नहीं हैं और वो पूरी कोशिश करेंगे कि जेलेंस्की को भी इसमें बुलाया जाए. ऐसे में पुतिन के लिए ये असहज करने जैसी स्थिति हो जाएगी. हां, ये अलग बात है कि अगर दिसंबर तक रूस-यूक्रेन युद्ध का कोई हल निकल जाता है तो पुतिन अमेरिका जा सकते हैं.

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